अररिया में PDS पर बड़ी कार्रवाई:7 डीलरों के लाइसेंस रद्द, 28 पर केस के निर्देश, भारी अनियमितताएं उजागर

अररिया में PDS पर बड़ी कार्रवाई:7 डीलरों के लाइसेंस रद्द, 28 पर केस के निर्देश, भारी अनियमितताएं उजागर

अररिया जिला पदाधिकारी विनोद दूहन के निर्देश पर जिले में जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों की व्यापक जांच की गई। इस दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद 7 PDS डीलरों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 4 डीलरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और 28 अन्य पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच में अररिया प्रखंड की झमटा पंचायत के डीलर अब्दुल बारी का गोदाम नहीं खुला पाया गया, जिसके कारण उनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इसी तरह, सुनिता कुमारी पर पिछले छह महीने से खाद्यान्न वितरण न करने का आरोप सिद्ध होने पर उनकी अनुज्ञप्ति भी रद्द की गई। छह महीने से वितरण न करने का आरोप था
चन्द्रदेई पंचायत के दो डीलर हेमंत कुमार के लाइसेंस भी रद्द किए गए; एक पर चाबी का बहाना बनाने और दूसरे पर छह महीने से वितरण न करने का आरोप था। रानीगंज प्रखंड की बसैठी पंचायत में अयोध्या राम और सोचन राम की दुकानों पर स्टॉक में भारी अंतर पाया गया और गोदाम खाली मिले, जिसके चलते दोनों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। खरहट पंचायत के शंकर कुमार मंडल के यहां पॉश मशीन में दर्ज 598.2 किलोग्राम खाद्यान्न भौतिक रूप से गायब पाया गया, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई। फारबिसगंज प्रखंड की पोठिया पंचायत में राजानंद यादव और मो. तालिब नजामी के खिलाफ लाभुकों द्वारा कम मात्रा में राशन देने की शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। अनियमितताओं के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई
कुर्साकांटा, सिकटी, पलासी और भरगामा प्रखंडों में भी कई डीलरों की दुकानें बंद पाई गईं। ई-पॉश मशीन का उपयोग न करने, स्टॉक में गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल पदाधिकारी अररिया और फारबिसगंज को विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने स्पष्ट किया कि PDS व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि लाभुकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा दोषी डीलरों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का यह सख्त रुख जिले में पारदर्शी और प्रभावी राशन वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने और गरीब लाभुकों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अररिया जिला पदाधिकारी विनोद दूहन के निर्देश पर जिले में जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों की व्यापक जांच की गई। इस दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद 7 PDS डीलरों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 4 डीलरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और 28 अन्य पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच में अररिया प्रखंड की झमटा पंचायत के डीलर अब्दुल बारी का गोदाम नहीं खुला पाया गया, जिसके कारण उनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इसी तरह, सुनिता कुमारी पर पिछले छह महीने से खाद्यान्न वितरण न करने का आरोप सिद्ध होने पर उनकी अनुज्ञप्ति भी रद्द की गई। छह महीने से वितरण न करने का आरोप था
चन्द्रदेई पंचायत के दो डीलर हेमंत कुमार के लाइसेंस भी रद्द किए गए; एक पर चाबी का बहाना बनाने और दूसरे पर छह महीने से वितरण न करने का आरोप था। रानीगंज प्रखंड की बसैठी पंचायत में अयोध्या राम और सोचन राम की दुकानों पर स्टॉक में भारी अंतर पाया गया और गोदाम खाली मिले, जिसके चलते दोनों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। खरहट पंचायत के शंकर कुमार मंडल के यहां पॉश मशीन में दर्ज 598.2 किलोग्राम खाद्यान्न भौतिक रूप से गायब पाया गया, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई। फारबिसगंज प्रखंड की पोठिया पंचायत में राजानंद यादव और मो. तालिब नजामी के खिलाफ लाभुकों द्वारा कम मात्रा में राशन देने की शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। अनियमितताओं के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई
कुर्साकांटा, सिकटी, पलासी और भरगामा प्रखंडों में भी कई डीलरों की दुकानें बंद पाई गईं। ई-पॉश मशीन का उपयोग न करने, स्टॉक में गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल पदाधिकारी अररिया और फारबिसगंज को विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने स्पष्ट किया कि PDS व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि लाभुकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा दोषी डीलरों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का यह सख्त रुख जिले में पारदर्शी और प्रभावी राशन वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने और गरीब लाभुकों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

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