मुंगेर। जिला स्कूल सभागार में गुरुवार को जिला स्तरीय कला उत्सव 2026 का आयोजन किया गया। बिहार शिक्षा परियोजना, मुंगेर की ओर से आयोजित इस उत्सव में जिले के 43 सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। बच्चों ने लोकगीत, लोकनृत्य, नाटक, वादन, पेंटिंग, क्राफ्ट, मिट्टी कला, एकल नृत्य और समूह नृत्य सहित विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शहरी और ग्रामीण विद्यालयों के बच्चों ने हिस्सा लिया झिझिया नृत्य और छठ महापर्व की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम देर शाम तक जारी रहने के कारण प्रतियोगिता का अंतिम परिणाम शुक्रवार को जारी किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी हुलास राम ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर राम लखन सिंह यादव उच्च विद्यालय, महुली के मनोज कुमार ने मुख्य अतिथि को पौधा और शॉल भेंटकर सम्मानित किया। जिला स्कूल, टाउन स्कूल, मॉडल स्कूल, राम लखन सिंह उच्च विद्यालय, बैद्यनाथ गर्ल्स स्कूल और उपेंद्र ट्रेनिंग उच्च विद्यालय सहित शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के बच्चों ने हिस्सा लिया। छठ महापर्व की प्रस्तुति पर गूंजती रही तालियां कला उत्सव में उच्च विद्यालय संदलपुर की छात्राओं ने छठ महापर्व की परंपरा को गीत-संगीत के माध्यम से जीवंत किया। छात्राओं ने खरना से लेकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक की परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत किया। व्रतियों की आस्था, छठ की तैयारी और पर्व के दौरान श्रद्धालुओं के उत्साह को देखकर सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं और निर्णायकों ने तालियां बजाकर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। सांस्कृतिक विरासत की झलक वहीं, झिझिया नृत्य के जरिए बच्चों ने बिहार की लोकसंस्कृति की झलक दिखाई। विभिन्न विद्यालयों के प्रतिभागियों ने नाटक, लोकगीत, संगीत और समूह नृत्य के माध्यम से अपनी कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। मंच पर बच्चों की प्रस्तुतियों में बिहार की परंपरा, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। चयनित बच्चे पटना में दिखाएंगे हुनर सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी हुलास राम ने कहा कि कला उत्सव का उद्देश्य स्कूली बच्चों की प्रतिभा को निखारना और उन्हें अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर देना है। जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को पटना में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिलेगा। निर्णायक श्रत्रुघण आर्या और संगीत शिक्षक अनुमेह मिश्रा ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की पहल पर वर्ष 2015 से कला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने आगे बढ़ रहे इसका उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनकी कलात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है। इस बार जिले के सभी प्रखंडों के बच्चों ने 12 विधाओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा दिखाई। विद्यालयों में नियुक्त संगीत शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चे अपनी कला को निखार रहे हैं और जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, निर्णायक शिक्षिका सुप्रिया कुमारी ने कहा कि कला उत्सव बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े मंच पर पहचान बनाने का अवसर देता है। उन्होंने छात्राओं को कला एवं खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को भी प्रोत्साहन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। मुंगेर। जिला स्कूल सभागार में गुरुवार को जिला स्तरीय कला उत्सव 2026 का आयोजन किया गया। बिहार शिक्षा परियोजना, मुंगेर की ओर से आयोजित इस उत्सव में जिले के 43 सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। बच्चों ने लोकगीत, लोकनृत्य, नाटक, वादन, पेंटिंग, क्राफ्ट, मिट्टी कला, एकल नृत्य और समूह नृत्य सहित विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शहरी और ग्रामीण विद्यालयों के बच्चों ने हिस्सा लिया झिझिया नृत्य और छठ महापर्व की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम देर शाम तक जारी रहने के कारण प्रतियोगिता का अंतिम परिणाम शुक्रवार को जारी किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी हुलास राम ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर राम लखन सिंह यादव उच्च विद्यालय, महुली के मनोज कुमार ने मुख्य अतिथि को पौधा और शॉल भेंटकर सम्मानित किया। जिला स्कूल, टाउन स्कूल, मॉडल स्कूल, राम लखन सिंह उच्च विद्यालय, बैद्यनाथ गर्ल्स स्कूल और उपेंद्र ट्रेनिंग उच्च विद्यालय सहित शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के बच्चों ने हिस्सा लिया। छठ महापर्व की प्रस्तुति पर गूंजती रही तालियां कला उत्सव में उच्च विद्यालय संदलपुर की छात्राओं ने छठ महापर्व की परंपरा को गीत-संगीत के माध्यम से जीवंत किया। छात्राओं ने खरना से लेकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक की परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत किया। व्रतियों की आस्था, छठ की तैयारी और पर्व के दौरान श्रद्धालुओं के उत्साह को देखकर सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं और निर्णायकों ने तालियां बजाकर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। सांस्कृतिक विरासत की झलक वहीं, झिझिया नृत्य के जरिए बच्चों ने बिहार की लोकसंस्कृति की झलक दिखाई। विभिन्न विद्यालयों के प्रतिभागियों ने नाटक, लोकगीत, संगीत और समूह नृत्य के माध्यम से अपनी कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। मंच पर बच्चों की प्रस्तुतियों में बिहार की परंपरा, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। चयनित बच्चे पटना में दिखाएंगे हुनर सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी हुलास राम ने कहा कि कला उत्सव का उद्देश्य स्कूली बच्चों की प्रतिभा को निखारना और उन्हें अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर देना है। जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को पटना में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिलेगा। निर्णायक श्रत्रुघण आर्या और संगीत शिक्षक अनुमेह मिश्रा ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की पहल पर वर्ष 2015 से कला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने आगे बढ़ रहे इसका उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनकी कलात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है। इस बार जिले के सभी प्रखंडों के बच्चों ने 12 विधाओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा दिखाई। विद्यालयों में नियुक्त संगीत शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चे अपनी कला को निखार रहे हैं और जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, निर्णायक शिक्षिका सुप्रिया कुमारी ने कहा कि कला उत्सव बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े मंच पर पहचान बनाने का अवसर देता है। उन्होंने छात्राओं को कला एवं खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को भी प्रोत्साहन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

