भागलपुर- अधिकारों पर बहस के बैठक से निकले मेयर-डिप्टी मेयर:पार्षदों के मनाने पर लौटे; सफाई, वार्डों की विकास योजनाओं, जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

भागलपुर- अधिकारों पर बहस के बैठक से निकले मेयर-डिप्टी मेयर:पार्षदों के मनाने पर लौटे; सफाई, वार्डों की विकास योजनाओं, जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

भागलपुर नगर निगम की सामान्य बोर्ड बैठक में शनिवार को मेयर और डिप्टी मेयर वित्तीय अधिकारों पर बहस के बाद बैठक छोड़कर अपने चेंबर में चले गए। पार्षदों के मनाने और शहर के विकास का हवाला देने पर दोनों वापस लौटे और बैठक आगे चली। नगर निगम सभागार में हुई बैठक में शहर की सफाई, वार्डों की विकास योजनाओं, जनहित के मुद्दों और नागरिक सुविधाओं पर चर्चा होनी थी। इसी दौरान कुछ पार्षदों ने कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर के पास वित्तीय अधिकार नहीं हैं। इस बात पर मेयर डॉ. वसुंधरा लाल और डिप्टी मेयर डॉ. सलाउद्दीन एहसान नाराज हो गए। मेयर बोली- कुछ पार्षदों ने वित्तीय अधिकार पर ऐसी बातें कही, जिससे आहत हुईं मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने कहा कि बैठक में कुछ पार्षदों ने महापौर और उपमहापौर के वित्तीय अधिकारों को लेकर ऐसी बातें कहीं, जिससे वे आहत हुईं। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े विकास कार्यों और जनहित के प्रस्ताव पार्षदों और बोर्ड के जरिए आगे बढ़ाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक बोर्ड किसी योजना या प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देता, तब तक उसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि वार्डों में विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने, प्रस्तावों को बोर्ड से पारित कराने, इंजीनियरों से प्राक्कलन बनवाने और फिर काम शुरू कराने की प्रक्रिया में बोर्ड की अहम भूमिका है। ऐसे में जनहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने की जरूरत है। अधिकारों को लेकर उठे विवाद से नाराज होकर वे बैठक से बाहर चली गई थीं, लेकिन शहर के विकास को प्राथमिकता देते हुए पार्षदों के आग्रह पर वापस लौटीं। पार्षद बने संकटमोचक, चेंबर में पहुंचकर मनाया मेयर और उपमेयर के बैठक छोड़कर जाने के बाद कुछ पार्षदों ने पहल की। पार्षदों का कहना था कि आपसी विवाद और अधिकारों की खींचतान में शहर का विकास नहीं रुकना चाहिए। पिछले तीन-चार महीनों से विवादों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। यदि बैठक ही नहीं होगी तो वार्डों की योजनाओं को मंजूरी कैसे मिलेगी और जनता के काम आगे कैसे बढ़ेंगे? पार्षदों ने दोनों जनप्रतिनिधियों को समझाया कि सदन में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका समाधान बैठक से बाहर जाने में नहीं, बल्कि चर्चा और सहमति से निकालने में है। शहर के विकास का हवाला देते हुए उन्हें दोबारा बैठक में शामिल होने का आग्रह किया गया। आखिरकार मान-मनौव्वल रंग लाई और मेयर-उपमेयर वापस सदन में पहुंचे। इसके बाद बैठक की कार्यवाही फिर शुरू हुई। 