भीलवाड़ा केंद्र सरकार ने खनन क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों से भिन्न) रियायत नियम 2016 में संशोधन किया है। इसके तहत लो-ग्रेड लौह अयस्क की बिक्री कीमत तय करने का नया फॉर्मूला लागू कर दिया है। साथ ही खदान से निकलने वाले कच्चे माल पर लगने वाली रॉयल्टी की गणना को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है।
खान मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। आर्थिक सलाहकार शकील आलम की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नियमों में दो बड़े बदलाव किए गए हैं। इसका फायदा राजस्थान के भीलवाड़ा खासकर पुर-बनेड़ा बेल्ट में आयरन ओर में 25 से 35 एफई ग्रेड की मात्रा को मिलगा, जहां लो ग्रेड का मैग्नेटाइट आयरन ओर निकाला जा रहा है।
रॉयल्टी गणना के नियमों में बदलाव
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि रन-ऑफ-माइन (खदान से निकला बिना प्रोसेस किया हुआ कच्चा माल) के प्रसंस्करण से उसके आर्थिक मूल्य में कमी आती है, तो रॉयल्टी की गणना प्रसंस्करण से पहले की जाएगी। ऐसी स्थिति में अप्रसंस्कृत खान बहिंस्राव की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद प्राप्त लम्प्स और फाइंस पर ही रॉयल्टी देय होगी। इससे रॉयल्टी को लेकर लीजधारकों और विभागों के बीच होने वाले विवादों में कमी आएगी।
लो-ग्रेड लौह अयस्क का नया प्राइसिंग फॉर्मूला
अब भारतीय खान ब्यूरो थ्रेशोल्ड वैल्यू से कम लौह तत्व वाले हेमेटाइट लौह अयस्क (जिसमें बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर शामिल हैं) की औसत बिक्री कीमत एक नए और स्पष्ट फॉर्मूले के आधार पर प्रकाशित करेगा। 35 से 45 प्रतिशत एफई ग्रेड के लिए, इस श्रेणी के लौह अयस्क की औसत बिक्री कीमत 45 से 51 प्रतिशत एफई ग्रेड वाले लौह अयस्क की औसत बिक्री कीमत के 75 प्रतिशत के बराबर मानी जाएगी। 35 प्रतिशत से कम एफई ग्रेड के लिए, सबसे निचले ग्रेड के लौह अयस्क की औसत बिक्री कीमत 45 से 51 प्रतिशत एफई ग्रेड वाले लौह अयस्क की औसत बिक्री कीमत के ठीक 50 प्रतिशत के बराबर होगी। खदान से निकले कच्चे माल की रॉयल्टी गणना पर स्थिति की स्पष्ट


