कटिहार में भारतीय सेना के नाम से जारी एक कथित नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। इसमें शहर के लीला चौक से पॉलिटेक्निक कॉलेज तक के आवासीय इलाके को खाली कराने और घरों, दुकानों, इमारतों व सड़कों को तोड़ने का आदेश दिया गया है। हालांकि, जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने इस नोटिस को पूरी तरह फर्जी बताया है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और घर खाली नहीं करने की अपील की है। सेना की रणनीतिक जरूरत बताकर खाली कराने का दावा वायरल नोटिस में दावा किया गया है कि भारतीय सेना की रणनीतिक और सुरक्षा जरूरतों के कारण लीला चौक से पॉलिटेक्निक कॉलेज तक का इलाका खाली कराया जाएगा। इसमें लोगों को तत्काल मकान खाली करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही तय समय सीमा के बाद जबरन बेदखली और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। नोटिस पर कर्नल आरएस ठाकुर का नाम और हस्ताक्षर नोटिस पर संदर्भ संख्या ए/ओपी/2026/1147 और तारीख 29 अक्टूबर 2026 दर्ज है। इसमें सिरसा दलान टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के पास रहने वाले एनके माजी का नाम भी दिया गया है। नीचे कर्नल आरएस ठाकुर, संचालन अधिकारी, भारतीय सेना के हस्ताक्षर बताए गए हैं। डीएम ने स्टेशन कमांडर- कर्नल से की बात डीएम आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि नोटिस वायरल होने के बाद उन्होंने कटिहार के स्टेशन कमांडर और सिलीगुड़ी में तैनात कर्नल से व्यक्तिगत रूप से बात की। दोनों अधिकारियों ने पत्र को फर्जी बताया है। डीएम ने कहा, “एक लेटर वायरल हो रहा है और उसमें इलाका खाली करने का आदेश दिया गया है। वह पूरी तरह फेक है। देखने में ही जाली लग रहा है। उसमें लिखे पदनाम भी गलत हैं। जिन कार्यालयों को उसकी कॉपी भेजने की बात कही गई है, उनमें कुछ कार्यालय अस्तित्व में ही नहीं हैं।” नोटिस में आधिकारिक मुहर और संपर्क विवरण भी नहीं वायरल पत्र के प्रारूप और भाषा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसमें सेना मुख्यालय की आधिकारिक मुहर, ईमेल, वेबसाइट या संपर्क नंबर का उल्लेख नहीं है। इसकी संदर्भ संख्या का प्रारूप भी आधिकारिक सैन्य पत्राचार से मेल नहीं खाता। सेना के नाम पर किसी आवासीय इलाके को खाली कराने और निजी संपत्तियों को तोड़ने जैसी कार्रवाई सामान्यतः निर्धारित सरकारी और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकती है। घनी आबादी वाला सिविल इलाका है पूरा क्षेत्र लीला चौक से पॉलिटेक्निक कॉलेज तक का इलाका घनी आबादी वाला सिविल क्षेत्र है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां कोई फॉरवर्ड ऑपरेशनल एरिया या फायरिंग रेंज नहीं है, जिसके लिए अचानक पूरे इलाके को खाली कराने की जरूरत पड़े। डीएम की अपील- अफवाहों पर ध्यान न दें डीएम ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की ओर से ऐसी कोई सूचना जारी नहीं की गई है। लोगों से अपील की गई है कि वायरल नोटिस के आधार पर कोई कदम न उठाएं और इसकी पुष्टि के लिए जिला पदाधिकारी कार्यालय या अनुमंडल पदाधिकारी से संपर्क करें। फर्जी नोटिस के स्रोत का पता लगाने के लिए पुलिस के साइबर सेल को भी इसकी जानकारी देने की अपील की गई है। कटिहार में भारतीय सेना के नाम से जारी एक कथित नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। इसमें शहर के लीला चौक से पॉलिटेक्निक कॉलेज तक के आवासीय इलाके को खाली कराने और घरों, दुकानों, इमारतों व सड़कों को तोड़ने का आदेश दिया गया है। हालांकि, जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने इस नोटिस को पूरी तरह फर्जी बताया है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और घर खाली नहीं करने की अपील की है। सेना की रणनीतिक जरूरत बताकर खाली कराने का दावा वायरल नोटिस में दावा किया गया है कि भारतीय सेना की रणनीतिक और सुरक्षा जरूरतों के कारण लीला चौक से पॉलिटेक्निक कॉलेज तक का इलाका खाली कराया जाएगा। इसमें लोगों को तत्काल मकान खाली करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही तय समय सीमा के बाद जबरन बेदखली और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। नोटिस पर कर्नल आरएस ठाकुर का नाम और हस्ताक्षर नोटिस पर संदर्भ संख्या ए/ओपी/2026/1147 और तारीख 29 अक्टूबर 2026 दर्ज है। इसमें सिरसा दलान टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के पास रहने वाले एनके माजी का नाम भी दिया गया है। नीचे कर्नल आरएस ठाकुर, संचालन अधिकारी, भारतीय सेना के हस्ताक्षर बताए गए हैं। डीएम ने स्टेशन कमांडर- कर्नल से की बात डीएम आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि नोटिस वायरल होने के बाद उन्होंने कटिहार के स्टेशन कमांडर और सिलीगुड़ी में तैनात कर्नल से व्यक्तिगत रूप से बात की। दोनों अधिकारियों ने पत्र को फर्जी बताया है। डीएम ने कहा, “एक लेटर वायरल हो रहा है और उसमें इलाका खाली करने का आदेश दिया गया है। वह पूरी तरह फेक है। देखने में ही जाली लग रहा है। उसमें लिखे पदनाम भी गलत हैं। जिन कार्यालयों को उसकी कॉपी भेजने की बात कही गई है, उनमें कुछ कार्यालय अस्तित्व में ही नहीं हैं।” नोटिस में आधिकारिक मुहर और संपर्क विवरण भी नहीं वायरल पत्र के प्रारूप और भाषा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसमें सेना मुख्यालय की आधिकारिक मुहर, ईमेल, वेबसाइट या संपर्क नंबर का उल्लेख नहीं है। इसकी संदर्भ संख्या का प्रारूप भी आधिकारिक सैन्य पत्राचार से मेल नहीं खाता। सेना के नाम पर किसी आवासीय इलाके को खाली कराने और निजी संपत्तियों को तोड़ने जैसी कार्रवाई सामान्यतः निर्धारित सरकारी और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकती है। घनी आबादी वाला सिविल इलाका है पूरा क्षेत्र लीला चौक से पॉलिटेक्निक कॉलेज तक का इलाका घनी आबादी वाला सिविल क्षेत्र है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां कोई फॉरवर्ड ऑपरेशनल एरिया या फायरिंग रेंज नहीं है, जिसके लिए अचानक पूरे इलाके को खाली कराने की जरूरत पड़े। डीएम की अपील- अफवाहों पर ध्यान न दें डीएम ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की ओर से ऐसी कोई सूचना जारी नहीं की गई है। लोगों से अपील की गई है कि वायरल नोटिस के आधार पर कोई कदम न उठाएं और इसकी पुष्टि के लिए जिला पदाधिकारी कार्यालय या अनुमंडल पदाधिकारी से संपर्क करें। फर्जी नोटिस के स्रोत का पता लगाने के लिए पुलिस के साइबर सेल को भी इसकी जानकारी देने की अपील की गई है।

