सरकारी नौकरी का बड़ा मौका: राजस्थान में 9,582 पदों पर जल्द होगी भर्ती, वित्त विभाग से मिली मंजूरी

सरकारी नौकरी का बड़ा मौका: राजस्थान में 9,582 पदों पर जल्द होगी भर्ती, वित्त विभाग से मिली मंजूरी

बीकानेर। राजस्थान के शिक्षा विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। वित्त विभाग ने विभिन्न संवर्गों में कुल 9 हजार 582 पदों पर सीधी भर्ती को मंजूरी दे दी है। अब इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव (व्यय-1) देवेंद्र अरोड़ा ने इन भर्तियों को स्वीकृति प्रदान की है।

स्वीकृत पदों में 730 व्याख्याता (विषय विशेषज्ञ) और 4037 वरिष्ठ अध्यापकों के पद शामिल हैं, जिनकी भर्ती प्रक्रिया राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके अलावा 2 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षक, 1415 बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक, 900 शारीरिक शिक्षक और 500 प्रयोगशाला सहायकों के पदों पर भर्ती राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) द्वारा की जाएगी। इस तरह कुल 4767 पदों पर भर्ती RPSC और 4815 पदों पर भर्ती कर्मचारी चयन बोर्ड के जरिए की जाएगी।

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जल्द जारी होगी विज्ञप्ति

भर्ती की मंजूरी मिलने के बाद अब शिक्षा विभाग संबंधित भर्ती एजेंसियों को अभ्यर्थना भेजेगा, जिसके बाद ये संस्थाएं विज्ञप्ति जारी कर चयन प्रक्रिया शुरू करेंगी। इससे प्रदेश के हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।

20 हजार से अधिक लेक्चरर के पद खाली

हालांकि, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि यह स्वीकृति जरूरत के मुकाबले काफी कम है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विभिन्न विषयों के हजारों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, अकेले व्याख्याताओं के 20 हजार से अधिक पद खाली हैं, जिनमें से आधे पद सीधी भर्ती से भरने का प्रस्ताव था, लेकिन वित्त विभाग ने केवल 730 पदों को ही मंजूरी दी है।

बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया की मांग

इसी प्रकार वरिष्ठ अध्यापकों और तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। लंबे समय से न तो इन पदों पर समय पर सीधी भर्ती हो रही है और न ही पदोन्नतियां मिल पा रही हैं। ऐसे में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को जल्द और बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर हो सके और शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो।

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