भरतपुर। ट्रैक्टर चालकों से अवैध वसूली और रिश्वत मांगने के 12 साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत ने तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक (ASI) बलवीर शर्मा को दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी को तीन साल के साधारण कारावास के साथ 15 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं कराने पर आरोपी को तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विशिष्ट न्यायाधीश विशिष्ट न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम गिरिजेश कुमार ओझा ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
थानेदार के नाम 2 हजार, खुद के लिए 1 हजार मांगे
एसीबी के सहायक निदेशक अभियोजन दशरथ सिंह ने बताया कि आरोपी बलवीर शर्मा वर्ष 2012 में रुदावल थाने में एएसआई के पद पर तैनात था। उस दौरान आनंद नगर निवासी भूपाल सिंह ने 31 अक्टूबर 2012 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी ने आरोप लगाया था कि उसके ट्रैक्टर रुदावल क्षेत्र से नियमानुसार पत्थर लेकर आते-जाते थे। इस दौरान पुलिसकर्मी ट्रैक्टर चालकों को रोककर अवैध राशि की मांग करता था।
शिकायत के अनुसार, 25 अक्टूबर 2012 को ट्रैक्टर चालक महेन्द्र को रुदावल के पास रोककर उसके वाहन के कागजात जब्त कर लिए गए थे। कागजात वापस लौटाने के बदले तत्कालीन एसएचओ सुधीर कुमार और एएसआई बलवीर शर्मा ने 3 हजार रुपए की मांग की।
हर महीने पैसे देने पर ट्रैक्टर नहीं रोकने का वादा
आरोप था कि बाद में एएसआई से फोन पर हुई बातचीत में रिश्वत की रकम का बंटवारा भी बताया गया। कथित तौर पर 2 हजार रुपए थानेदार के हिस्से और 1 हजार रुपए खुद के लिए मांगे गए। साथ ही हर महीने 3 हजार रुपए देने पर ट्रैक्टर नहीं रोकने की बात कही गई। रिश्वत नहीं देने पर कागजात वापस नहीं करने और चालान करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।
गोपनीय सत्यापन में हुई रिश्वत मांग की पुष्टि
एसीबी ने परिवादी की शिकायत पर रिश्वत मांगने का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच के दौरान 3 हजार रुपए की मांग की पुष्टि हुई। इसके बाद एसीबी करौली ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया। परिवादी और आरोपी के बीच हुई बातचीत की सीडी भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई गई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर बलवीर शर्मा को दोषी माना और सजा सुनाई।
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