लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करते हुए केंद्र सरकार से अपील की है। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान का पूरा समर्थन किया है।
मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि देशभर में गौ-हत्या पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। गाय की खरीद-फरोख्त, परिवहन या हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मुसलमान की ओर से यह मांग की जा रही है, लेकिन सनातनी समाज इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।
भाईचारे और सौहार्द के लिए जरूरी
मौलाना नकवी ने स्पष्ट किया कि गौ-हत्या पर पूर्ण रोक लगाना आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गाय को मां का दर्जा देने वाली हिंदू भावना का सम्मान करते हुए कहा कि इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए, ताकि गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं पूरी तरह बंद हो सकें।
इससे पहले मौलाना अरशद मदनी ने भी केंद्र सरकार से सवाल किया था कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को पवित्र और माता के रूप में मानती है, तो फिर उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने में क्या राजनीतिक अड़चन है? मदनी का बयान भी मुख्य रूप से मॉब लिंचिंग रोकने और सामाजिक तनाव कम करने पर केंद्रित था।
मुस्लिम धर्म गुरुओं की ओर से की गई मांग
यह मांग इसलिए खास महत्व रखती है क्योंकि यह मुस्लिम धर्मगुरुओं की ओर से आ रही है। कई विश्लेषक इसे सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
मौलाना सैफ अब्बास नकवी शिया समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु हैं और लखनऊ के शिया मार्कजी चांद कमेटी के अध्यक्ष हैं। उनकी यह अपील मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग की भावना को प्रतिबिंबित करती है, जो गौ-हत्या जैसे संवेदनशील मुद्दों पर समझौता चाहता है।
फिर से राजनीतिक दलों ने उठाना शुरू की आवाज
हालांकि, इस मांग पर अभी तक केंद्र सरकार की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग लंबे समय से विभिन्न हिंदू संगठन और कुछ राजनीतिक दल उठाते रहे हैं, लेकिन अब मुस्लिम नेताओं के समर्थन ने इस बहस को नया आयाम दे दिया है।
मौलाना नकवी ने सभी समुदायों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाएं और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि गाय की सुरक्षा न केवल धार्मिक भावना का सम्मान है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत और एकता को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकती है।


