क्या JDU में टूट की पटकथा लिखी जा रही है? नीरज कुमार के ललन सिंह पर तल्ख तेवर से इसके संकेत मिल रहे हैं। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में कहानी JDU के अंदर के महाभारत की…। JDU में टूट के 5 बड़े संकेत… 1. जीत के बाद नीरज का ललन सिंह पर सीधा हमला पटना स्नातक सीट से जीत के बाद नीरज कुमार के तेवर तल्ख हैं। संजय झा से मुलाकात के बाद उन्होंने पार्टी के सीनियर लीडर और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पर तंज कसा। 29 अक्टूबर को ललन सिंह से आशीर्वाद लेने के सवाल पर नीरज कुमार ने कहा, ‘सवाल ही पैदा नहीं होता है।’ उन्होंने पूछा कि आखिर इस पूरे चुनावी प्रकरण में मेरा गुनाह क्या था? चुनाव की प्रक्रिया के दौरान इतनी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ा, इसका जवाब मिलना चाहिए। जिन लोगों से बधाई मिलनी चाहिए, वे सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से बधाई दे रहे हैं।’ नीरज कुमार ने ललन सिंह पर तंज कसते हुए कहा, ‘हमारे माता-पिता और पूर्वजों ने यही सीख दी है कि अगर किसी से कर्ज लेना तो उसे लौटा भी देना। राजनीति के कर्ज को हम सूद समेत लौटा देंगे।’ 2. पहले कार्यक्रम और अब पोस्टर-बैनर से हटे ललन सिंह पटना स्नातक से नीरज कुमार की जीत के बाद पार्टी ने 28 अक्टूबर को अपने X हैंडल पर एक पोस्टर जारी किया। पोस्टर में नीरज कुमार को जीत की बधाई दी गई थी। इसमें गठबंधन सहयोगियों की पार्टी प्रमुख के साथ नीतीश कुमार, निशांत कुमार और संजय झा की तस्वीर थी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की तस्वीर नहीं थी। इस पोस्टर को लेकर भी सियासी गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है। दरअसल, यह पहला मौका नहीं है, जब ललन सिंह पार्टी के पोस्टर और कार्यक्रम से बाहर हैं। 19 सितंबर को विधायकों-विधान पार्षदों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में ललन सिंह को नहीं बुलाया गया था। इस पर कार्यक्रम के बीच में ही 24 विधायकों ने विरोध जताया था। साथ ही उनकी अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए थे। 3. ललन सिंह ने नीरज को नहीं, बिना नाम लिए सबको दी बधाई MCL चुनाव के रिजल्ट के बाद ललन सिंह ने नीरज को बधाई नहीं दी। उन्होंने X पर 28 अक्टूबर को एक पोस्ट लिखा, ‘बिहार विधान परिषद चुनाव में जीत दर्ज करने वाले NDA के सभी प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।’ खास बात है कि ललन सिंह ने नीरज कुमार को नाम लेकर बधाई नहीं दी। जबकि, नीरज पार्टी के इकलौते जीते हुए कैंडिडेट थे। ललन सिंह के इस कदम को नीरज से नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने नाम लेकर कभी कोई विरोध नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ललन सिंह मोकामा के विधायक अनंत सिंह को पार्टी से निकालने के पक्ष में नहीं थे। वह दोनों के बीच निजी लड़ाई मानते थे। लेकिन पार्टी के कुछ लोगों ने नीरज-अनंत की लड़ाई को पूरी पार्टी की लड़ाई बना दिया। इससे ललन सिंह नाराज थे। 4. ललन सिंह ने MLC चुनाव से खुद को रखा दूर 23 अक्टूबर को 8 सीटों (4 स्नातक, 4 शिक्षक) पर विधान परिषद चुनाव हुआ। इसमें से JDU 4 सीटों पर चुनाव लड़ी। खास बात है कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने पूरे चुनाव कैंपेन से खुद को दूर रखा। पार्टी ने ना उनसे प्रत्याशियों के चयन में बात की और ना ही प्रचार कराया। उन्होंने पार्टी की प्रचार की रणनीति भी नहीं बनाई। पूरा काम संजय झा और निशांत कुमार की देखरेख में हुआ। सूत्रों के मुताबिक, ललन सिंह की चुप्पी का असर चुनाव के रिजल्ट पर पड़ा। JDU 4 में से सिर्फ एक सीट जीत सकी। पार्टी ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच समझौता कराना का जिम्मा दिया गया था, जिसे ललन सिंह ने इनकार कर दिया। उन्होंने इसे दोनों नेताओं का आपसी झगड़ा बताया। 5. 4 सीट हारने पर संजय झा की रणनीति पर सवाल अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद JDU विधान परिषद की 5 सीटों पर चुनाव लड़ चुकी है। जिसमें से पार्टी को सिर्फ एक सीट पटना स्नातक पर जीत मिली है। 