नीमच; अफीम नीति के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन:नारकोटिक्स दफ्तर का घेराव; अधिकारियों पर बाथरूम में रिश्वत लेने का आरोप

नीमच; अफीम नीति के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन:नारकोटिक्स दफ्तर का घेराव; अधिकारियों पर बाथरूम में रिश्वत लेने का आरोप

अफीम नीति 2026-27 के विरोध में नीमच, मंदसौर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ के सैकड़ों किसानों ने नीमच में प्रदर्शन किया। किसानों ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) के दफ्तर का घेराव कर अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए। किसान मेसी शोरूम चौराहे पर जुटे। किसान नेता श्यामलाल जोकचंद और राजकुमार अहीर के नेतृत्व में रैली टीवीएस शोरूम चौराहा, संता चौराहा, एलआईसी चौराहा और भूतेश्वर मंदिर से होते हुए राजस्व कॉलोनी स्थित सीबीएन दफ्तर पहुंची। किसानों ने दफ्तर के मुख्य गेट पर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। किसान राजकुमार अहीर ने आरोप लगाया कि दफ्तर के बाथरूम में रिश्वत ली जाती है, मिठाई के डिब्बों में रिश्वत छिपाई जाती है और निफ्टी के दौरान अवैध वसूली होती है। उन्होंने मुखिया के जरिए किसानों के शोषण का भी आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें नीति में छह बदलावों की मांग की गई। किसानों ने कहा कि बढ़ती खेती की लागत, खराब मौसम और कड़े नियमों से उन्हें नुकसान हो रहा है। ज्ञापन में मॉर्फिन मानक 4.4 से घटाकर 3.7 प्रतिशत करने की मांग की गई, ताकि रद्द हुए चीरे वाले पट्टे बहाल हो सकें। सीपीएस पद्धति में 90 किलो से अधिक औसत उत्पादन देने वाले किसानों को 5 आरी के बजाय 10 आरी का चीरा पट्टा देने की मांग भी रखी गई। किसानों ने 1997-98 से लंबित पात्र मामलों का निपटारा कर नए लाइसेंस जारी करने और अफीम का खरीद मूल्य 1 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तय करने की मांग की। उन्होंने खाद-बीज, बिजली और मजदूरी की बढ़ती दरों का हवाला दिया। ज्ञापन में डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 और 8/29 से बाहर करने की मांग भी की गई। किसानों का कहना है कि इसमें मॉर्फिन की मात्रा 0.02 प्रतिशत से कम है। उन्होंने कहा कि इससे जेल और अदालतों के चक्कर काट रहे हजारों किसानों को राहत मिलेगी।

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