राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 2026 में अब तक आर्द्रभूमि संरक्षण की नयी परियोजनाओं के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर याचिका के जवाब में यह जानकारी सामने आई है। इसमें कहा गया है कि राज्यों से प्रस्ताव मिलने का इंतजार है।
एनएमसीजी ने बताया कि उसने ‘वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया’ (डब्ल्यूआईएसए), नयी दिल्ली और संबंधित राज्यों के वन विभागों के सहयोग से गंगा बेसिन में आर्द्रभूमि की पहचान, आकलन, संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए पहल की है। डब्ल्यूआईएसए ने उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में आर्द्रभूमि की सूची तैयार करने तथा प्राथमिकता तय करने से संबंधित अध्ययन किए हैं। आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए तकनीकी रिपोर्ट उपलब्ध हैं, जबकि दिल्ली में आर्द्रभूमि की पहचान से संबंधित अध्ययन जारी है।
एनएमसीजी ने 2023, 2024 और 2025 के दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के वन विभागों को आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन की परियोजनाएं मंजूर की थीं। ये परियोजनाएं अभी जारी हैं। उत्तराखंड में देहरादून जिले के रामसर स्थल ‘आसन वेटलैंड’ के संरक्षण और प्रबंधन की परियोजना 2025 में 2.47 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर की गई थी।
इसके लिए 52 लाख रुपये जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर की कालेवाला झील, प्रयागराज की नुमैया दही झील-खेदुवा ताल और बलिया की दहताल रेवती आर्द्रभूमि के संरक्षण एवं सतत प्रबंधन की परियोजना 2023 में 5.37 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर की गई थी। इसमें से 3.22 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
बिहार के भोजपुर जिले में नथमलपुर भगड़ आर्द्रभूमि के संरक्षण एवं सतत प्रबंधन की परियोजना 2025 में 3.51 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर की गई थी। इसके लिए 72.8 लाख रुपये जारी किए गए हैं। झारखंड के साहिबगंज जिले में उधवा झील पक्षी अभयारण्य के लिए नमामि गंगे मिशन-दो के तहत एकीकृत प्रबंधन योजना 2024 में 25.89 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर की गई थी।
एनएमसीजी ने इस परियोजना के लिए 7.70 करोड़ रुपये जारी किए हैं। मिशन ने बताया कि वह समीक्षा बैठकों और क्षेत्र के दौरे के माध्यम से परियोजनाओं की भौतिक प्रगति की नियमित निगरानी करता है। इन परियोजनाओं के बारे में अधिक जानकारी उन्हें लागू कर रहे संबंधित राज्यों के वन विभागों से प्राप्त की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश के संबंध में एनएमसीजी की तकनीकी रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा नदी के प्रवाह क्षेत्र के दोनों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में 285 आर्द्रभूमियों की सूची तैयार की गई है। यह सूची आसपास के क्षेत्र के वर्ष 2020 के भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण मानचित्र के आधार पर त्वरित आकलन पद्धति से तैयार की गई थी। इन आर्द्रभूमियों का भौगोलिक स्थान, क्षेत्रफल, प्रकार, जलग्रहण क्षेत्र, जल विज्ञान, जल स्रोत, आपसी संपर्क, जलभराव के स्वरूप, प्रजातियों एवं उनके आवास, पारिस्थितिकी तंत्र से मिलने वाली सेवाओं, खतरों और प्रबंधन व्यवस्था के आधार पर आकलन किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्द्रभूमि के क्षेत्रफल, जल विज्ञान एवं जलग्रहण क्षेत्र, जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं और प्रशासन से जुड़े नौ संकेतकों के आधार पर उनके ‘स्वास्थ्य’ कार्ड तैयार किए गए। संरक्षण और प्रबंधन के लिए आर्द्रभूमि की प्राथमिकता तय करते समय उनके सामने मौजूद खतरों से जुड़े अंकों के साथ पारिस्थितिकी तंत्र सेवा सूचकांक और जल-भूआकृतिक कार्यों के अंकों को भी आधार बनाया गया।

