अयोध्या के अमानीगंज विकास खंड में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में वास्तविक मजदूर कम लगाए जा रहे हैं, जबकि पोर्टल पर ज्यादा मजदूरों की हाजिरी दिखाकर भुगतान निकाला जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों के बाद योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहला मामला खंडासा गांव का है। यहां चकमार्ग पटाई कार्य में फर्जी हाजिरी लगाने का आरोप लगा है। वायरल वीडियो में मौके पर करीब 10 मजदूर काम करते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इनमें एक नाबालिग बालक भी शामिल था। जबकि मनरेगा पोर्टल पर उसी दिन 21 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज बताई गई है। ‘जियो टैगिंग कहीं और, काम कहीं और’ ग्रामीणों का आरोप है कि जियो-टैगिंग की तस्वीरें किसी दूसरी जगह की लगाई जाती हैं, जबकि असली काम कहीं और कराया जाता है। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई मजदूरों की हाजिरी लगाने के बाद उन्हें ग्राम प्रधान के निजी खेतों में काम करने भेज दिया जाता है। तालाब खुदाई में 12 मजदूर, रजिस्टर में 93 नाम दूसरा मामला पूरा उर्फ सुमेरपुर गांव का है। यहां तालाब खुदाई कार्य में भारी अनियमितता सामने आई है। शनिवार को कार्यस्थल पर केवल 12 मजदूर काम करते मिले, जबकि मनरेगा हाजिरी रजिस्टर में 93 मजदूरों के नाम दर्ज पाए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि हाजिरी में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल किए जा रहे हैं, जो लंबे समय से गांव छोड़कर बाहर रह रहे हैं। ग्रामीणों ने जांच की मांग की मनरेगा योजना ग्रामीणों को रोजगार देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है, लेकिन अमानीगंज ब्लॉक में सामने आए इन मामलों ने योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। डीसी मनरेगा बोले- जांच कर होगी कार्रवाई इस मामले में डीसी मनरेगा उपेंद्र पाठक ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। अगर जांच में अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


