औरंगाबाद सदर अस्पताल परिसर में अनधिकृत रूप से खड़ी मिलीं 10 निजी एंबुलेंस के मामले में नगर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अस्पताल उपाधीक्षक के आवेदन पर कांड संख्या 718/26 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125, 318(4), 223 और 3(5) लगाई गई हैं। मामले की जांच एसआई अभिजीत कुमार को सौंपी गई है। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान एक एंबुलेंस चालक को छोड़कर बाकी सभी चालक मौके से फरार मिले थे। डीएम के निर्देश पर हुआ था निरीक्षण जानकारी के अनुसार, डीएम अभिलाषा शर्मा के निर्देश पर गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर में अधिकारियों की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया था। टीम में एसडीओ गौरव सिंह, एसडीपीओ सुशील कुमार, सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार और अस्पताल उपाधीक्षक शामिल थे। इस दौरान अस्पताल परिसर में 10 निजी एंबुलेंस अनधिकृत रूप से खड़ी मिलीं। अधिकारियों ने जब एंबुलेंस चालकों और संचालकों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की तो एक चालक को छोड़कर बाकी सभी मौके से गायब मिले। इसके बाद अस्पताल उपाधीक्षक ने नगर थानाध्यक्ष को आवेदन देकर सभी 10 एंबुलेंस के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। मरीजों के आवागमन और आपातकालीन सेवा पर असर की आशंका अस्पताल उपाधीक्षक ने आवेदन में कहा है कि अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस का अनधिकृत रूप से खड़ा रहना व्यवस्था और मरीजों की सुविधा के लिहाज से गंभीर मामला है। इससे मरीजों और उनके परिजनों के आने-जाने में परेशानी हो सकती है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में अस्पताल की सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन की ओर से एंबुलेंस में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और जरूरी दस्तावेजों की जांच भी प्रस्तावित है। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, अंबु बैग, इंट्यूबेशन उपकरण और आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता देखी जाएगी। इसके अलावा एंबुलेंस के संचालन से जुड़े दस्तावेजों और तय मानकों की भी जांच की जाएगी। पुलिस खंगालेगी संचालकों और वाहन मालिकों की भूमिका प्राथमिकी दर्ज होने के बाद नगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी एसआई अभिजीत कुमार एंबुलेंस संचालकों की भूमिका, वाहनों के अस्पताल परिसर में खड़े होने की वजह और दर्ज आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच करेंगे। फरार चालकों और वाहन मालिकों की पहचान कर उनसे पूछताछ भी की जा सकती है। दर्ज धाराओं में बीएनएस की धारा 125 लापरवाही से किसी की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने, धारा 318(4) धोखाधड़ी कर संपत्ति हासिल करने, धारा 223 लोक सेवक के विधिवत जारी आदेश की अवहेलना और धारा 3(5) एक से अधिक लोगों की साझा मंशा से किए गए अपराध से संबंधित है। धारा 318(4) में दोष सिद्ध होने पर सात साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एंबुलेंस संचालकों की क्या भूमिका थी और किन परिस्थितियों में ये वाहन अस्पताल परिसर में खड़े किए गए थे। औरंगाबाद सदर अस्पताल परिसर में अनधिकृत रूप से खड़ी मिलीं 10 निजी एंबुलेंस के मामले में नगर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अस्पताल उपाधीक्षक के आवेदन पर कांड संख्या 718/26 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125, 318(4), 223 और 3(5) लगाई गई हैं। मामले की जांच एसआई अभिजीत कुमार को सौंपी गई है। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान एक एंबुलेंस चालक को छोड़कर बाकी सभी चालक मौके से फरार मिले थे। डीएम के निर्देश पर हुआ था निरीक्षण जानकारी के अनुसार, डीएम अभिलाषा शर्मा के निर्देश पर गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर में अधिकारियों की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया था। टीम में एसडीओ गौरव सिंह, एसडीपीओ सुशील कुमार, सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार और अस्पताल उपाधीक्षक शामिल थे। इस दौरान अस्पताल परिसर में 10 निजी एंबुलेंस अनधिकृत रूप से खड़ी मिलीं। अधिकारियों ने जब एंबुलेंस चालकों और संचालकों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की तो एक चालक को छोड़कर बाकी सभी मौके से गायब मिले। इसके बाद अस्पताल उपाधीक्षक ने नगर थानाध्यक्ष को आवेदन देकर सभी 10 एंबुलेंस के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। मरीजों के आवागमन और आपातकालीन सेवा पर असर की आशंका अस्पताल उपाधीक्षक ने आवेदन में कहा है कि अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस का अनधिकृत रूप से खड़ा रहना व्यवस्था और मरीजों की सुविधा के लिहाज से गंभीर मामला है। इससे मरीजों और उनके परिजनों के आने-जाने में परेशानी हो सकती है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में अस्पताल की सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन की ओर से एंबुलेंस में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और जरूरी दस्तावेजों की जांच भी प्रस्तावित है। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, अंबु बैग, इंट्यूबेशन उपकरण और आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता देखी जाएगी। इसके अलावा एंबुलेंस के संचालन से जुड़े दस्तावेजों और तय मानकों की भी जांच की जाएगी। पुलिस खंगालेगी संचालकों और वाहन मालिकों की भूमिका प्राथमिकी दर्ज होने के बाद नगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी एसआई अभिजीत कुमार एंबुलेंस संचालकों की भूमिका, वाहनों के अस्पताल परिसर में खड़े होने की वजह और दर्ज आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच करेंगे। फरार चालकों और वाहन मालिकों की पहचान कर उनसे पूछताछ भी की जा सकती है। दर्ज धाराओं में बीएनएस की धारा 125 लापरवाही से किसी की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने, धारा 318(4) धोखाधड़ी कर संपत्ति हासिल करने, धारा 223 लोक सेवक के विधिवत जारी आदेश की अवहेलना और धारा 3(5) एक से अधिक लोगों की साझा मंशा से किए गए अपराध से संबंधित है। धारा 318(4) में दोष सिद्ध होने पर सात साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एंबुलेंस संचालकों की क्या भूमिका थी और किन परिस्थितियों में ये वाहन अस्पताल परिसर में खड़े किए गए थे।

