मुंगेर में फरक्का जलसंधि के नवीकरण को लेकर जदयू ने बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की मांग उठाई है। पार्टी के जागरूकता अभियान के तहत सोमवार को नगर भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा शामिल हुए। दोनों नेताओं ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में संधि के नवीकरण से पहले बिहार की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन करने की मांग की गई। आबादी की जरूरतों के हिसाब से तय हो पानी का हिस्सा पत्रकारों से बातचीत में संजय झा ने कहा कि 12 दिसंबर 1996 को बांग्लादेश के साथ हुई फरक्का जलसंधि से बिहार को काफी नुकसान हुआ है। अब 12 दिसंबर को संधि की अवधि समाप्त हो रही है। ऐसे में नवीकरण से पहले खेती, उद्योग और बढ़ती आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बिहार के हिस्से के पानी का आकलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के हितों से समझौता कर कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। जदयू ने यह मांग केंद्र सरकार के सामने रखी है और वहां से सकारात्मक आश्वासन मिला है। संजय झा ने इसे मुद्दा उठाने का सही समय बताया। संजय झा ने राजद से पूछा- 1996 में संधि का विरोध क्यों नहीं किया? संजय झा ने राजद पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वर्ष 1996 में जब यह संधि हुई थी, तब पार्टी ने इसका विरोध क्यों नहीं किया और ऐसी संधि होने क्यों दी? उन्होंने कहा कि जदयू केंद्र सरकार में सहयोगी जरूर है, लेकिन उसकी अपनी अलग पहचान और स्पष्ट राजनीतिक सोच है। बिहार के हितों को लेकर पार्टी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। गंगा में गाद जमा होने और बाढ़ को बताया संधि का दुष्परिणाम प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पना को आज राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाया जा रहा है। इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए उन्होंने संजय झा का आभार जताया। उन्होंने बताया कि अभियान की शुरुआत सितंबर में हुई थी। पहले और दूसरे चरण में चार-चार जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। अंतिम चरण की शुरुआत लखीसराय से हुई है और मुंगेर इसका दसवां पड़ाव है। इस चरण में 12 जिलों में कार्यक्रम होंगे और इसका समापन कटिहार में किया जाएगा। फरक्का जलसंधि देश और बिहार, दोनों के हित में नहीं कुशवाहा ने कहा कि गंगा बक्सर से बिहार में प्रवेश कर 12 जिलों से होकर गुजरती है। इन जिलों के लोग हर साल बाढ़ की समस्या झेलते हैं। उनके मुताबिक, फरक्का जलसंधि के कारण गंगा में गाद जमा हो रही है, जिससे नदी की जलधारण क्षमता घट रही है और बाढ़ की समस्या गंभीर हो रही है। उन्होंने कहा कि जब बिहार को सिंचाई और रोजगार के लिए पानी की जरूरत होती है, तब गंगा का पानी बांग्लादेश चला जाता है। उन्होंने दावा किया कि बिहार के करीब 73 प्रतिशत हिस्से को सूखे की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुशवाहा ने इसे राज्य के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि फरक्का जलसंधि देश और बिहार, दोनों के हित में नहीं है। इस मुद्दे पर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श की जरूरत है। मुंगेर में फरक्का जलसंधि के नवीकरण को लेकर जदयू ने बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की मांग उठाई है। पार्टी के जागरूकता अभियान के तहत सोमवार को नगर भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा शामिल हुए। दोनों नेताओं ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में संधि के नवीकरण से पहले बिहार की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन करने की मांग की गई। आबादी की जरूरतों के हिसाब से तय हो पानी का हिस्सा पत्रकारों से बातचीत में संजय झा ने कहा कि 12 दिसंबर 1996 को बांग्लादेश के साथ हुई फरक्का जलसंधि से बिहार को काफी नुकसान हुआ है। अब 12 दिसंबर को संधि की अवधि समाप्त हो रही है। ऐसे में नवीकरण से पहले खेती, उद्योग और बढ़ती आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बिहार के हिस्से के पानी का आकलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के हितों से समझौता कर कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। जदयू ने यह मांग केंद्र सरकार के सामने रखी है और वहां से सकारात्मक आश्वासन मिला है। संजय झा ने इसे मुद्दा उठाने का सही समय बताया। संजय झा ने राजद से पूछा- 1996 में संधि का विरोध क्यों नहीं किया? संजय झा ने राजद पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वर्ष 1996 में जब यह संधि हुई थी, तब पार्टी ने इसका विरोध क्यों नहीं किया और ऐसी संधि होने क्यों दी? उन्होंने कहा कि जदयू केंद्र सरकार में सहयोगी जरूर है, लेकिन उसकी अपनी अलग पहचान और स्पष्ट राजनीतिक सोच है। बिहार के हितों को लेकर पार्टी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। गंगा में गाद जमा होने और बाढ़ को बताया संधि का दुष्परिणाम प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पना को आज राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाया जा रहा है। इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए उन्होंने संजय झा का आभार जताया। उन्होंने बताया कि अभियान की शुरुआत सितंबर में हुई थी। पहले और दूसरे चरण में चार-चार जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। अंतिम चरण की शुरुआत लखीसराय से हुई है और मुंगेर इसका दसवां पड़ाव है। इस चरण में 12 जिलों में कार्यक्रम होंगे और इसका समापन कटिहार में किया जाएगा। फरक्का जलसंधि देश और बिहार, दोनों के हित में नहीं कुशवाहा ने कहा कि गंगा बक्सर से बिहार में प्रवेश कर 12 जिलों से होकर गुजरती है। इन जिलों के लोग हर साल बाढ़ की समस्या झेलते हैं। उनके मुताबिक, फरक्का जलसंधि के कारण गंगा में गाद जमा हो रही है, जिससे नदी की जलधारण क्षमता घट रही है और बाढ़ की समस्या गंभीर हो रही है। उन्होंने कहा कि जब बिहार को सिंचाई और रोजगार के लिए पानी की जरूरत होती है, तब गंगा का पानी बांग्लादेश चला जाता है। उन्होंने दावा किया कि बिहार के करीब 73 प्रतिशत हिस्से को सूखे की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुशवाहा ने इसे राज्य के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि फरक्का जलसंधि देश और बिहार, दोनों के हित में नहीं है। इस मुद्दे पर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श की जरूरत है।

