आज पूरे बिहार में सफाईकर्मियों का निगम मुख्यालय घेराव:पटना में मौर्य लोक में करेंगे प्रदर्शन, मांगें नहीं पूरी होने पर कर रहे आंदोलन

आज पूरे बिहार में सफाईकर्मियों का निगम मुख्यालय घेराव:पटना में मौर्य लोक में करेंगे प्रदर्शन, मांगें नहीं पूरी होने पर कर रहे आंदोलन

पटना नगर निगम सहित पूरे बिहार के सफाई कर्मी आज अपने निगम मुख्यालय का घेराव करेंगे। पूरे बिहार के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत कर्मी अपने-अपने निकाय पर प्रदर्शन करेंगे। सफाईकर्मियों ने 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया है। दरअसल, 6 अगस्त को हड़ताल समाप्त होने के बाद विभाग के मंत्री की ओर से मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। मगर अब 2 महीने बीत गए हैं और अभी तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। इससे सफाई कर्मियों में काफी आक्रोश है। इसलिए फिर से आंदोलन कर रहे हैं। नगर निकाय प्रबंधन से बैठक आयोजित करने की मांग संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार ने कहा कि बिहार लोकल बॉडिज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्थायी, दैनिक पारिश्रमिक, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों की लंबित समस्याओं को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की मांग की है। मोर्चा का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं और पूर्व में लिए गए निर्णयों का समाधान नहीं होने से उनमें असंतोष बढ़ रहा है। मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन तेज होने की आशंका है। मोर्चा ने नगर निकाय प्रबंधन से कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक आयोजित करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जा सकता है और प्रशासन तथा कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय कायम रखा जा सकता है। आठ दिवसीय हड़ताल के फैसलों पर उठाए सवाल मोर्चा ने 30 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक चली आठ दिवसीय हड़ताल का मुद्दा उठाया है। संगठन का आरोप है कि हड़ताल समाप्त कराने के दौरान नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री की उपस्थिति में हुई बैठक में लिए गए निर्णयों और विभागीय निर्देशों का अब तक पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ है। मोर्चा ने हड़ताल अवधि को उपस्थिति मानकर वेतन भुगतान करने, काटी गई राशि वापस करने और आंदोलन के कारण की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। वेतन भुगतान में देरी और PF-ESI पर नाराजगी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में दैनिक और आउटसोर्सिंग कर्मियों को हर महीने समय पर वेतन देना शामिल है। मोर्चा ने वेतन भुगतान में देरी के लिए जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। इसके अलावा, कर्मचारियों के वेतन से काटी गई भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की राशि समय पर संबंधित खातों में जमा कराने की मांग की गई है। संगठन ने बकाया अंशदान की जांच, कर्मचारियों को अद्यतन विवरण उपलब्ध कराने और PF-ESI संबंधी लाभ दिलाने के नाम पर कथित अवैध शुल्क वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने की मांग भी रखी है। अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन के मामले निपटाने की मांग मोर्चा ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए लंबित मामलों की समीक्षा कर पात्र आवेदकों को नियमानुसार नियुक्ति देने की मांग की है। साथ ही निगम कर्मियों के बकाया पेंशन, वेतन और अन्य देय राशि के अंतर का सत्यापन कर भुगतान करने की मांग उठाई गई है। संगठन ने पात्र कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में स्थानीय निकाय के अंशदान को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की कार्रवाई की भी मांग की है। इसके साथ ही दैनिक और संविदा कर्मियों के सेवा अभिलेख तैयार करने तथा उन्हें सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। 11 मांगों में स्थानांतरण नीति भी शामिल मोर्चा ने विभाग की ओर से मांगे गए कर्मचारियों के नाम, पदनाम, कार्यावधि, शैक्षणिक योग्यता और अन्य विवरणों की समेकित सूची उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों से जुड़े नीतिगत और सेवा संबंधी फैसलों में देरी कम होगी। इसके अलावा, मृत और सेवानिवृत्त दैनिक कर्मियों के लंबित PF-ESI दावों का निपटारा करने तथा मृत कर्मियों के पात्र आश्रितों को नियमानुसार लाभ दिलाने की मांग की गई है। संगठन ने तीन साल से अधिक समय से एक ही स्थान या पद पर तैनात कर्मचारियों की समीक्षा करने और लागू सेवा नियमों के अनुसार स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाने की भी मांग की है। साथ ही वार्ड स्तर पर पक्षपात, अनुचित प्रभाव और हितों के टकराव से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने की बात कही है। संवाद नहीं होने से बढ़ रहा असंतोष मोर्चा का कहना है कि वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और सेवा अभिलेख जैसे मुद्दे बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आजीविका और अधिकारों से जुड़े हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि नियमित बैठकें नहीं होने और