4 सीटों भोजपुर स्थानीय प्राधिकार की सीटिंग सीट उपचुनाव, तिरहुत स्नातक, सारण शिक्षक और दरभंगा शिक्षक में हार चुकी है। यानी पार्टी की स्ट्राइक रेट 20% रही। ललन सिंह पर नीरज कुमार के हमले के बाद पार्टी की इस करारी हार पर कार्यकर्ता सवाल पूछने लगे हैं। पार्टी में धीरे-धीरे असंतोष फैल रहा है। क्यों कहा जा रहा JDU बिखर सकती है… 1. नीतीश कुमार की सक्रियता घटी मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार शारीरिक रूप से सक्रिय दिख रहे हैं, लेकिन वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। वह जहां भी जाते हैं माइक म्यूट मोड में रहता है। ना वह पत्रकारों से बात करते हैं और ना ही उनका ऑडियो जारी होता है। आखिरी बार बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा के पक्ष में नीतीश कुमार का वीडियो संदेश जारी हुआ था। जिसमें वह लड़खड़ाकर वाक्य पूरा करते दिखे थे। पूरे MLC चुनाव में उनको वीडियो संदेश भी नहीं आया। 2. ललन सिंह पर अटैक हुआ तो बढ़ेगी तकरार ललन सिंह का राजनीतिक इतिहास है कि वे सिर्फ तुरंत बयानबाजी में विश्वास नहीं रखते, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने और दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले नेता माने जाते हैं। उनका खुद को ‘होम्योपैथी का डॉक्टर’ कहना इस बात का संकेत है कि वे तात्कालिक प्रतिक्रिया देने के बजाय सही समय का इंतजार करते हैं और अपने विरोधी को संगठनात्मक या राजनीतिक स्तर पर ऐसा नुकसान पहुंचाते हैं, जिसकी भरपाई आसान न हो। JDU के संगठनात्मक ढांचे और राज्य की राजनीति में उनकी छवि एक सख्त और समझौते न करने वाले हार्ड लाइनर रणनीतिकार की रही है। केके लाल कहते हैं, ‘अगर यह वाकयुद्ध बढ़ता है, तो इससे पार्टी के अनुशासन पर सवाल खड़े होंगे। ललन सिंह चुप न बैठकर अगर अपने पत्ते खोलते हैं, तो पार्टी के भीतर शक्ति प्रदर्शन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।’ क्या JDU में टूट की पटकथा लिखी जा रही है? नीरज कुमार के ललन सिंह पर तल्ख तेवर से इसके संकेत मिल रहे हैं। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में कहानी JDU के अंदर के महाभारत की…। JDU में टूट के 5 बड़े संकेत… 1. जीत के बाद नीरज का ललन सिंह पर सीधा हमला पटना स्नातक सीट से जीत के बाद नीरज कुमार के तेवर तल्ख हैं। संजय झा से मुलाकात के बाद उन्होंने पार्टी के सीनियर लीडर और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पर तंज कसा। 29 अक्टूबर को ललन सिंह से आशीर्वाद लेने के सवाल पर नीरज कुमार ने कहा, ‘सवाल ही पैदा नहीं होता है।’ उन्होंने पूछा कि आखिर इस पूरे चुनावी प्रकरण में मेरा गुनाह क्या था? चुनाव की प्रक्रिया के दौरान इतनी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ा, इसका जवाब मिलना चाहिए। जिन लोगों से बधाई मिलनी चाहिए, वे सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से बधाई दे रहे हैं।’ नीरज कुमार ने ललन सिंह पर तंज कसते हुए कहा, ‘हमारे माता-पिता और पूर्वजों ने यही सीख दी है कि अगर किसी से कर्ज लेना तो उसे लौटा भी देना। राजनीति के कर्ज को हम सूद समेत लौटा देंगे।’ 2. पहले कार्यक्रम और अब पोस्टर-बैनर से हटे ललन सिंह पटना स्नातक से नीरज कुमार की जीत के बाद पार्टी ने 28 अक्टूबर को अपने X हैंडल पर एक पोस्टर जारी किया। पोस्टर में नीरज कुमार को जीत की बधाई दी गई थी। इसमें गठबंधन सहयोगियों की पार्टी प्रमुख के साथ नीतीश कुमार, निशांत कुमार और संजय झा की तस्वीर थी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की तस्वीर नहीं थी। इस पोस्टर को लेकर भी सियासी गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है। दरअसल, यह पहला मौका नहीं है, जब ललन सिंह पार्टी के पोस्टर और कार्यक्रम से बाहर हैं। 19 सितंबर को विधायकों-विधान पार्षदों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में ललन सिंह को नहीं बुलाया गया था। इस पर कार्यक्रम के बीच में ही 24 विधायकों ने विरोध जताया था। साथ ही उनकी अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए थे। 