नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला आज से शुरू:राष्ट्रपति मुर्मू ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजारोहण में शामिल होंगी; 22 महीने तक चलेगा

नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला आज से शुरू:राष्ट्रपति मुर्मू ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजारोहण में शामिल होंगी; 22 महीने तक चलेगा

नाशिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में आज से सिंहस्थ महाकुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत होने वाली है। दोपहर 12:02 बजे ध्वजारोहण रामकुंड में होगा, इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल होंगी। यह महाराष्ट्र के 2 धार्मिक शहरों नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में हर 12 साल में होने वाला महाकुंभ है। लाखों लोग गोदावरी नदी में पवित्र स्नान करते हैं। नाशिक में रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ पर स्नान होता है। दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालुओं के नासिक और त्र्यंबकेश्वर आने की उम्मीद है। इसी कार्यक्रम में शंखनाद में बने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाणपत्र भी सौंपा जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को नासिक में महाध्वज ग्राम परिक्रमा निकाली गई। राष्ट्रपति भवन के बयान के मुताबिक, वे इस मौके पर कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगी। कुंभ मेले में करोड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना 20 महीने तक चलने वाले कुंभ मेले के 44 मुहूर्त नासिक में और 53 मुहूर्त त्र्यंबकेश्वर में स्नान के हैं। सरकार का अनुमान है कि नासिक में 8-10 करोड़ और त्र्यंबकेश्वर में 4 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। नासिक कुंभ की खास बात है कि यहां वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान अलग-अलग तीर्थस्थलों पर होते हैं। नासिक और त्र्यंबकेश्वर को एक ही आयोजन के दो प्रमुख केंद्रों के रूप में देखा जाता है। इसे सिंहस्थ कुंभ क्यों कहते हैं नासिक के कुंभ को सिंहस्थ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी पारंपरिक ज्योतिषीय गणना में बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश का विशेष महत्व है। कुंभ की तिथियां केवल सामान्य कैलेंडर के आधार पर तय नहीं होतीं; इनमें धार्मिक परंपराओं, ग्रहों की स्थिति और अखाड़ों की सहमति की भूमिका होती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ था। मान्यता है कि अमृत की बूंदें चार स्थानों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं। इसी वजह से इन स्थानों पर कुंभ मेले की परंपरा जुड़ी है। ————— ये खबर भी पढ़ें… कुंभ से पहले नासिक में बना शंखनाद का वर्ल्ड रिकॉर्ड: 517 लोग शामिल हुए, पिछला रिकॉर्ड 303 का था महाराष्ट्र के नाशिक में 25 अक्टूबर को 517 श्रद्धालुओं ने एक साथ शंख बजाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया। यह कार्यक्रम गोदावरी नदी के किनारे हुआ। यह आयोजन सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह से पहले किया गया। प्रतिभागियों ने पांच मिनट 30 सेकंड तक शंख बजाए। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम के लिए चेन्नई से खास तौर पर प्रमाणित शंख मंगाए गए थे। पढ़ें पूरी खबर…

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