तुलसीदास ने राम के चरित्र से समाज को आदर्श दिए:डॉ. सुप्रिया पाठक ने कहा- रामचरितमानस में रिश्तों, कर्तव्यों और नैतिक जीवन की सीख

तुलसीदास ने राम के चरित्र से समाज को आदर्श दिए:डॉ. सुप्रिया पाठक ने कहा- रामचरितमानस में रिश्तों, कर्तव्यों और नैतिक जीवन की सीख

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस और अपनी दूसरी रचनाओं के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया। उनके साहित्य में रिश्तों को नैतिक मूल्यों और संस्कारों से मजबूत करने के साथ सभी प्राणियों के प्रति संवेदना का संदेश है। यह बात महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र प्रयागराज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुप्रिया पाठक ने कही। वह शनिवार को विज्ञान परिषद् प्रयाग की ओर से अलोपीबाग स्थित नागरी प्रेस सभागार में आयोजित डॉ. रामकुमारी मिश्र स्मृति व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता थीं। व्याख्यान का विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान’ था। डॉ. पाठक ने कहा कि तुलसीदास ने रामचरितमानस के जरिए समाज के हर वर्ग को नैतिक और संस्कारपूर्ण जीवन की सीख दी। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल भाव को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए लोकभाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि पहले ज्ञान को आत्मसात करने की परंपरा थी। इसके बाद ‘विद्या ददाति विनयम्’ का भाव सामने आया। इसका अर्थ है कि सच्ची विद्या मनुष्य में विनम्रता लाती है और विनय रखने वाला ही वास्तव में ज्ञानी होता है। डॉ. पाठक ने कहा कि तुलसीदास ने ज्ञान और बोध को लोकभाषा के जरिए आम लोगों तक पहुंचाया। राम के चरित्र के जरिए उनका उद्देश्य मानव जीवन के आदर्शों को समाज में स्थापित करना और जन-जन तक पहुंचाना था। रामचरितमानस में रिश्तों, कर्तव्यों और आदर्शों को सहज भाषा में समझाया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विज्ञान परिषद् प्रयाग के सभापति प्रो. कृष्ण बिहारी पाण्डेय ने की। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. सुप्रिया पाठक को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने किया। परिषद् के कोषाध्यक्ष शंकर लाल मजूर ने अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार जताया।

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