Cancer Pain: शरीर में जब लगातार ऐसा दर्द रहने लगे कि उठना-बैठना और रोज के छोटे-मोटे काम करना भी भारी पड़ने लगे, तो इसे सहते रहना कोई समझदारी नहीं है। अक्सर कैंसर के मरीजों और उनके घर वालों को लगता है कि इस बीमारी में तो दर्द झेलना ही पड़ेगा, यह तो बीमारी का हिस्सा है। पर सच यह है कि आज के टाइम में ऐसी कई दवाइयां और तरीके आ चुके हैं, जिनसे इस दर्द को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। नामी क्लीवलैंड क्लिनिक और भारतीय डॉक्टरों की गाइडलाइंस भी यही कहती हैं कि दर्द सहने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आइए जानते हैं कि किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और आराम पाने के क्या रास्ते हैं।
कौनसे लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर मरीज में ये दिक्कतें दिख रही हैं, तो समझ जाइए कि दर्द हाथ से बाहर हो रहा है और तुरंत डॉक्टर से बात करें;
- रोज पेनकिलर खाने के बाद भी दर्द बना रहे या समय के साथ बढ़ता ही जाए।
- बैठते, खड़े होते या चलते समय रीढ़ की हड्डी या जोड़ों में गहरा खिंचाव और दर्द होना।
- अचानक से बहुत तेज दर्द उठना।
- अंगों में चींटियां चलना या सुन्नपन।
- सो न पाना और खाना छूट जाना।
कैंसर का दर्द कितने प्रकार का होता है?
ndian Journal of Palliative Care (आईजेपीसी) के अनुसार, कैंसर (जैसे कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी) के कारण होने वाला दर्द अलग-अलग रूपों में सामने आता है, जो मरीज की दिनचर्या को सीधे बाधित करता है;
- तीव्र दर्द (Acute Pain)।
- ब्रीथथ्रू पेन (Breakthrough Pain)।
- क्रोनिक दर्द (Chronic Pain)।
- हड्डियों और नसों का दर्द।
दर्द से राहत पाने के तरीके कौनसे हैं?
- डॉक्टर की सलाह से दवाइयों का इस्तेमाल।
- नर्व ब्लॉक।
- ट्यूमर का साइज छोटा करना।
- मालिश, सिकाई और हल्की थेरेपी।
कैंसर की इस मुश्किल लड़ाई में बहुत से लोग दर्द को चुपचाप सहते रहते हैं, यह सोचकर कि यह तो बीमारी का हिस्सा ही है। पर सच यही है कि दर्द सहने से बीमारी ठीक नहीं होती, बल्कि मरीज की बची-खुची हिम्मत भी टूट जाती है। आज के समय में जब मेडिकल साइंस इतनी आगे बढ़ चुकी है, तो किसी भी मरीज को तड़पने की ज़रूरत नहीं है। सही समय पर डॉक्टर से बात करके, सही दवाइयां और इलाज चुनकर दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर आपके घर में या आसपास कोई इस तकलीफ से गुजर रहा है, तो उन्हें यही समझाएं कि दर्द से राहत पाना उनका हक है। डॉक्टर से छिपाइए मत, खुलकर बात कीजिए और मरीज को एक आरामदायक जीवन जीने में मदद कीजिए।

