कटिहार-10.97 लाख से बन रहा पब्लिक टॉयलेट अधूरा:जुलाई में पूरा होना था निर्माण; बिना अनुमति बिजली इस्तेमाल का आरोप

कटिहार-10.97 लाख से बन रहा पब्लिक टॉयलेट अधूरा:जुलाई में पूरा होना था निर्माण; बिना अनुमति बिजली इस्तेमाल का आरोप

कटिहार सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत बन रहा सार्वजनिक शौचालय निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरा है। नगर निगम कटिहार की ओर से इसके निर्माण पर 10 लाख 97 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। निर्माण में देरी के साथ ही काम की गुणवत्ता और अनियमितता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कार्यस्थल पर लगे सूचना पट के अनुसार, सार्वजनिक शौचालय का निर्माण 14 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसे छह महीने यानी जुलाई 2026 तक पूरा किया जाना था। लेकिन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद काम अधूरा रहने से निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। देखें, मौके से आई तस्वीरें… मौके पर नहीं मिले संवेदक और मुंशी, मजदूर कर रहे थे काम निर्माण स्थल पर निरीक्षण के दौरान सिर्फ मजदूर काम करते दिखाई दिए। निर्माण कार्य की देखरेख करने वाले संवेदक और मुंशी मौके पर मौजूद नहीं थे। स्थानीय लोगों ने तकनीकी निगरानी के अभाव में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। लोगों का आरोप है कि काम में गुणवत्ता का ध्यान रखने के बजाय लीपापोती की जा रही है। घटिया ईंट और कम सीमेंट इस्तेमाल करने का आरोप स्थानीय निवासी अमित कुमार और शिबू कुमार यादव ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मसाला तैयार करने में भी निर्धारित मात्रा से कम सीमेंट डाला जा रहा है। उन्होंने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। बिना अनुमति बाईपास बिजली इस्तेमाल करने का आरोप स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि संवेदक ने आरटीपीएस कार्यालय से सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति लिए बिना बाईपास बिजली का इस्तेमाल किया। इस मामले में नगर निगम के जूनियर इंजीनियर नामित कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से इस तरह बिजली इस्तेमाल करने की कोई अनुमति नहीं दी गई है। देरी पर बिल में कटौती, गुणवत्ता की जांच के बाद होगी कार्रवाई नगर निगम के जूनियर इंजीनियर नामित कुमार ने बताया कि निर्माण स्थल के चयन और जमीन अधिग्रहण में आई अड़चनों के कारण काम में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि अधिक देरी होने पर विभागीय नियमों के अनुसार संवेदक के बिल में कटौती की जाएगी। निर्माण की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। जांच के बाद अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। कटिहार सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत बन रहा सार्वजनिक शौचालय निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरा है। नगर निगम कटिहार की ओर से इसके निर्माण पर 10 लाख 97 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। निर्माण में देरी के साथ ही काम की गुणवत्ता और अनियमितता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कार्यस्थल पर लगे सूचना पट के अनुसार, सार्वजनिक शौचालय का निर्माण 14 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसे छह महीने यानी जुलाई 2026 तक पूरा किया जाना था। लेकिन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद काम अधूरा रहने से निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। देखें, मौके से आई तस्वीरें… मौके पर नहीं मिले संवेदक और मुंशी, मजदूर कर रहे थे काम निर्माण स्थल पर निरीक्षण के दौरान सिर्फ मजदूर काम करते दिखाई दिए। निर्माण कार्य की देखरेख करने वाले संवेदक और मुंशी मौके पर मौजूद नहीं थे। स्थानीय लोगों ने तकनीकी निगरानी के अभाव में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। लोगों का आरोप है कि काम में गुणवत्ता का ध्यान रखने के बजाय लीपापोती की जा रही है। घटिया ईंट और कम सीमेंट इस्तेमाल करने का आरोप स्थानीय निवासी अमित कुमार और शिबू कुमार यादव ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मसाला तैयार करने में भी निर्धारित मात्रा से कम सीमेंट डाला जा रहा है। उन्होंने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। बिना अनुमति बाईपास बिजली इस्तेमाल करने का आरोप स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि संवेदक ने आरटीपीएस कार्यालय से सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति लिए बिना बाईपास बिजली का इस्तेमाल किया। इस मामले में नगर निगम के जूनियर इंजीनियर नामित कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से इस तरह बिजली इस्तेमाल करने की कोई अनुमति नहीं दी गई है। देरी पर बिल में कटौती, गुणवत्ता की जांच के बाद होगी कार्रवाई नगर निगम के जूनियर इंजीनियर नामित कुमार ने बताया कि निर्माण स्थल के चयन और जमीन अधिग्रहण में आई अड़चनों के कारण काम में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि अधिक देरी होने पर विभागीय नियमों के अनुसार संवेदक के बिल में कटौती की जाएगी। निर्माण की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। जांच के बाद अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *