Asian Para Games में भारत का दबदबा, भालाफेंक में Pradeep Kumar को मिला सिल्वर

Asian Para Games में भारत का दबदबा, भालाफेंक में Pradeep Kumar को मिला सिल्वर

भारत के प्रदीप कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में पुरूषों की भालाफेंक स्पर्धा में एफ53/54 श्रेणी में लगातार दूसरा रजत पदक जीता जबकि आयुष वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। प्रदीप ने एफ54 में 27 . 45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। आयुष ने एफ53 वर्ग में कांस्य पदक जीता।थाईलैंड के सहर दाम याएना ने एफ54 वर्ग में 23 . 13 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता। शारीरिक अक्षमता का स्तर अधिक होने से उन्हें अधिक रजा अंक मिले। रजा अंक एक ऐसी पद्धति है जिसके जरिये जब किसी प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गीकरणों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है तो विकलांगता के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन को अंकों में बदला जाता है।ईरान के इरफान बंदोरी को 30 . 24 मीटर के रिकॉर्ड के साथ फिर स्वर्ण पदक मिला। एफ 53 एथलीटों की बाजुओं और हाथों में आमतौर पर पूरी कार्यक्षमता होती है लेकिन उनके पेट की मांसपेशियों और रीढ़ के निचले हिस्से की मांसपेशियों में कोई गतिविधि नहीं होती जिसके कारण वे बिना सहारे के बैठ नहीं पाते। एफ 54 एथलीटों की बाजुओं की मांसपेशियां पूरी तरह से ताकतवर होती हैं और धड़ की मांसपेशियों में भी आंशिक से लेकर पूरी ताकत होती है हालांकि धड़ के बीच के हिस्से और पैरों की मूवमेंट काफी हद तक प्रभावित रहती है। 

भारत के प्रदीप कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में पुरूषों की भालाफेंक स्पर्धा में एफ53/54 श्रेणी में लगातार दूसरा रजत पदक जीता जबकि आयुष वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। प्रदीप ने एफ54 में 27 . 45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। आयुष ने एफ53 वर्ग में कांस्य पदक जीता।

थाईलैंड के सहर दाम याएना ने एफ54 वर्ग में 23 . 13 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता। शारीरिक अक्षमता का स्तर अधिक होने से उन्हें अधिक रजा अंक मिले। रजा अंक एक ऐसी पद्धति है जिसके जरिये जब किसी प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गीकरणों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है तो विकलांगता के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन को अंकों में बदला जाता है।

ईरान के इरफान बंदोरी को 30 . 24 मीटर के रिकॉर्ड के साथ फिर स्वर्ण पदक मिला। एफ 53 एथलीटों की बाजुओं और हाथों में आमतौर पर पूरी कार्यक्षमता होती है लेकिन उनके पेट की मांसपेशियों और रीढ़ के निचले हिस्से की मांसपेशियों में कोई गतिविधि नहीं होती जिसके कारण वे बिना सहारे के बैठ नहीं पाते। एफ 54 एथलीटों की बाजुओं की मांसपेशियां पूरी तरह से ताकतवर होती हैं और धड़ की मांसपेशियों में भी आंशिक से लेकर पूरी ताकत होती है हालांकि धड़ के बीच के हिस्से और पैरों की मूवमेंट काफी हद तक प्रभावित रहती है।

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