UN General Assembly: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में विवाद और गहरा गया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से इस घटना को कड़े शब्दों में खारिज किया। उनका कहना था कि किसी संप्रभु देश के नेतृत्व को निशाना बनाना केवल एक देश का मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। इसी के साथ उन्होंने पश्चिमी देशों की नीतियों और ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों को भी कठघरे में खड़ा किया।
Ali Khamenei Assassination: खामेनेई की हत्या पर रूस का तीखा विरोध
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस में बोलते हुए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और उनके परिवार के सदस्यों तथा ईरानी सैन्य एवं राजनीतिक अधिकारियों की मौत पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे दबाव और ताकत के जरिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की ऐसी मिसाल बताया, जिसे रूस स्वीकार नहीं करता। Press TV की 26 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, लावरोव ने इस कार्रवाई को “अस्वीकार्य” बताया।
लावरोव ने कहा कि ईरान पर व्यापक अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा। उनके मुताबिक, ईरान की उन परमाणु सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया जो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की निगरानी व्यवस्था के तहत थीं।
परमाणु निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
रूसी विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों से वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि इस मुद्दे का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि IAEA ने सितंबर 2026 में खुद कहा था कि ईरान के कई परमाणु ठिकानों तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिलने के कारण वह वहां मौजूद परमाणु सामग्री की स्थिति को पूरी तरह सत्यापित नहीं कर पा रहा है। एजेंसी ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया और ईरान से सहयोग बढ़ाने की अपील की थी।
इस तरह परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवाद दो स्तरों पर चल रहा है एक ओर ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता और निरीक्षण का सवाल है, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई से परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और वैश्विक अप्रसार व्यवस्था पर पड़ने वाला असर।
पश्चिमी दबदबे के खिलाफ रूस का संदेश
लावरोव ने अपने भाषण में पश्चिमी देशों पर “बल प्रयोग” और दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने रूस के यूक्रेन अभियान को लेकर मॉस्को का पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि रूस अपने घोषित लक्ष्यों से पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने दुनिया में एक बहुध्रुवीय व्यवस्था उभरने की बात भी कही, जिसमें एशिया, अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के देश अपने-अपने हितों के आधार पर अधिक स्वतंत्र भूमिका निभा रहे हैं।
वेनेजुएला और वैश्विक व्यवस्था का मुद्दा
लावरोव ने वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की अमेरिकी हिरासत का मुद्दा भी उठाया और उनकी जल्द रिहाई की मांग की। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर 23 सितंबर को UN General Assembly के अध्यक्ष और लावरोव के बीच हुई बैठक में भी वैश्विक घटनाक्रम तथा सुरक्षा परिषद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
कुल मिलाकर, लावरोव का महासभा भाषण केवल ईरान पर केंद्रित नहीं रहा। इसमें रूस ने संप्रभुता, परमाणु सुरक्षा, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और पश्चिमी सैन्य हस्तक्षेप जैसे मुद्दों को एक ही कूटनीतिक फ्रेम में रखा। ईरान संकट के बीच मॉस्को का यह रुख आने वाले दिनों में रूस, अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक टकराव को और स्पष्ट कर सकता है।


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