पश्चिम चंपारण में तीसरे दिन बारिश से जनजीवन प्रभावित:1.25 लाख हेक्टेयर में हुई धान की खेती पर खतरा, सड़कों पर जलभराव

पश्चिम चंपारण में तीसरे दिन बारिश से जनजीवन प्रभावित:1.25 लाख हेक्टेयर में हुई धान की खेती पर खतरा, सड़कों पर जलभराव

पश्चिम चंपारण जिले में शनिवार को लगातार तीसरे दिन तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। इससे शहर और ग्रामीण इलाकों में जनजीवन पर असर पड़ा। बारिश के कारण कई सड़कों पर कीचड़ और पानी भर गया। जरूरी काम से घरों से निकले लोगों को परेशानी हुई। कुछ जगहों पर लोग घरों में ही रहे। इस बारिश से किसानों की धान की फसल को नुकसान का खतरा है। जिले में इस साल करीब 1.25 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती हुई है। शुरुआत में मौसम अनुकूल रहा और समय पर बारिश हुई, जिससे फसल अच्छी हुई थी। किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। कटाई के समय हुई बारिश से उनकी फसल पर असर पड़ सकता है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, अब तक जिले में महज 25 प्रतिशत धान की कटाई हो सकी थी। शेष करीब 75 प्रतिशत फसल खेतों में खड़ी थी। इसमें बड़ी मात्रा में धान पककर कटाई के लिए तैयार हो चुका था। ऐसे समय में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर गिर गई है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका है।

खेतों में बिछी फसल, बालियां सड़ने का खतरा

जिले के विभिन्न प्रखंडों से मिल रही तस्वीरें किसानों की परेशानी बयां कर रही हैं। तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में सीना ताने खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। खेतों में जमा बारिश के पानी में गिरी हुई फसल डूब रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रही तो धान की बालियों के सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। नमी के कारण दानों में खेत में ही अंकुरण शुरू हो सकता है। इससे धान के दाने काले पड़ने और उनकी गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में किसानों को उपज का उचित बाजार मूल्य मिलना भी मुश्किल हो सकता है।
लागत निकालना भी हो सकता है मुश्किल

बारिश के कारण किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ खेतों में गिरी फसल को सुरक्षित निकालने की चिंता है, तो दूसरी तरफ खेतों में पानी जमा होने के कारण कटाई का काम भी प्रभावित हो रहा है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो फसल को और नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को आशंका है कि इस बार उनकी महीनों की मेहनत और खेती में लगाई गई पूंजी दोनों पर संकट आ सकता है। अब किसानों की निगाहें मौसम साफ होने और खेतों से पानी निकलने पर टिकी हैं। पश्चिम चंपारण जिले में शनिवार को लगातार तीसरे दिन तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। इससे शहर और ग्रामीण इलाकों में जनजीवन पर असर पड़ा। बारिश के कारण कई सड़कों पर कीचड़ और पानी भर गया। जरूरी काम से घरों से निकले लोगों को परेशानी हुई। कुछ जगहों पर लोग घरों में ही रहे। इस बारिश से किसानों की धान की फसल को नुकसान का खतरा है। जिले में इस साल करीब 1.25 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती हुई है। शुरुआत में मौसम अनुकूल रहा और समय पर बारिश हुई, जिससे फसल अच्छी हुई थी। किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। कटाई के समय हुई बारिश से उनकी फसल पर असर पड़ सकता है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, अब तक जिले में महज 25 प्रतिशत धान की कटाई हो सकी थी। शेष करीब 75 प्रतिशत फसल खेतों में खड़ी थी। इसमें बड़ी मात्रा में धान पककर कटाई के लिए तैयार हो चुका था। ऐसे समय में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर गिर गई है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका है।

खेतों में बिछी फसल, बालियां सड़ने का खतरा

जिले के विभिन्न प्रखंडों से मिल रही तस्वीरें किसानों की परेशानी बयां कर रही हैं। तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में सीना ताने खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। खेतों में जमा बारिश के पानी में गिरी हुई फसल डूब रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रही तो धान की बालियों के सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। नमी के कारण दानों में खेत में ही अंकुरण शुरू हो सकता है। इससे धान के दाने काले पड़ने और उनकी गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में किसानों को उपज का उचित बाजार मूल्य मिलना भी मुश्किल हो सकता है।
लागत निकालना भी हो सकता है मुश्किल

बारिश के कारण किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ खेतों में गिरी फसल को सुरक्षित निकालने की चिंता है, तो दूसरी तरफ खेतों में पानी जमा होने के कारण कटाई का काम भी प्रभावित हो रहा है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो फसल को और नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को आशंका है कि इस बार उनकी महीनों की मेहनत और खेती में लगाई गई पूंजी दोनों पर संकट आ सकता है। अब किसानों की निगाहें मौसम साफ होने और खेतों से पानी निकलने पर टिकी हैं।  

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