51 वार्ड, 51 पार्षद और सबकी अपनी राय, लेकिन विकास पर एकमत होने की अपील उपमेयर डॉ. सलाउद्दीन एहसान ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नगर निगम में कुल 51 वार्ड और 51 पार्षद हैं। सभी की अपनी-अपनी विचारधारा और सोच है। कुछ पार्षदों का कहना है कि मेयर और डिप्टी मेयर के पास कोई अधिकार ही नहीं है। जब सदन में इस तरह की बातें कही जाने लगीं तो उन्हें लगा कि वहां बैठने का औचित्य ही क्या है। इसी नाराजगी में वे बैठक छोड़कर चले गए थे। उन्होंने बताया कि बाद में कई पार्षद उनके चेंबर में पहुंचे और समझाया कि इस तरह बैठक छोड़कर चले जाने से शहर के विकास कार्यों में बाधा आएगी। कुछ लोग यही चाहते हैं कि विकास का काम आगे नहीं बढ़े। पार्षदों ने कहा कि आपसी मतभेद को किनारे रखकर बैठक में वापस चलना चाहिए, ताकि जनता के काम हो सकें। इसके बाद उन्होंने दोबारा बैठक में शामिल होने का निर्णय लिया। उपमेयर ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के कई हिस्सों में काम हुए हैं, लेकिन दक्षिणी, पश्चिमी और पूर्वी भाग के कई इलाके अभी भी विकास के मामले में पीछे हैं। यदि बोर्ड की बैठकें नहीं होंगी और योजनाओं पर चर्चा नहीं होगी तो इन इलाकों का विकास और पीछे चला जाएगा। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से लेकर डेढ़-दो करोड़ के कथित घोटाले तक उठा मामला बैठक में केवल अधिकारों की लड़ाई ही चर्चा का विषय नहीं रही, बल्कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, उनके वेतन और बकाया भुगतान तथा सफाई कार्यों से जुड़ी एजेंसी की भूमिका पर भी चर्चा हुई। इस दौरान ऑडिट में सामने आए करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले को लेकर भी सवाल उठाए गए। इस पर नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया गया कि सफाई कर्मचारियों से संबंधित कार्यों के लिए नई एजेंसी आ चुकी है। शेष राशि और बकाया भुगतान की प्रक्रिया भी नई एजेंसी के माध्यम से पूरी की जाएगी। सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाने और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने की जरूरत पर जोर दिया गया। विकास बनाम अधिकार की लड़ाई में जनता के काम न अटकें बैठक का सबसे अहम संदेश यही रहा कि नगर निगम के जनप्रतिनिधियों के बीच अधिकारों को लेकर चाहे जितना मतभेद हो, उसका खामियाजा शहर की जनता को नहीं भुगतना चाहिए। तीन-चार महीने से विकास कार्यों के प्रभावित होने की बात खुद पार्षदों ने उठाई। भागलपुर नगर निगम की सामान्य बोर्ड बैठक में शनिवार को मेयर और डिप्टी मेयर वित्तीय अधिकारों पर बहस के बाद बैठक छोड़कर अपने चेंबर में चले गए। पार्षदों के मनाने और शहर के विकास का हवाला देने पर दोनों वापस लौटे और बैठक आगे चली। नगर निगम सभागार में हुई बैठक में शहर की सफाई, वार्डों की विकास योजनाओं, जनहित के मुद्दों और नागरिक सुविधाओं पर चर्चा होनी थी। इसी दौरान कुछ पार्षदों ने कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर के पास वित्तीय अधिकार नहीं हैं। इस बात पर मेयर डॉ. वसुंधरा लाल और डिप्टी मेयर डॉ. सलाउद्दीन एहसान नाराज हो गए। मेयर बोली- कुछ पार्षदों ने वित्तीय अधिकार पर ऐसी बातें कही, जिससे आहत हुईं मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने कहा कि बैठक में कुछ पार्षदों ने महापौर और उपमहापौर के वित्तीय अधिकारों को लेकर ऐसी बातें कहीं, जिससे वे आहत हुईं। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े विकास कार्यों और जनहित के प्रस्ताव पार्षदों और बोर्ड के जरिए आगे बढ़ाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक बोर्ड किसी योजना या प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देता, तब तक उसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि वार्डों में विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने, प्रस्तावों को बोर्ड से पारित कराने, इंजीनियरों से प्राक्कलन बनवाने और फिर काम शुरू कराने की प्रक्रिया में बोर्ड की अहम भूमिका है। ऐसे में जनहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने की जरूरत है। अधिकारों