बांका जिले का अग्निशमन विभाग गंभीर रूप से संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। लगभग 25 लाख की आबादी वाले इस जिले में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त वाहन और उपकरण उपलब्ध नहीं हैं।जिले के कुल 11 प्रखंडों में से छह प्रखंड -रजौन,शंभूगंज,बौसी,चांदन,बेलहर और फुल्लीडुमर में एक भी छोटी या बड़ी अग्निशमन गाड़ी मौजूद नहीं है। इन प्रखंडों को आपात स्थिति में पड़ोसी प्रखंडों के अग्निशमन वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है।हाल ही में रजौन प्रखंड क्षेत्र में भीषण आग लगने पर समय पर वाहन न पहुंचने के कारण भारी नुकसान हुआ था। रजौन में अग्निशमन वाहन न होने के कारण सब कुछ जलकर राख हो गया था। ऐसी ही स्थिति अन्य कई प्रखंडों में भी है। वाहनों की क्षमता मात्र 300 लीटर पूरे जिले में कुल मिलाकर केवल पांच छोटी और एक बड़ी अग्निशमन गाड़ी उपलब्ध है। धोरैया और कटोरिया में तैनात वाहनों की क्षमता मात्र 300 लीटर है, जबकि अन्य स्थानों पर 400 लीटर क्षमता वाले वाहन हैं। चिंताजनक बात यह है कि विभाग की एकमात्र बड़ी अग्निशमन गाड़ी की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद, आग बुझाने के लिए इसी जर्जर वाहन का उपयोग किया जा रहा है। यह गाड़ी 15 वर्ष पुरानी है और इसकी एमवीआई जांच भी हो चुकी है। विभाग ने नई गाड़ी की मांग की है, और विभागीय आदेश मिलते ही इसे बंद किया जा सकता है, जिससे जिले में अग्निशमन सेवाओं की स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी। फरवरी से मई के बीच आग लगने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं ग्रामीण इलाकों में तो किसी तरह ग्रामीणों और कर्मियों की मदद से आग पर काबू पा लिया जाता है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों, होटलों और मॉल में आग लगने की स्थिति में विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसी परिस्थितियों में दूसरे जिलों से मदद मंगानी पड़ती है, जिससे राहत कार्यों में अनावश्यक देरी की आशंका बनी रहती है। मौजूदा गंभीर हालात को देखते हुए, जिले में अग्निशमन संसाधनों की तत्काल बढ़ोतरी की आवश्यकता है, ताकि संभावित बड़ी दुर्घटनाओं से समय रहते प्रभावी ढंग से निपटा जा सके और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके। बांका जिले का अग्निशमन विभाग गंभीर रूप से संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। लगभग 25 लाख की आबादी वाले इस जिले में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त वाहन और उपकरण उपलब्ध नहीं हैं।जिले के कुल 11 प्रखंडों में से छह प्रखंड -रजौन,शंभूगंज,बौसी,चांदन,बेलहर और फुल्लीडुमर में एक भी छोटी या बड़ी अग्निशमन गाड़ी मौजूद नहीं है। इन प्रखंडों को आपात स्थिति में पड़ोसी प्रखंडों के अग्निशमन वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है।हाल ही में रजौन प्रखंड क्षेत्र में भीषण आग लगने पर समय पर वाहन न पहुंचने के कारण भारी नुकसान हुआ था। रजौन में अग्निशमन वाहन न होने के कारण सब कुछ जलकर राख हो गया था। ऐसी ही स्थिति अन्य कई प्रखंडों में भी है। वाहनों की क्षमता मात्र 300 लीटर पूरे जिले में कुल मिलाकर केवल पांच छोटी और एक बड़ी अग्निशमन गाड़ी उपलब्ध है। धोरैया और कटोरिया में तैनात वाहनों की क्षमता मात्र 300 लीटर है, जबकि अन्य स्थानों पर 400 लीटर क्षमता वाले वाहन हैं। चिंताजनक बात यह है कि विभाग की एकमात्र बड़ी अग्निशमन गाड़ी की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद, आग बुझाने के लिए इसी जर्जर वाहन का उपयोग किया जा रहा है। यह गाड़ी 15 वर्ष पुरानी है और इसकी एमवीआई जांच भी हो चुकी है। विभाग ने नई गाड़ी की मांग की है, और विभागीय आदेश मिलते ही इसे बंद किया जा सकता है, जिससे जिले में अग्निशमन सेवाओं की स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी। फरवरी से मई के बीच आग लगने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं ग्रामीण इलाकों में तो किसी तरह ग्रामीणों और कर्मियों की मदद से आग पर काबू पा लिया जाता है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों, होटलों और मॉल में आग लगने की स्थिति में विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसी परिस्थितियों में दूसरे जिलों से मदद मंगानी पड़ती है, जिससे राहत कार्यों में अनावश्यक देरी की आशंका बनी रहती है। मौजूदा गंभीर हालात को देखते हुए, जिले में अग्निशमन संसाधनों की तत्काल बढ़ोतरी की आवश्यकता है, ताकि संभावित बड़ी दुर्घटनाओं से समय रहते प्रभावी ढंग से निपटा जा सके और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।


