भास्कर संवाददाता| बड़वानी रबी सीजन में गेहूं की बोवनी की तैयारी कर रहे किसानों के सामने इस बार सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। ऐसे में जरूरी नहीं कि गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए बार-बार पानी दिया जाए। कम पानी में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है, बशर्ते सही किस्म का चयन करें और फसल को जरूरत के समय ही सिंचाई दें। कृषि विभाग के डीडीए केसी वास्केल के अनुसार गेहूं की फसल में कुछ अवस्थाएं ऐसी होती हैं, जब पानी देना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। किसान उपलब्ध पानी के अनुसार सिंचाई का प्रबंधन कर सकते हैं। वास्केल के अनुसार जिले की जलवायु और परिस्थितियों में कम पानी के लिए डीबीडब्ल्यू-110, एचआई-1655, एचआई-1544, एलओके-1, एचआई-1605 और एचआई-1650 किस्में अपनाई जा सकती हैं। किसान खेत और सिंचाई संसाधनों के अनुसार किस्म का चयन करें। एक सिंचाई उपलब्ध है तो: बोवनी के 20 से 25 दिन बाद पानी दें। इस समय पौधे की जड़ों का विकास होता है। इसे क्राउन रूट इनिशिएशन अवस्था कहते हैं। दो सिंचाई कर सकते हैं तो: पहली 20 से 25 दिन और दूसरी 45 से 50 दिन बाद दें। दूसरी सिंचाई बालियां निकलने के समय जरूरी है। तीन सिंचाई का पानी है तो पहली 20 से 25 दिन, दूसरी 45 से 50 दिन और तीसरी 80 से 90 दिन बाद दें। तीसरी सिंचाई दाने में दूध बनने की अवस्था में करें। बोवनी में भी रखें इन बातों का ध्यान वास्केल के अनुसार गेहूं की बोवनी नवंबर के पहले से मध्य सप्ताह तक करना बेहतर है। सामान्य सिंचित परिस्थितियों में प्रति हेक्टेयर करीब 100 किलो प्रमाणित बीज का उपयोग करें।

