Behrampur Assembly Election 2026 Live: अधीर पहुंचेंगे विधानसभा या खिलेगा कमल? TMC उम्मीदवार भी दे रहे कड़ी टक्कर, नतीजे आज

बहरामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी चुनावी मैदान में है। यहां अल्पसंख्यक वोटर्स निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Election Results 2026) में बहरामपुर में एक दिलचस्प ट्रायंगुलर मुकाबला होने वाला है। यहां से इस बार कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी चुनावी मैदान में है। वहीं, बीजेपी से सुब्रत मैत्रा और टीएमसी से नारू गोपाल मुखर्जी उन्हें चुनौती देते हुए दिख रहे हैं।

बहरामपुर, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का एक महत्वपूर्ण शहरी विधानसभा क्षेत्र है। यह जनरल कैटेगरी की सीट है और बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह पश्चिम बंगाल का सातवां सबसे बड़ा शहर है तथा मुर्शिदाबाद जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। ऐतिहासिक रूप से बहरामपुर ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला केंद्र था। बाद में डच और फ्रेंच व्यापारिक कंपनियों का भी प्रमुख केंद्र बना। 1857 के सिपाही विद्रोह में बहरामपुर कैंटोनमेंट से शुरुआती अशांति शुरू हुई थी। कोसिमबाजार क्षेत्र अपने विश्व प्रसिद्ध मलमल उत्पादन के लिए जाना जाता था। आज यह बंगाल का प्रमुख व्यापारिक, शैक्षणिक और राजनीतिक केंद्र है।

राजनीतिक इतिहास

बहरामपुर विधानसभा सीट 1951 में अस्तित्व में आई। 1951 से 2006 तक इसे बराहमपुर नाम से जाना जाता था। 2011 के डिलिमिटेशन के बाद इसका नाम बहरामपुर हो गया। इस सीट में पूरी बहरामपुर नगरपालिका तथा बहारमपुर सीडी ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतें शामिल हैं।1951 से 2006 तक कांग्रेस ने 8 बार, RSP ने 3 बार और CPI ने 2 बार जीत हासिल की। 2006 में निर्दलीय मनोज चक्रवर्ती विजयी हुए। 2011 और 2016 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर सीट जीती। 2021 में BJP के सुब्रत मैत्रा (कंचन) ने TMC के नारू गोपाल मुखर्जी को 26,852 वोटों से हराकर पार्टी का खाता खोला। TMC ने इस सीट पर कभी जीत हासिल नहीं की है।

जनसांख्यिकी और वोटर

2026 चुनाव के लिए यहां 2,40,830 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष 1,18,741 और महिला 1,22,079 हैं। महिला-पुरुष अनुपात 1026 है। सीट मुख्य रूप से शहरी है (71.88% शहरी, 28.12% ग्रामीण)। 2021 में मुस्लिम मतदाता 25.10%, SC 12.28% और ST 2% थे।

भूगोल और अर्थव्यवस्था

बहरामपुर भागीरथी नदी के उपजाऊ मैदानों पर बसा है। यहां जूट, धान और सब्जियों की खेती होती है। शहर शिक्षा, व्यापार, छोटे उद्योगों और मिठाइयों (चनाबोरा, मनोहरा) के लिए प्रसिद्ध है। मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय तथा अच्छी सड़क-रेल कनेक्टिविटी इसे महत्वपूर्ण बनाती है। कोलकाता से यह करीब 186 किमी दूर है।

  

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