नमस्कार, बीकानेर में अर्जुनरामजी ने गीत गाकर सही जगह निशाना लगा दिया। टोंक में प्रचार करने गांव में घुसे मंत्री-विधायक की कार नाली में फंस गई। भीलवाड़ा में इन्फ्लूएंसर को गांव वालों ने आईना दिखा दिया और ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने जूसवाले से दिलचस्प बातचीत की। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. खड़गेजी को मेघवाल जी का ‘सुरीला जवाब’ राजस्थान गीत-संगीत और संस्कृति की धरती है। यहां हमला भी करना हो तो सुरीला अंदाज अपनाया जा सकता है। अर्जुन राम मेघवाल जी ने बीकानेर में रन फोर यूनिटी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दौड़ लगाई। सरदार पटेल के काम याद किए। इस दौरान भाजपा के एक पुराने कार्यकर्ता मुलतान बैद केंद्रीय राज्यमंत्री से मिलने पहुंचे। बैद जी ने बताया कि उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे साहब के लिए एक गीत जवाब के तौर पर लिखा है। मामला रोचक था। हाल ही कांग्रेस के अध्यक्षजी ने भरी सभा में कह दिया था कि प्रधानमंत्री तो क्या उनके पिताजी को भी जाना पड़ेगा। हालांकि उनकी भाषा तल्ख और पर्यायवाची शब्दों से युक्त थी। इसका भाजपा के कई नेताओं ने विविध प्रकार से विरोध किया। लेकिन जो काम भाजपा कार्यकर्ता मुलतान बैदजी ने किया, वह अलग और उम्दा। बैदजी ने लिखा- जायेंगे वो लोग जिन्होंने अपनी साख खो दी, कहीं नहीं जाएंगे मोदी। गीत अर्जुनराम जी को बहुत पसंद आया। कमरे में ही महफिल जम गई। कविवर मुलतान बैद ने पन्ना देख गीत गाना शुरू किया तो केंद्रीय मंत्री ने भी सुर में खूब सुर मिलाया। आलाप ले-लेकर गीत गाया। ताली बजा-बजाकर तान देने लगे। गीत के महत्वपूर्ण शब्दों पर खटका और मुर्कियां दीं। ‘साख खोने वालों’ को गमक के अंदाज में उठाकर पटका। कुल मिलाकर अंतरे पर ही इतना स्वाद ले लिया कि विरोध की राजनीति रस से सराबोर हो गई। 2. मंत्री-विधायक की कार फंसी पंचायत चुनाव में प्रचार चरम पर था। मंत्री-विधायकों तक की ड्यूटी लगी हुई थी। अपनों की नैया पार कराने के लिए नेताजी दिन-रात एक किए हुए थे। टोंक में जयदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और पीपलू विधायक रामसहाय वर्मा जोड़ी बनाकर घूम रहे थे। अपने आदमी को सरपंच बनाने के लिए वोटों की मांग कर रहे थे। गांव वालों से वादे कर रहे थे। आश्वासन दे रहे थे। दिलासा दे रहे थे। सफाई दे रहे थे। श्रेय ले रहे थे। तमाम वे काम जिनसे जनता प्रभावित होकर उनके आदमी के नाम पर छप्पा लगा दे, सब कर रहे थे। इस कड़ी में दोनों नेता ग्राम पंचायत सन्देडा के हरिपुरा गांव में पहुंच गए। गांव में जोरदार स्वागत हुआ। मालाएं पहनाईं गई। आवभगत की गई। गांव सभा जुटाकर छोटी सी सभा हो गई। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर गाड़ियों का जमावड़ा लग गया। कार निकालने के लिए तंग जगह बची। ड्राइवर उसी में से गाड़ी निकालने की कोशिश करने लगा। मौके पर उत्साही युवकों का हुजूम लगा हुआ है। वहां शर्तें लगने लगीं कि गाड़ी निकल जाएगी, नहीं निकल पाएगी, फंस जाएगी। ड्राइवर आगे बढ़ा और कार के एक तरफ के दोनों टायर नाली में बैठ गए। लड़कों के हुजूम में जोश दौड़ गया। उनके लिए यह दिलचस्प घटना थी जिसमें जलदाय मंत्री की कार जल में फंसी हुई थी। एक लड़का बोला- पड़ी रहने दो इसी में। दूसरे ने कहा- इसी में पड़ी रहने दो। तीसरे ने जेब से मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू किया, वोइसओवर करते हुए बोला- ये हमारे मंत्रीजी की कार है। घटना ने जैसे सारे लड़कों के पेट में गुदगुदी कर दी हो। रह रहकर दबी हंसी हंस रहे थे। गांव में नाली उनके लिए समस्या नहीं। कच्ची सड़कें, गंदगी, कूड़े के ढेर भी समस्या नहीं, तिराहों-चौराहों पर गोबर के ढेर या घरों के सामने ढाब की तरह भरा गंदा पानी कोई समस्या नहीं। समस्या यह थी कि समस्या में समस्या का निदान करने वालों की कार फंसी थी। हालांकि जनसहयोग से कार को सकुशल नाली से निकाल लिया गया लेकिन बिना एक भी शब्द कहे नाली ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश कर दिया। सरपंच साहब गांव में पक्की और कवर्ड नालियां बनवा पाएंगे या नहीं, यह वक्त बताएगा। 