नारी से दूरी की बात…कन्या पूजन का ढोंग क्यों?:धीरेंद्र शास्त्री के ‘नारी घातक’ वाले बयान पर भड़कीं हर्षानंद; बोलीं- ऐसी भाषा शोभा नहीं देती

नारी से दूरी की बात…कन्या पूजन का ढोंग क्यों?:धीरेंद्र शास्त्री के ‘नारी घातक’ वाले बयान पर भड़कीं हर्षानंद; बोलीं- ऐसी भाषा शोभा नहीं देती

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के करवाचौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ बताने और नारी को लेकर दिए बयान पर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि एक संत को व्यासपीठ पर बैठकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता। नारी से दूरी बनाने की बात करते हैं तो कन्या पूजन का ढोंग क्यों करते हैं? दरअसल, बुधवार को दतिया में पीतांबरा पीठ के दर्शन के बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवाओं को संदेश देते हुए नारी को घातक बताया था। उन्होंने कहा था कि गति जरूरी है, लेकिन उसके साथ प्रगति भी आवश्यक है। तुम्हारे फ्यूचर के लिए नशा, नींद और नारी सबसे घातक हैं। इसके अलावा शिवपुरी के करैरा में उन्होंने करवाचौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ बताया था। इन बयानों के सामने आने के बाद हर्षा रिछारिया ने वीडियो जारी कर धीरेंद्र शास्त्री पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर नारी इतनी घातक है तो आप कन्या पूजन बंद कर दीजिए और कन्याओं की शादी मत कराइए। करवाचौथ को लेकर भी धीरेंद्र शास्त्री ने इतने निम्न स्तर के शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें वह दोहराना भी नहीं चाहतीं। हर्षा बोलीं- व्यासपीठ पर बैठकर ऐसी भाषा शोभा नहीं देती वीडियो जारी कर हर्षानंद गिरि ने कहा कि एक संत और कथावाचक ने व्यासपीठ पर बैठकर इतने निम्न स्तर के शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें वह बोलना भी नहीं चाहतीं। एक संत को कथावाचक की गद्दी पर बैठकर इस तरह की भाषा का उपयोग करना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि मंच से ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिससे किसी की धार्मिक आस्था और भावनाएं आहत हों। किसी की आस्था और व्रत का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। हर्षा ने करवाचौथ का जिक्र करते हुए कहा कि कोई महिला अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती है, तो इसमें बुराई क्या है? घर की महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए पूजा-पाठ और रीति-रिवाजों का पालन करती हैं। ऐसे में किसी पवित्र व्रत को लेकर निम्न स्तर की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। नशा और नारी को एक स्तर पर रखते हैं तो कन्या पूजन का ढोंग क्यों? हर्षा रिछारिया ने धीरेंद्र शास्त्री के नशा, नींद और नारी वाले बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नशे और नारी को एक ही स्तर पर रखना महिलाओं के प्रति गलत संदेश देता है। हर्षा ने सवाल किया कि यदि नारी से दूरी बनाने की बात कही जाती है, तो देवी आराधना और कन्या पूजन का क्या औचित्य है? अगर नारी में इतनी बुराई है तो कन्या पूजन का ढोंग क्यों? नारी से दूरी की बात करते हैं तो देवी आराधना और कन्या पूजन क्यों करते हैं? उन्होंने कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग धीरेंद्र शास्त्री को सुनता और मानता है। ऐसे में उनके बयानों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए उन्हें सार्वजनिक मंचों से बोलते समय शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

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