पुरानी मांगों पर ठोस कार्रवाई के अभाव में कर्मचारियों के सामने आंदोलन का रास्ता चुनने की स्थिति बन रही है। पटना नगर निगम सहित पूरे बिहार के सफाई कर्मी आज अपने निगम मुख्यालय का घेराव करेंगे। पूरे बिहार के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत कर्मी अपने-अपने निकाय पर प्रदर्शन करेंगे। सफाईकर्मियों ने 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया है। दरअसल, 6 अगस्त को हड़ताल समाप्त होने के बाद विभाग के मंत्री की ओर से मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। मगर अब 2 महीने बीत गए हैं और अभी तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। इससे सफाई कर्मियों में काफी आक्रोश है। इसलिए फिर से आंदोलन कर रहे हैं। नगर निकाय प्रबंधन से बैठक आयोजित करने की मांग संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार ने कहा कि बिहार लोकल बॉडिज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्थायी, दैनिक पारिश्रमिक, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों की लंबित समस्याओं को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की मांग की है। मोर्चा का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं और पूर्व में लिए गए निर्णयों का समाधान नहीं होने से उनमें असंतोष बढ़ रहा है। मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन तेज होने की आशंका है। मोर्चा ने नगर निकाय प्रबंधन से कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक आयोजित करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जा सकता है और प्रशासन तथा कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय कायम रखा जा सकता है। आठ दिवसीय हड़ताल के फैसलों पर उठाए सवाल मोर्चा ने 30 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक चली आठ दिवसीय हड़ताल का मुद्दा उठाया है। संगठन का आरोप है कि हड़ताल समाप्त कराने के दौरान नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री की उपस्थिति में हुई बैठक में लिए गए निर्णयों और विभागीय निर्देशों का अब तक पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ है। मोर्चा ने हड़ताल अवधि को उपस्थिति मानकर वेतन भुगतान करने, काटी गई राशि वापस करने और आंदोलन के कारण की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। वेतन भुगतान में देरी और PF-ESI पर नाराजगी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में दैनिक और आउटसोर्सिंग कर्मियों को हर महीने समय पर वेतन देना शामिल है। मोर्चा ने वेतन भुगतान में देरी के लिए जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। इसके अलावा, कर्मचारियों के वेतन से काटी गई भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की राशि समय पर संबंधित खातों में जमा कराने की मांग की गई है। संगठन ने बकाया अंशदान की जांच, कर्मचारियों को अद्यतन विवरण उपलब्ध कराने और PF-ESI संबंधी लाभ दिलाने के नाम पर कथित अवैध शुल्क वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने की मांग भी रखी है। अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन के मामले निपटाने की मांग मोर्चा ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए लंबित मामलों की समीक्षा कर पात्र आवेदकों को नियमानुसार नियुक्ति देने की मांग की है। साथ ही निगम कर्मियों के बकाया पेंशन, वेतन और अन्य देय राशि के अंतर का सत्यापन कर भुगतान करने की मांग उठाई गई है। संगठन ने पात्र कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में स्थानीय निकाय के अंशदान को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की कार्रवाई की भी मांग की है। इसके साथ ही दैनिक और संविदा कर्मियों के सेवा अभिलेख तैयार करने तथा उन्हें सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। 11 मांगों में स्थानांतरण नीति भी शामिल मोर्चा ने विभाग की ओर से मांगे गए कर्मचारियों के नाम, पदनाम, कार्यावधि, शैक्षणिक योग्यता और अन्य विवरणों की समेकित सूची उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों से जुड़े नीतिगत और सेवा संबंधी फैसलों में देरी कम होगी। इसके अलावा, मृत और सेवानिवृत्त दैनिक कर्मियों के लंबित PF-ESI दावों का निपटारा करने तथा मृत कर्मियों के पात्र आश्रितों को नियमानुसार लाभ दिलाने की मांग की गई है। संगठन ने तीन साल से अधिक समय से एक ही स्थान या पद पर तैनात कर्मचारियों की समीक्षा करने और लागू सेवा नियमों के अनुसार स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाने की भी मांग की है। साथ ही वार्ड स्तर पर पक्षपात, अनुचित प्रभाव और हितों के टकराव से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने की बात कही है। संवाद नहीं होने से बढ़ रहा असंतोष मोर्चा का कहना है कि वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और सेवा अभिलेख जैसे मुद्दे बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आजीविका और अधिकारों से जुड़े हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि नियमित बैठकें नहीं होने और पुरानी मांगों पर ठोस कार्रवाई के अभाव में कर्मचारियों के सामने आंदोलन का रास्ता चुनने की स्थिति बन रही है।  

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