इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव के बजाय भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के एक उप निदेशक (डिप्टी डायरेक्टर) से हलफनामा दाखिल कराए जाने पर नाराजगी जताई है।
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने कुबेर सिंह की याचिका पर यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 के आदेश में गृह मंत्रालय के उस सचिव को, जो राष्ट्रीय साइबर अपराध मामलों को देखते हैं, जांच की स्थिति पर हलफनामा देने का निर्देश दिया था। मकसद यह जानना था कि बैंक ने क्या कार्रवाई की। क्या है मामला जानिये सचिव ने खुद हलफनामा देने के बजाय इसे इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के एक डिप्टी डायरेक्टर से दाखिल करवा दिया। पीठ ने कहा कि संभव है कि गृह मंत्रालय में राष्ट्रीय साइबर अपराध देखने वाला कोई अलग “सचिव” पद न हो, लेकिन जब सचिव, गृह मंत्रालय को हलफनामा देने का निर्देश दिया गया है, तो हलफनामा मंत्रालय के किसी सचिव की ओर से ही आना चाहिए, किसी अन्य अधिकारी की ओर से नही।मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता को अपने खाते के विभिन्न लेनदेन स्पष्ट करते हुए पूरक प्रति-शपथपत्र दाखिल करने का समय दिया। साथ ही कहा कि जो भी तथ्य वे बहस में रखना चाहते हैं, वे सब उसमें दर्ज करें। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह आदेश 24 घंटे के भीतर रजिस्ट्रार जनरल, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा, दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से सचिव, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली को भेजा जाए। तामील की रिपोर्ट प्राप्त कर अगली तारीख से पहले रिकॉर्ड पर रखी जाएगी।

