भास्कर न्यूज | टेटिया बंबर बड़हरा पंचायत के मथुरा गांव में सरकार की चलंत पशु एंबुलेंस सेवा एक बार फिर पशुपालकों के लिए वरदान साबित हुई। गांव निवासी लूचनारायण यादव की पालतू गाय के थन में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी, जिससे दूध निकलना पूरी तरह बंद हो गया था। स्थिति चिंताजनक होते ही पशुपालक ने तुरंत 1962 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सहायता मांगी। सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बिना देर किए उपचार शुरू किया। चिकित्सकों की तत्परता से गाय के थन की स्थिति में सुधार हुआ, जिससे पशुपालक ने राहत की सांस ली। इस दौरान चलंत एंबुलेंस के चिकित्सक डॉ. संजय कुमार और नरसिंह पंडित मौजूद रहे। डॉ. संजय कुमार ने कहा कि अब पशु चिकित्सा सेवाएं पहले से अधिक सुलभ और प्रभावी हो गई हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे पशुओं की बीमारी को नजरअंदाज न करें और समय पर इलाज कराएं। पंजीकरण है जरूरी 1962 हेल्पलाइन पर कॉल कर पशुपालक अपने पशुओं का पंजीकरण करा सकते हैं। सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक पंजीकरण के बाद चिकित्सा टीम सीधे घर पहुंचकर इलाज करती है, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है। यह सुविधा खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है। घटना के बाद गांव के अन्य पशुपालकों में भी इस सेवा को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। यह सुविधा पशुपालकों के लिए बेहद उपयोगी हैं और इससे पशु संरक्षण को मजबूती मिलेगी। भास्कर न्यूज | टेटिया बंबर बड़हरा पंचायत के मथुरा गांव में सरकार की चलंत पशु एंबुलेंस सेवा एक बार फिर पशुपालकों के लिए वरदान साबित हुई। गांव निवासी लूचनारायण यादव की पालतू गाय के थन में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी, जिससे दूध निकलना पूरी तरह बंद हो गया था। स्थिति चिंताजनक होते ही पशुपालक ने तुरंत 1962 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सहायता मांगी। सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बिना देर किए उपचार शुरू किया। चिकित्सकों की तत्परता से गाय के थन की स्थिति में सुधार हुआ, जिससे पशुपालक ने राहत की सांस ली। इस दौरान चलंत एंबुलेंस के चिकित्सक डॉ. संजय कुमार और नरसिंह पंडित मौजूद रहे। डॉ. संजय कुमार ने कहा कि अब पशु चिकित्सा सेवाएं पहले से अधिक सुलभ और प्रभावी हो गई हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे पशुओं की बीमारी को नजरअंदाज न करें और समय पर इलाज कराएं। पंजीकरण है जरूरी 1962 हेल्पलाइन पर कॉल कर पशुपालक अपने पशुओं का पंजीकरण करा सकते हैं। सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक पंजीकरण के बाद चिकित्सा टीम सीधे घर पहुंचकर इलाज करती है, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है। यह सुविधा खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है। घटना के बाद गांव के अन्य पशुपालकों में भी इस सेवा को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। यह सुविधा पशुपालकों के लिए बेहद उपयोगी हैं और इससे पशु संरक्षण को मजबूती मिलेगी।


