पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी फिर शुरू करने के लिए वित्त विभाग द्वारा जारी निविदा तत्काल वापस लेने की मांग की। हमीरपुर से लोकसभा सदस्य ठाकुर ने सुक्खू को पत्र लिखकर हिमाचल प्रदेश की जनता के हित में इस प्रस्ताव को पूरी तरह वापस लेने का आग्रह किया। हिमाचल प्रदेश सरकार ने 19 अगस्त को लॉटरी टिकटों की बिक्री के लिए एकमात्र एजेंट नियुक्त करने के लिए ई-निविदा जारी की थी।
राज्य में करीब 25 साल बाद लॉटरी फिर शुरू की जा रही है। एक बयान के मुताबिक, 51 पृष्ठों वाली ई-निविदा में इच्छुक पक्षों से रुचि पत्र आमंत्रित किए गए हैं। बयान में बताया गया कि निविदा शुल्क के रूप में पांच लाख रुपये की गैर-वापसी योग्य राशि जमा करना अनिवार्य किया गया है।
ठाकुर ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने 1999 में कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, मजदूरों और युवाओं पर लॉटरी के विनाशकारी प्रभाव को देखते हुए इस पर रोक लगाई थी। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 2007 में फिर से लॉटरी पर प्रतिबंध लगा दिया था। ठाकुर ने कहा, “धूमल, सिंह और जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली लगातार सरकारों ने वित्तीय दबाव के बावजूद इस प्रतिबंध को कायम रखा।
यह राज्य के लोगों के अनुभवों पर आधारित आम सहमति थी।”
उन्होंने लॉटरी फिर शुरू किए जाने के सामाजिक दुष्परिणामों को लेकर चेताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले ही ऐसे परिवारों का अनुभव कर चुका है, जिन्होंने लॉटरी और जुए में अपनी तनख्वाह, बचत व पेंशन गंवा दीं, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस गए।

