जबलपुर में 6वीं बटालियन (विसबल) परिसर के बंजर मैदान को हरियाली में बदलते हुए 18 हजार वर्गफीट का भव्य कैक्टस गार्डन तैयार किया गया है। इस गार्डन में 80 से अधिक प्रजातियों के कैक्टस और सक्यूलेंट्स लगाए गए हैं। बटालियन के कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी ने बताया कि इस गार्डन को विकसित करने का उद्देश्य इसे एक प्रतीक स्थल के रूप में स्थापित करना था, जो कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती से खड़े रहने की प्रेरणा दे। ऐसे तैयार हुआ गार्डन कमांडेंट चौधरी ने बताया कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया गया। इसके तहत सही जगह का चयन, मिट्टी की क्वालिटी सुनिश्चित करना और अलग-अलग तरह के पत्थरों से आकर्षक संरचनाएं तैयार करना शामिल था। देश के अलग-अलग राज्यों से कैक्टस और सक्यूलेंट्स की प्रजातियां मंगाई गईं। करीब 18 हजार वर्गफीट क्षेत्र में फैले इस गार्डन में 12 अलग-अलग एलीवेशन वाले टीले (माउंड) बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य विभिन्न प्रजातियों को उनके अनुरूप वातावरण प्रदान करना है। यहां 80 से अधिक प्रजातियों के कैक्टस और सक्यूलेंट्स रोपे गए हैं। दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां भी शामिल गार्डन में विक्टोरिया, बैरल कैक्टस, मून कैक्टस और मिल्क कैक्टस सहित कई दुर्लभ और आकर्षक प्रजातियां शामिल हैं। मिल्क कैक्टस को सबसे महंगा और विशेष पौधा बताया गया है, जिसकी ऊंचाई 10 फीट तक पहुंच सकती है और इसमें तारे जैसी कई शाखाएं निकलती हैं। यह पौधा भारत में हर जगह उपलब्ध नहीं होता। यहां मेक्सिको, साउथ अफ्रीका, मेडागास्कर, इटली और श्रीलंका सहित विभिन्न देशों की नस्लों के कैक्टस लगाए गए हैं, साथ ही भारत की भी कई प्रजातियां शामिल हैं। कठिन परिस्थितियों में भी जीवन का प्रतीक कमांडेंट चौधरी ने कहा कि कैक्टस ऐसा पौधा है जो सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। उसी प्रकार पुलिसकर्मी भी पारिवारिक और कार्यालयीन चुनौतियों के बीच अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करते हैं। इसी विचार को प्रतीकात्मक रूप देने के लिए इस गार्डन का निर्माण किया गया है।