3. इन्फ्लूएंसर को दिखाया आईना सोशल मीडिया पर अपनी बॉडी दिखा-दिखाकर इन्फ्लूएंसर बने पवन साहू को गांव की जनता ने आईना दिखा दिया। बता दिया कि डिजिटल दुनिया और धरातल में जमीन आसमान का अंतर होता है। इन्फ्लूएंसर के पास पैसे की कोई कमी नहीं। कारों के काफिले के साथ रील्स बनती हैं। गोल्ड की मोटी चेन गले में पहनता है। इंस्टाग्राम पर 70 लाख से ज्यादा और यूट्यूब चैनल के 2 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर। लेकिन सरपंच के चुनाव में गांव के 277 वोट ही पा सके। इसलिए पंच और सरपंच के चुनाव सबसे कड़े होते हैं। यहां जमीन पर जो पसीना बहाएगा वही हीरो है। रील्स में आप सिर्फ मनोरंजन कर सकते हो। काम करने में नानी याद आ जाती है। एक अच्छी बात यह रही कि चुनाव प्रचार के दौरान इन्फ्लूएंसर को अनुभव का लाभ मिला और अच्छी अच्छी रीलें बनीं। ये रीलें भी खूब चलीं। जनता ने रीलें बहुत पसंद की। यही हाल जोधपुर के ज्योतिषी महाराज का हुआ था। सोशल मीडिया पर फॉलो करने वालों का अंबार लेकिन हाथ में वोट आए 33, जिन्हें तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का आशीर्वाद समझ उन्होंने रख लिया और सरपंच पद के सपनों से तौबा कर ली। पवन साहू ने भी बॉडी अच्छी बनाई है लेकिन लोकल बॉडी के हिसाब से फिट नहीं हैं। कुछ साल मेहनत करें। दिखावी चमक दमक से बाहर निकलकर असल मुद्दों पर सशरीर गांव वालों के अच्छे बुरे में साथ दें तब जनता सारे समीकरणों पर नाप-तौलकर मौका देती है। 4. चलते-चलते.. खाकी के दो रूप हैं। एक वो जो अपने व्यवहार से आमजन का विश्वास जीत लेते हैं। दूसरा वह जो अपराधियों में डर कायम करता है। खाकी के असल रूप तो ये दो ही हैं। बाकी कुछ लोग खाकी को दागदार भी करते हैं। इंसान-इंसान की बात है। भीतर से बुरा आदमी ऊपर से कैसा भी लबादा ओढ़ ले उसे खराब ही करता है। कुछ लोग इंसानियत से भरपूर होते हैं। वे किसी भी रूप में हों, दूसरे का अहित नहीं करते। बुरा नहीं चाहते। लालच नहीं करते। समस्या को हल करने के उनके पास अपने तरीके होते हैं। बात है ट्रैफिक पुलिस इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार की। ये जहां खड़े हो जाते हैं वहां राह पर चलने वाले बचकर नहीं निकलते। पास आते हैं और लोट-पोट होकर जाते हैं। लगे हाथ कानून की परिषाभा भी उसी हंसी-खुशी के माहौल में समझ लेते हैं। प्रवीणा कुमार सोशल मीडिया पर पीके मस्त के नाम से जाने जाते हैं। ट्रैफिक जागरूकता में इनका बहुमूल्य योगदान है। हाल ही पीके साहब का एक वीडियो सामने आया। दूरस्थ क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात 8-10 जवानों के साथ वे सड़क पर चहलकदमी कर रहे हैं। ग्राम्य कस्बे का माहौल है। सिंगल सड़क बल खाते हुए सरकारी भवन के सामने से गुजर रही है। इस दौरान फट-फट करते हुए एक जुगाड़ वहां से गुजरता है। जुगाड़ असल में गन्ने का जूस निकालने की चलती-फिरती दुकान है। जिसे एक नौजवान युवक चला रहा है। जुगाड़ की छत पर एक बच्चा मौज खाते हुए जा रहा है। ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने जूसवाले को रुकने का इशारा किया। युवक का दिल बैठ गया। सामने पुलिसवालों की पूरी टोली। कमाई से पहले जेब ढीली होने के डर से सकुचाते हुए उसने जुगाड़ को रोड किनारे उतारकर इंजन बंद कर दिया। इंस्पेक्टर साहब उसके पास आए और जुगाड़ का मुआयना करने लगे। बोले- ये कौन है भई, क्या नाम है तेरा। युवक बोला- पुष्कर इंस्पेक्टर ने पूछा- पुष्कर? तुम अजमेर के हो या यहां के? पुष्कर तो अजमेर में है। लड़का मुस्कुराया। इंस्पेक्टर ने जुगाड़ के बारे में पूछा- ये क्या मशीन है? क्या करती है? लड़का बोला- गन्ने का जूस निकालती है। इंस्पेक्टर ने छानबीन की- गन्ना तो है ही नहीं तेरे पास। लड़का बोला- ऊपर है। इंस्पेक्टर ने ऊपर देखा तो बच्चा नजर आया। वे हंसते हुए बोले-ऊपर गन्ना नहीं मुन्ना है। लड़का अपनी हंसी रोक नहीं पाया। इंस्पेक्टर ने गन्ने का उत्पादन क्षेत्र, बाजार वैल्यू का जिक्र करते हुए जुगाड़ स्टार्ट करने को कहा। लड़का सीट से उठा और पीछे लगे इंजन में हैंडल लगाकर घुमाया। जुगाड़ फट-फट करने लगा। इंस्पेक्टर को फिर मजाक सूझा। बोले- ये डीजल से चलता है या इसमें गन्ने का तेल डाल देता है, एथनॉल? लड़के का डर निकल चुका था। वह मुस्कुरा रहा था। जुगाड़ की छत पर बैठा बच्चा भी मुस्कुरा रहा था। इंस्पेक्टर ने आशीर्वाद सा दिया- जा बेटा, कमा के ढंग से खा। और हां ब्रेक-व्रेक तो ठीक से लगते हैं न इसमें? लड़का ‘हां’ कहते हुए जुगाड़ को आगे बढ़ा ले गया। इनपुट सहयोग- वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

