जरूरतमंद परिवारों को बांटे कपड़े-बर्तन:महिलाओं को दिया सिलाई प्रशिक्षण, सेवा से आत्मनिर्भरता की ओर सहयोग बैंक की पहल

जरूरतमंद परिवारों को बांटे कपड़े-बर्तन:महिलाओं को दिया सिलाई प्रशिक्षण, सेवा से आत्मनिर्भरता की ओर सहयोग बैंक की पहल

झालावाड़ में जरूरतमंद परिवारों की मदद के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल के तहत भारत विकास परिषद की शाखा की ओर से संचालित सहयोग बैंक ने रविवार को रलायती कंजर बस्ती में सेवा कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें जरूरतमंद परिवारों को कपड़े, बर्तन, खिलौने और अन्य उपयोगी सामग्री वितरित की गई। साथ ही महिलाओं और एक बालिका को सिलाई का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में कपड़े के थैलों का उपयोग बढ़ाने और प्लास्टिक की थैलियों से दूरी बनाने का संदेश भी दिया गया। सिलाई सीखकर कमाई की राह पर बालिका प्रशिक्षण के दौरान बालिका ने कपड़े के दो थैले सिलकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। परिषद की ओर से उसे आगे भी थैले बनाने के लिए कपड़ा, धागा और कैंची उपलब्ध करवाई गई, ताकि वह घर पर थैले तैयार कर उनकी बिक्री से कमाई कर सके। आयोजकों ने बताया कि इस पहल से महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग कम करने में भी मदद मिलेगी। एसपी की प्रेरणा से हुआ सेवा कार्यक्रम कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार की प्रेरणा से आयोजित किया गया। इसमें भारत विकास परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष मनोज शर्मा, जिला समन्वयक उदयभान, कोषाध्यक्ष बृजेश शर्मा, सालिगराम दांगी और डॉ. राजुल गोयल मौजूद रहे। पुलिस विभाग की ओर से एएसआई मदनलाल गुर्जर और हेड कांस्टेबल बाबूलाल ने सहयोग किया। समाजसेवियों के सहयोग से चल रहा सहयोग बैंक इस सेवा कार्य को सफल बनाने में सहयोग बैंक से जुड़े समाजसेवियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सामग्री उपलब्ध करवाने वालों में मोनालिसा, लीना गौतम, डॉ. नमिता यादव, ममता शर्मा, मधुबाला, रानी अग्रवाल, सालिगराम दांगी, डॉ. राजुल गोयल, माया, दीपक गोस्वामी और सुनील भारद्वाज शामिल रहे। अनुपयोगी सामान से किसी के घर में आ सकती है खुशी भारत विकास परिषद ने शहरवासियों से अपील की कि घरों में रखे ऐसे कपड़े, बर्तन, खिलौने, पुस्तकें और अन्य उपयोगी सामान, जिनका अब उनके लिए उपयोग नहीं है, उन्हें फेंकने के बजाय सहयोग बैंक में जमा करवाएं। इन वस्तुओं को जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाकर उनका सदुपयोग किया जा सकता है। परिषद के अनुसार, सेवा का उद्देश्य केवल सामग्री बांटना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को सम्मान, आत्मनिर्भरता और खुशियां देना भी है। समाज के छोटे-छोटे सहयोग से किसी जरूरतमंद परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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