इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेलवे को प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड स्थित संगमरमर मस्ज़िद यथास्थिति कायम रखने का दिया निर्देश है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिया है। कमेटी के सचिव महबूब अली परवेज ने बताया कि कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 15 मई की तारीख लगाई है और अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही रेलवे को अगली सुनवाई तक याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका के अनुसार रेलवे ने मस्जिद हटाने के लिए नोटिस दिया है। मस्जिद कमेटी ने वक्फ संपत्ति का हवाला देकर याचिका में नोटिस को चुनौती दी है। याचिका में रेलवे के नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है। 27 अप्रैल को जारी हुई थी तोड़ने की नोटिस रेलवे भूमि पर अनाधिकृत मस्जिद कब्जे को खाली कर दें ताकि तोड़ा जा सके। प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर मेजर मॉडिफिकेशन का कार्य चरणबद्ध तरीके से प्रगति पर है। सिटी साइड सर्कुलेटिंग एरिया में मस्जिद रेलवे भूमि पर स्थित है। मस्जिद परिक्षेत्र को तत्काल (दिनांक 27.04.2026 तक) खाली करने की व्यवस्था करें ताकि प्रशासन की मंशानुरूप इसको तोड़कर कार्य किया जा सके। उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज की तरफ से जारी इस नोटिस ने खलबली मचा दी है। वक्फ बोर्ड से जुड़े पदाधिकारियों के साथ ही मुस्लिम तंजीमों के लोग पुराने दस्तावेज लेकर इधर उधर दौड़ लगाने लगे हैं। आग की तरह फैली खबर रेलवे स्टेशन वाली संगमरमर मस्जिद टूटेगी, यह खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गई है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर खबरें वायरल की जाने लगीं। मुस्लिम बहुल्य इलाकों में हर जुबां पर मस्जिद टूटेगी, बुलडोजर चलेगा की बातें हैं। नोटिस जारी करने वाले रेलवे के अधिकारी इस पर बयानबाजी से बच रहे हैं। मस्जिद कमेटी, मुस्लिम संगठनों से जुड़े लोग इसे मामले को हाईकोर्ट ले जाने की तैयारी पूरी कर रहे रहे हैं। महाकुंभ में नहीं हुई थी कार्रवाई उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के प्रयागराज मंडल के प्रयागराज जंक्शन के गेट के ठीक बगल मस्जिद है। महाकुंभ में रेलवे स्टेशन के आसपास बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटा था लेकिन मस्जिद बरकरार रही। अब करोड़ों रुपये खर्च कर प्रयागराज जंक्शन को एयरपोर्ट सरीखा बनाया जा रहा है। सिविल लाइंस साइड का काम कई साल से चल रहा है। अब सिटी साइड नए सिरे से निर्माण कार्य होना है। 15 से काम होगा, इससे पहले खाली करें मस्जिद प्रयागराज जंक्शन के इसी पुनर्निर्माण कार्य में मस्जिद का मसला उठ खड़ा हुआ जो हंगामेखेज हो गया है। रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर की ओर से 10 अप्रैल को जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सिटी साइड सर्कुलेटिंग एरिया में स्थित मस्जिद रेलवे की भूमि पर अनाधिकृत रूप से निर्मित है। नोटिस के मुताबिक स्टेशन के पुनर्विकास के तहत 15 अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जिसके चलते संबंधित भूमि को खाली कराना आवश्यक है। नोटिस में मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा तक भवन खाली न करने की स्थिति में होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी स्वयं कमेटी की होगी।
साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रशासन की योजना के अनुरूप निर्माण कार्य में बाधा आने पर भवन को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। कानूनी प्रक्रिया का पालन करें इस नोटिस के जारी होने के बाद मस्जिद कमेटी के होश् उड़ गए हैं। कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि संबंधित मस्जिद उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। ऐसे में उसे अनाधिकृत नहीं माना जा सकता।
उनका दावा है कि मस्जिद लंबे समय से वहां स्थापित है और धार्मिक स्थल होने के कारण इसे हटाने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। नोटिस मिलने के बाद से मस्जिद कमेटी और वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों ने पुराने दस्तावेज आदि खंगाल लिए हैं। रेलवे को जवाब देने के साथ ही मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी हैं।