को लेकर उठे विवाद से नाराज होकर वे बैठक से बाहर चली गई थीं, लेकिन शहर के विकास को प्राथमिकता देते हुए पार्षदों के आग्रह पर वापस लौटीं। पार्षद बने संकटमोचक, चेंबर में पहुंचकर मनाया मेयर और उपमेयर के बैठक छोड़कर जाने के बाद कुछ पार्षदों ने पहल की। पार्षदों का कहना था कि आपसी विवाद और अधिकारों की खींचतान में शहर का विकास नहीं रुकना चाहिए। पिछले तीन-चार महीनों से विवादों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। यदि बैठक ही नहीं होगी तो वार्डों की योजनाओं को मंजूरी कैसे मिलेगी और जनता के काम आगे कैसे बढ़ेंगे? पार्षदों ने दोनों जनप्रतिनिधियों को समझाया कि सदन में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका समाधान बैठक से बाहर जाने में नहीं, बल्कि चर्चा और सहमति से निकालने में है। शहर के विकास का हवाला देते हुए उन्हें दोबारा बैठक में शामिल होने का आग्रह किया गया। आखिरकार मान-मनौव्वल रंग लाई और मेयर-उपमेयर वापस सदन में पहुंचे। इसके बाद बैठक की कार्यवाही फिर शुरू हुई। 51 वार्ड, 51 पार्षद और सबकी अपनी राय, लेकिन विकास पर एकमत होने की अपील उपमेयर डॉ. सलाउद्दीन एहसान ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नगर निगम में कुल 51 वार्ड और 51 पार्षद हैं। सभी की अपनी-अपनी विचारधारा और सोच है। कुछ पार्षदों का कहना है कि मेयर और डिप्टी मेयर के पास कोई अधिकार ही नहीं है। जब सदन में इस तरह की बातें कही जाने लगीं तो उन्हें लगा कि वहां बैठने का औचित्य ही क्या है। इसी नाराजगी में वे बैठक छोड़कर चले गए थे। उन्होंने बताया कि बाद में कई पार्षद उनके चेंबर में पहुंचे और समझाया कि इस तरह बैठक छोड़कर चले जाने से शहर के विकास कार्यों में बाधा आएगी। कुछ लोग यही चाहते हैं कि विकास का काम आगे नहीं बढ़े। पार्षदों ने कहा कि आपसी मतभेद को किनारे रखकर बैठक में वापस चलना चाहिए, ताकि जनता के काम हो सकें। इसके बाद उन्होंने दोबारा बैठक में शामिल होने का निर्णय लिया। उपमेयर ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के कई हिस्सों में काम हुए हैं, लेकिन दक्षिणी, पश्चिमी और पूर्वी भाग के कई इलाके अभी भी विकास के मामले में पीछे हैं। यदि बोर्ड की बैठकें नहीं होंगी और योजनाओं पर चर्चा नहीं होगी तो इन इलाकों का विकास और पीछे चला जाएगा। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से लेकर डेढ़-दो करोड़ के कथित घोटाले तक उठा मामला बैठक में केवल अधिकारों की लड़ाई ही चर्चा का विषय नहीं रही, बल्कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, उनके वेतन और बकाया भुगतान तथा सफाई कार्यों से जुड़ी एजेंसी की भूमिका पर भी चर्चा हुई। इस दौरान ऑडिट में सामने आए करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले को लेकर भी सवाल उठाए गए। इस पर नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया गया कि सफाई कर्मचारियों से संबंधित कार्यों के लिए नई एजेंसी आ चुकी है। शेष राशि और बकाया भुगतान की प्रक्रिया भी नई एजेंसी के माध्यम से पूरी की जाएगी। सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाने और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने की जरूरत पर जोर दिया गया। विकास बनाम अधिकार की लड़ाई में जनता के काम न अटकें बैठक का सबसे अहम संदेश यही रहा कि नगर निगम के जनप्रतिनिधियों के बीच अधिकारों को लेकर चाहे जितना मतभेद हो, उसका खामियाजा शहर की जनता को नहीं भुगतना चाहिए। तीन-चार महीने से विकास कार्यों के प्रभावित होने की बात खुद पार्षदों ने उठाई।  

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