भारतीय वायुसेना की कमान अब नए योद्धा के हाथों में आ गयी है और इसी के साथ ही दुश्मनों के लिए भारत का सैन्य संदेश पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गया है। हम आपको बता दें कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 42 वर्षों की गौरवशाली सैन्य सेवा के बाद आज सेवानिवृत्त हो गए और उनके स्थान पर एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कमान संभाल ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और उसके संरक्षण में पल रहे आतंकवादी नेटवर्क को भारत की सैन्य ताकत का अहसास कराने वाले एपी सिंह अपने पीछे साहस, रणनीतिक सूझबूझ और निर्णायक सैन्य कार्रवाई की विरासत छोड़ गए हैं। अब इस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आशुतोष दीक्षित के कंधों पर है।
42 वर्षों की सेवा के बाद AP सिंह की शानदार विदाई
हम आपको बता दें कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की विदाई बेहद गरिमामय सैन्य परंपराओं के साथ हुई। पदभार छोड़ने से पहले उन्होंने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद एयर फोर्स स्टेशन, नई दिल्ली में वायुसेना के जांबाज एयर वॉरियर्स ने उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर देकर विदाई दी। यह सलामी केवल एक अधिकारी को दी गई विदाई नहीं थी, बल्कि चार दशकों से अधिक समय तक देश के आसमान की सुरक्षा में समर्पित रहे एक सैन्य नेतृत्वकर्ता के प्रति सम्मान का प्रतीक थी।
हम आपको यह भी बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी 30 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से मुलाकात कर उनके असाधारण नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्र के प्रति योगदान की सराहना की थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के सफल क्रियान्वयन और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। रक्षा मंत्री ने उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
ऑपरेशन सिंदूर ने दुश्मनों को दिखाया भारत का नया सैन्य तेवर
देखा जाये तो एपी सिंह के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में ऑपरेशन सिंदूर को विशेष रूप से याद किया जाएगा। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर पूरे देश को झकझोर दिया था। इस कायराना हमले का जवाब भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए दिया था। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे पर निर्णायक हमले किए थे। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ प्रमुख आतंकवादी लॉन्चपैड तबाह किए गए और 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।
इस अभियान ने स्पष्ट कर दिया था कि भारत की सुरक्षा को चुनौती देने वालों के लिए अब सीमा पार आतंकवाद का खेल पहले जैसा आसान नहीं रहने वाला। भारत की सैन्य प्रतिक्रिया ने यह संदेश दिया था कि आतंकवाद के संरक्षकों को उनके सुरक्षित ठिकानों में भी जवाबदेह बनाया जा सकता है।
अब आशुतोष दीक्षित के हाथों में भारतीय वायुसेना की कमान
दूसरी ओर, नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित अपने साथ लगभग चार दशकों का व्यापक सैन्य अनुभव लेकर आए हैं। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। एक कुशल फाइटर पायलट, क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में उनकी पहचान रही है। उन्होंने मिराज-2000, मिग सीरीज के विभिन्न विमानों, जगुआर, किरण, हॉक, तेजस और IL-78 जैसे विमानों पर उड़ान भरी है। 20 से अधिक प्रकार के विमानों पर उनका अनुभव उन्हें वायुसेना के सबसे अनुभवी पायलटों में शामिल करता है।
ऑपरेशन सफेद सागर से सिंदूर तक का अनुभव
एयर चीफ मार्शल दीक्षित का सैन्य सफर केवल लड़ाकू विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहा। ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों तथा विभिन्न सैन्य अभ्यासों में उनकी भूमिका रही है। वह पश्चिमी सेक्टर में अग्रिम मोर्चे के एक महत्वपूर्ण फाइटर एयरबेस और दक्षिणी सेक्टर में प्रतिष्ठित फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाल चुके हैं। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वह वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ थे। इससे पहले उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के रूप में और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, बांग्लादेश और नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
भारत की हवाई ताकत लगातार मजबूत हो रही है
देखा जाये तो एपी सिंह की विदाई और आशुतोष दीक्षित की ताजपोशी भारतीय वायुसेना की निरंतरता, अनुभव और रणनीतिक मजबूती का प्रतीक है। एक तरफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमता साबित कर चुके नेतृत्व की विरासत है, तो दूसरी तरफ आधुनिक युद्धक विमानों, रणनीतिक योजना, फ्लाइट टेस्टिंग और संयुक्त सैन्य अभियानों का गहरा अनुभव रखने वाला नया नेतृत्व है।
बहरहाल, आसमान की निगरानी करने वाले भारतीय वायुसेना के जांबाजों के लिए नेतृत्व बदल सकता है, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा का संकल्प नहीं। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की जवाबी क्षमता का परिचय दिया था और अब एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित के नेतृत्व में इसी सामरिक शक्ति को और आगे ले जाने की चुनौती है। दुश्मनों के लिए संदेश साफ है। भारत की सुरक्षा को चुनौती देने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

