अजित डोभाल पर Rahul Gandhi की टिप्पणी पर गोदियाल रुख साफ करें: पुष्कर सिंह धामी

अजित डोभाल पर Rahul Gandhi की टिप्पणी पर गोदियाल रुख साफ करें: पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पर राहुल गांधी की कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग करते हुए शनिवार को सवाल किया कि क्या वह अपने नेता की टिप्पणी का समर्थन करते हैं? धामी ने पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की !लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में शामिल होने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि डोभाल उत्तराखंड के ‘‘वीर सपूत’’ हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि डोभाल पर की गई टिप्पणी केवल उनका ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उन सभी लोगों का अपमान है जिन्होंने देश की सेवा में अपना जीवन लगा दिया।

राहुल गांधी ने 19 सितंबर को इंदौर में आयोजित अपने युवा संपर्क कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि वह फोन और सोशल मीडिया समेत विभिन्न संचार साधनों पर ‘‘कब्जा करके बैठे’’ हैं और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री तक खुफिया सूचनाएं पहुंचाते हैं। राहुल ने कहा था कि ‘सिस्टम’ ने राजनीति से लेकर शिक्षा, कारोबार, नौकरशाही, खेल और मीडिया समेत हर क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। धामी ने कहा, ‘‘मैं श्रीनगर की धरती से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से पूछना चाहता हूं कि क्या वह राहुल गांधी द्वारा अजित डोभाल के किए गए कथित अपमान और उनके लिए इस्तेमाल की गई निम्नस्तरीय भाषा का समर्थन करते हैं?’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि गोदियाल इस टिप्पणी का समर्थन करते हैं तो उन्हें चुप रहना चाहिए, क्योंकि इससे स्पष्ट हो जाएगा कि उत्तराखंड के मान-सम्मान का उनके लिए कोई महत्व नहीं है और अगर वह इसका समर्थन नहीं करते हैं तो उन्हें खुलकर कहना चाहिए कि राहुल गांधी की टिप्पणी अनुचित है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह ऐसा कहेंगे तो हम मानेंगे कि वह स्वाभिमानी व्यक्ति हैं और उनके लिए उत्तराखंड का सम्मान सर्वोपरि है।’’
धामी ने कांग्रेस से अपने नेता की कथित अपमानजनक टिप्पणी के लिए उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर न्याय यात्राओं और प्रदर्शनों के माध्यम से प्रदेश का शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावों में लगातार मिल रही हार को पचा नहीं पा रही है और हताशा में अराजकता, भ्रम तथा झूठ फैलाने का प्रयास कर रही है।

धामी ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी नतीजे पक्ष में नहीं आने पर कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं और निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी को भी यदि कोई आपत्ति है तो उसे प्रमाणों के साथ संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के दावों पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने देश में आपातकाल लगाया था, उसे दूसरों को लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ नहीं पढ़ाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर इस मामले का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मामले के दोषियों को सजा मिल चुकी है और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच जारी है, इसके बावजूद विपक्ष इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाकर राज्य सरकार को निशाना बना रहा है।

भ्रष्टाचार और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मुद्दे पर भी धामी ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पारदर्शी तरीके से 35 हजार से अधिक नियुक्तियां की हैं और नकल रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है। धामी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और अतिक्रमण के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ये कदम उत्तराखंड की पहचान और हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश के विकास के साथ-साथ उसकी संस्कृति, शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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