Amit Sadh Interview: बॉलीवुड एक्टर अमित साध जल्द ही फिल्म ‘प्रताप’ में नजर आने वाले हैं। फिल्म में वह एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है, जो उसे जेल तक पहुंचा देता है। ट्रेलर में उनके किरदार का एक्शन के साथ भावनात्मक पक्ष भी देखने को मिल रहा है। फिल्म में अमित साध पहली बार एशा देओल के साथ स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। इंटरव्यू के दौरान अमित ने अपनी फिल्म, किरदार, तिग्मांशु धूलिया, सिनेमा और ओटीटी समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की।
सवाल: ‘प्रताप’ में आपका किरदार कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
अमित साध: यह कहानी कर्मा नाम के एक ऐसे आदमी की है, जो अपने काम में सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन कुछ परिस्थितियों के चलते जेल पहुंच जाता है। मेरे लिए सबसे भावुक पल वह था, जब उसका 10 साल का बेटा उसे ‘क्रिमिनल’ कहता है। जिस आदमी को खुद लगता है कि उसने अपराधियों के खिलाफ लड़कर अपना योगदान दिया है और जिसे प्रेसिडेंट अवॉर्ड मिल चुका है, जब उसका बेटा ही उसे अपराधी कहे तो यह उसे अंदर से तोड़ देता है। मेरे लिए यह किरदार का सबसे बड़ा भावनात्मक बिंदु था।
सवाल: फिल्म की स्क्रिप्ट में ऐसी क्या बात थी, जिसने आपको हां कहने के लिए प्रेरित किया?
अमित साध: मुझे इंसान के अंतर्द्वंद्व की कहानियां पसंद हैं। जिंदगी में सही और गलत के बीच एक ग्रे एरिया होता है। इस कहानी में मुझे वही देखने को मिला। हमने अक्सर वर्दी और पावरफुल लोगों का बाहरी पक्ष देखा है, लेकिन उनके भीतर क्या चलता है, उनके फैसलों का उन पर क्या असर होता है, यह दिखाना मुझे नया लगा।
सवाल: क्या किरदार की तैयारी के लिए पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की?
अमित साध: बेसिक तैयारी और प्री-वर्क जरूर किया। मैं खुशकिस्मत हूं कि ऐसे लोग मेरे आसपास हैं। हालांकि इस फिल्म की कहानी किसी एक वास्तविक व्यक्ति पर आधारित नहीं है। इसका श्रेय मैं निर्देशक सचिन जी को देना चाहूंगा, जो पूरी रिसर्च और तैयारी के साथ आए थे।
सवाल: एशा देओल के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा?
अमित साध: सेट पर आजकल बहुत ज्यादा समय नहीं मिलता। लंच ब्रेक भी आधे घंटे का होता है। लेकिन एशा जी के बारे में मैं जरूर कहूंगा कि उन्होंने अपने किरदार को बहुत प्यारा बनाया है। वह काफी अनुशासित, मेहनती और फोकस्ड हैं। फिल्म में उनका किरदार भी बहुत अच्छे से सामने आया है।
सवाल: फिल्म में एक्शन ज्यादा है या इमोशन?
अमित साध: एक्शन हमारे लिए आसान है क्योंकि हम उसे लगातार देखते आए हैं। मुझे फिल्म का इमोशनल आर्क ज्यादा दिलचस्प लगा। जेल जाने के बाद कर्मा अपने जीवन और अपने फैसलों को किस तरह समझता है, यही फिल्म की यूएसपी है।
सवाल: आपके करियर में कौन सा पल सबसे ज्यादा लाइफ चेंजिंग रहा?
अमित साध: मेरे लिए काम ही हमेशा लाइफ चेंजिंग रहा है। ‘काय पो छे!’ मिली तो वह मेरे लिए बड़ा बदलाव था। सिनेमा मेरे लिए बहुत बड़ा शिक्षक रहा है। इसने मुझे सीखने, बदलने और खुद को बेहतर करने का मौका दिया। मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि आज भी एक अभिनेता के तौर पर काम कर रहा हूं।
सवाल: क्या आज फिल्मों की सफलता सिर्फ बॉक्स ऑफिस से तय होती है?
अमित साध: कहानी सबसे महत्वपूर्ण है। बजट से ज्यादा जरूरी है कि कहानी लोगों को कुछ दे। वह भावनाएं दे, आस्था दे, मनोरंजन दे या कोई समझ दे। अच्छी फिल्म की कोई तय रेसिपी नहीं होती। यही इस इंडस्ट्री को चुनौतीपूर्ण और नाजुक बनाता है।
सवाल: तिग्मांशु धूलिया के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
अमित साध: तिग्मांशु सर मेरे गुरु हैं और मेरे लिए फादर फिगर जैसे हैं। मैं उन्हें कुछ नहीं सिखा सकता। हम तीन फिल्में साथ कर चुके हैं। वो मुझे भोपाल जेल’वाली फिल्म में भी लेकर आए थे। मैंने उनसे एक्टिंग सीखी है। साहित्य, भावनाओं और शॉट लेने पर उनकी पकड़ बहुत शानदार है। मेरी दिल से इच्छा है कि उनके साथ एक पूरी फिल्म में अभिनेता के तौर पर काम करूं।
सवाल: किन निर्देशकों के साथ काम करने की इच्छा है?
अमित साध: अब मेरे करियर में सबसे जरूरी है कि मुझे अच्छा रोल मिले। देश और दुनिया में बहुत शानदार फिल्ममेकर हैं। राजामौली सर के साथ काम करने की भी बहुत इच्छा है और उम्मीद है कि कभी मौका मिलेगा।
सवाल: क्या ओटीटी के कारण दर्शक थिएटर से दूर हो रहे हैं?
अमित साध: मैं इससे पूरी तरह सहमत नहीं हूं। दर्शकों के पास अब विकल्प हैं। लोग थिएटर भी जा रहे हैं और ओटीटी भी देख रहे हैं। कौन सी फिल्म कहां देखनी है, यह अब दर्शक खुद तय करते हैं।
सवाल: अगर आपकी जिंदगी पर फिल्म बने तो क्या खुद आपका किरदार निभाएंगे?
अमित साध: यह इस बात पर निर्भर करेगा कि फिल्म कब बनती है। अभी बनेगी तो मैं खुद कर लूंगा, लेकिन 90 साल की उम्र में बनेगी तो शायद नहीं कर पाऊंगा। फिलहाल तो मैं अपनी फिल्म खुद बना रहा हूं।

