BRICS Summit से गया शांति का संदेश, Mirwaiz Umar Farooq बोले- कूटनीति से ही थमेगा टकराव

BRICS Summit से गया शांति का संदेश, Mirwaiz Umar Farooq बोले- कूटनीति से ही थमेगा टकराव

कश्मीर के मीरवाइज उमर फारूक ने नयी दिल्ली में हाल में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मंगलवार को तारीफ की और कहा कि इसने “शांति एवं कूटनीति का अच्छा संदेश” दिया। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि मौजूदा समय के युद्ध का दौर नहीं होने के दावे के बावजूद दुनियाभर में टकराव तेजी से बढ़ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न धार्मिक संगठनों के समूह ‘मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा’ (एमएमयू) की बैठक के बाद संवाददाताओं से मुखातिब मीरवाइज ने उम्मीद जताई कि तनाव कम करने की कोशिशें रंग लाएंगी और पश्चिम एशिया में शांति बहाल होगी।

पूर्व अलगाववादी नेता ने दुनियाभर में बढ़ती हिंसा के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि भले ही कई लोग कहते हों कि “यह दौर युद्ध का दौर नहीं है”, लेकिन दक्षिण एशिया और यूरोप से लेकर यूक्रेन और सूडान तक की जमीनी हकीकत लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापक उथल-पुथल पर प्रकाश डालती है। मीरवाइज ने पश्चिम एशिया, दक्षिण और मध्य एशिया, यूरोप, यूक्रेन तथा सूडान में बढ़ती अशांति का जिक्र करते हुए कहा, “हमारी हमेशा यही कोशिश रही है कि जब भी मौका मिले, हम इस बात पर चर्चा करें कि दुनिया आज कैसी स्थिति का सामना कर रही है, जहां दुर्भाग्य से युद्ध दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

हालांकि, हम कहते हैं कि यह दौर युद्ध का दौर नहीं है, लेकिन हमारे सामने जो हकीकत है, वह बिल्कुल इसके उलट है।”
भारत की अध्यक्षता में हाल में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बारे में मीरवाइज ने कहा, “मैं समझता हूं कि यह भी एक अहम बात थी कि ब्रिक्स के सिलसिले में दुनियाभर के नेता दिल्ली में जमा हुए। वहां से शांति और कूटनीति का एक अच्छा संदेश गया। हमें उम्मीद है कि ये कोशिशें रंग लाएंगी और शांति कायम होगी… हम हमेशा से इसके समर्थक रहे हैं।”
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ अपनी बातचीत से जुड़े एक सवाल के जवाब में मीरवाइज ने कहा कि मुलाकात अच्छी रही और इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों की ओर से एकजुटता का संदेश पहुंचाने का मौका मिला।

उन्होंने कहा, “हमने उन्हें एकजुटता का संदेश दिया। हमारा मानना ​​है कि जब तक न्याय नहीं होता, तब तक शांति कायम नहीं हो सकती। इसलिए हमने उन्हें यह संदेश पहुंचाया।

हमने ईरान और कश्मीर के बीच सदियों से मौजूद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सभ्यतागत संबंधों के बारे में भी बात की।”
मीरवाइज ने कहा कि ईरानी नेताओं ने कश्मीर का दौरा करने और वहां के लोगों से बातचीत करने की गहरी इच्छा जाहिर की। मीरवाइज ने अराघची को पेजेश्कियान के नाम दो पन्ने का पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने संयम, बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की ‘अहिंसा’ की विचारधारा की विरासत के साथ भारत बातचीत को बढ़ावा देने और पश्चिम एशिया के संघर्ष को और बढ़ने से रोकने में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।

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