3. ललन सिंह ने नीरज को नहीं, बिना नाम लिए सबको दी बधाई MCL चुनाव के रिजल्ट के बाद ललन सिंह ने नीरज को बधाई नहीं दी। उन्होंने X पर 28 अक्टूबर को एक पोस्ट लिखा, ‘बिहार विधान परिषद चुनाव में जीत दर्ज करने वाले NDA के सभी प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।’ खास बात है कि ललन सिंह ने नीरज कुमार को नाम लेकर बधाई नहीं दी। जबकि, नीरज पार्टी के इकलौते जीते हुए कैंडिडेट थे। ललन सिंह के इस कदम को नीरज से नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने नाम लेकर कभी कोई विरोध नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ललन सिंह मोकामा के विधायक अनंत सिंह को पार्टी से निकालने के पक्ष में नहीं थे। वह दोनों के बीच निजी लड़ाई मानते थे। लेकिन पार्टी के कुछ लोगों ने नीरज-अनंत की लड़ाई को पूरी पार्टी की लड़ाई बना दिया। इससे ललन सिंह नाराज थे। 4. ललन सिंह ने MLC चुनाव से खुद को रखा दूर 23 अक्टूबर को 8 सीटों (4 स्नातक, 4 शिक्षक) पर विधान परिषद चुनाव हुआ। इसमें से JDU 4 सीटों पर चुनाव लड़ी। खास बात है कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने पूरे चुनाव कैंपेन से खुद को दूर रखा। पार्टी ने ना उनसे प्रत्याशियों के चयन में बात की और ना ही प्रचार कराया। उन्होंने पार्टी की प्रचार की रणनीति भी नहीं बनाई। पूरा काम संजय झा और निशांत कुमार की देखरेख में हुआ। सूत्रों के मुताबिक, ललन सिंह की चुप्पी का असर चुनाव के रिजल्ट पर पड़ा। JDU 4 में से सिर्फ एक सीट जीत सकी। पार्टी ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच समझौता कराना का जिम्मा दिया गया था, जिसे ललन सिंह ने इनकार कर दिया। उन्होंने इसे दोनों नेताओं का आपसी झगड़ा बताया। 5. 4 सीट हारने पर संजय झा की रणनीति पर सवाल अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद JDU विधान परिषद की 5 सीटों पर चुनाव लड़ चुकी है। जिसमें से पार्टी को सिर्फ एक सीट पटना स्नातक पर जीत मिली है। 4 सीटों भोजपुर स्थानीय प्राधिकार की सीटिंग सीट उपचुनाव, तिरहुत स्नातक, सारण शिक्षक और दरभंगा शिक्षक में हार चुकी है। यानी पार्टी की स्ट्राइक रेट 20% रही। ललन सिंह पर नीरज कुमार के हमले के बाद पार्टी की इस करारी हार पर कार्यकर्ता सवाल पूछने लगे हैं। पार्टी में धीरे-धीरे असंतोष फैल रहा है। क्यों कहा जा रहा JDU बिखर सकती है… 1. नीतीश कुमार की सक्रियता घटी मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार शारीरिक रूप से सक्रिय दिख रहे हैं, लेकिन वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। वह जहां भी जाते हैं माइक म्यूट मोड में रहता है। ना वह पत्रकारों से बात करते हैं और ना ही उनका ऑडियो जारी होता है। आखिरी बार बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा के पक्ष में नीतीश कुमार का वीडियो संदेश जारी हुआ था। जिसमें वह लड़खड़ाकर वाक्य पूरा करते दिखे थे। पूरे MLC चुनाव में उनको वीडियो संदेश भी नहीं आया। 2. ललन सिंह पर अटैक हुआ तो बढ़ेगी तकरार ललन सिंह का राजनीतिक इतिहास है कि वे सिर्फ तुरंत बयानबाजी में विश्वास नहीं रखते, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने और दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले नेता माने जाते हैं। उनका खुद को ‘होम्योपैथी का डॉक्टर’ कहना इस बात का संकेत है कि वे तात्कालिक प्रतिक्रिया देने के बजाय सही समय का इंतजार करते हैं और अपने विरोधी को संगठनात्मक या राजनीतिक स्तर पर ऐसा नुकसान पहुंचाते हैं, जिसकी भरपाई आसान न हो। JDU के संगठनात्मक ढांचे और राज्य की राजनीति में उनकी छवि एक सख्त और समझौते न करने वाले हार्ड लाइनर रणनीतिकार की रही है। केके लाल कहते हैं, ‘अगर यह वाकयुद्ध बढ़ता है, तो इससे पार्टी के अनुशासन पर सवाल खड़े होंगे। ललन सिंह चुप न बैठकर अगर अपने पत्ते खोलते हैं, तो पार्टी के भीतर शक्ति प्रदर्शन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।’

