समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि शुरुआती जांच में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटनाएं बढ़कर 105 हो गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक न्यूज़ रिपोर्ट की हेडलाइन का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इस गड़बड़ी में बीजेपी के शामिल होने का आरोप लगाया। यादव ने ‘X’ पर कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की शुरुआती सतही जांच में भी यह आंकड़ा 70 से बढ़कर 105 हो गया है। उन्होंने इस घटना को “बेहद निंदनीय” बताया और कहा कि चोरी की घटनाएं CCTV कैमरों में कैद हुई हैं।
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SP प्रमुख का यह आरोप उस घटना के एक दिन बाद आया है जब चंदे में कथित हेराफेरी की जांच कर रही कोर्ट की बनाई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह 25 सितंबर या उससे पहले अपनी पहली चार्जशीट दाखिल करेगी। यादव ने हिंदी में किए गए अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि यह चोरी सरकारी देखरेख में धार्मिक फंड की हेराफेरी के बराबर है और दावा किया कि अयोध्या में हर जगह BJP नेताओं और उनके साथियों की इसमें मिलीभगत की चर्चा हो रही है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि धार्मिक कार्यों के लिए चंदा देने वाले भक्तों के साथ धोखा हुआ है और कहा कि इस मुद्दे ने सनातन धर्म को मानने वालों को गहरी चोट पहुंचाई है। यादव ने BJP पर जनता का भरोसा खोने का भी आरोप लगाया और कहा कि इस कथित घटना से उत्तर प्रदेश, देश और विदेश में पार्टी की बदनामी हुई है। SP प्रमुख ने BJP के खिलाफ राजनीतिक आह्वान करते हुए कहा कि अगला चुनाव “धर्म को बचाने की लड़ाई” से कम नहीं होगा और यह नारा दिया कि अब BJP के खिलाफ धर्म युद्ध होगा। 403 सदस्यों वाली UP विधानसभा के चुनाव 2027 में होने हैं।
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जून के पहले हफ़्ते में राम मंदिर के लिए मिले दान में हेराफेरी का मामला सामने आया। इसके बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई और उसे शुरुआती तौर पर जांच के लिए 15 दिन का समय दिया। 23 जून को SIT की शुरुआती रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, 25 जून को FIR दर्ज की गई और आठ आरोपियों – अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव – को गिरफ़्तार किया गया।

