Gautam Rode Hanuman bhakt story: चकाचौंध से भरी ग्लैमर इंडस्ट्री में अक्सर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जहां कलाकार कभी अर्श पर होते हैं तो कभी फर्श पर। ऐसे अनिश्चित दौर में कई सितारे डिप्रेशन में चले जाते हैं, तो कुछ ईश्वर की भक्ति में सुकून ढूंढते हैं। बॉलीवुड और टीवी जगत के जाने-माने अभिनेता गौतम रोडे भी एक ऐसे ही कलाकार हैं, जो खुद को हनुमान जी का परम भक्त मानते हैं। ‘बा बहू और बेबी’, ‘लकी’, ‘सरस्वतीचंद्र’ और ‘काल भैरव’ जैसे सुपरहिट सीरियल्स से घर-घर में मशहूर हुए गौतम रोडे ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे काले और मुश्किल दौर के बारे में फैंस को एक किस्सा बताया है, जिसे सुनकर किसी को भी चमत्कार पर यकीन हो सकता है…
गौतम रोडे ने बताया कैसे हुआ चमत्कार (Gautam Rode Hanuman bhakt story)
एक इंटरव्यू में गौतम रोडे ने अपनी जिंदगी के संघर्षों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनके करियर में एक समय ऐसा आया था जब वह पूरी तरह बेरोजगार हो गए थे। गौतम ने कहा, “एक दौर ऐसा था जब मुझे करीब 2 साल तक इंडस्ट्री में कोई बड़ा काम नहीं मिला था। मुझे लगने लगा था कि मैं बुरी तरह फंस चुका हूं। घर का खर्च चलाने के लिए मैं छोटे-मोटे काम तो कर रहा था, लेकिन कोई भी प्रोजेक्ट टिक नहीं रहा था। उस समय मेरे सिर पर घर की भारी-भरकम किस्तें और कई लोन चल रहे थे। घर के रोजाना के खर्चे अलग थे, लेकिन इन सब मुश्किलों के बावजूद मैंने कभी हिम्मत और उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और लगातार ऑडिशन देता रहा।”
40 दिनों का किया ‘चलिया’ अनुष्ठान (Gautam Rode financial crisis India’s Got Talent)
गौतम ने आगे बताया कि जब सारे रास्ते बंद नजर आने लगे, तब उन्होंने संकटमोचन हनुमान जी की शरण ली। उन्होंने हनुमान चालीसा का 40 दिनों का कठिन अनुष्ठान, जिसे ‘चलिया’ कहा जाता है, रखने का संकल्प लिया। गौतम ने बेहद भावुक होते हुए कहा, “आप शायद यकीन नहीं करेंगे, लेकिन जैसे ही मेरा 40 दिनों का चलिया पूरा हुआ, ठीक उसके अगले दिन यानी 41वें दिन मुझे मशहूर रियलिटी शो ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ (IGT) को होस्ट करने का बड़ा ऑफर मिल गया। इस घटना ने भगवान पर मेरा भरोसा हमेशा के लिए मजबूत कर दिया। मैं आज भी रोजाना करीब आधा घंटा नियम से पूजा-पाठ करता हूं और मेरे घर के मंदिर में सभी देवी-देवता विराजमान हैं।”

एक्सीडेंट के बाद अस्पताल से सीधे पहुंचे ‘काला हनुमान मंदिर’
अपनी आस्था की एक और हैरान करने वाली कहानी बताते हुए गौतम ने कहा, “मेरे घर के पास एक बहुत ही प्राचीन और सिद्ध ‘काला हनुमान मंदिर’ है, जहां लोगों की अटूट आस्था है। कुछ समय पहले जब मेरा एक भयानक एक्सीडेंट हुआ था, तो मैं 11 दिनों तक अस्पताल में भर्ती था। वहां से डिस्चार्ज होते ही मैं घर जाने के बजाय सीधे सीधे उस हनुमान मंदिर पहुंचा। वहां के मुख्य पुजारी ने मेरी नजर उतारी और मेरे हाथ पर एक काला धागा बांधा। वह चमत्कारी धागा मैं आज भी अपने हाथ में पहनता हूं।” गौतम ने आखिर में हंसते हुए कहा कि वह खुद को आध्यात्मिक मानते हैं या नहीं, यह तो उन्हें नहीं पता, लेकिन वह दिल से बेहद धार्मिक जरूर हैं और हनुमान जी की कृपा हमेशा उनके साथ रहती है।


