मेरठ में अवैध निर्माण की जांच के लिए पहुंची न्यायिक आयोग की टीम को देखकर अफसरों के हाथ पांव फूल गए। जिले में धड़ल्ले से जो अवैध निर्माण हुए हैं, कहीं उसमें अफसरों की मिलीभगत सामने न आ जाए इसकी घबराहट अधिकारियों के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी। एक सेकेंड भी कमिश्नर, डीएम और एमडीए वीसी, सचिव ने न्यायिक आयोग की टीम को अकेला नहीं छोड़ा। उसके चारों तरफ अफसर घेरा बनाए चलते रहे।
सर्किट हाउस से लेकर उल्देपुर में मीडिया को कवरेज के लिए बार-बार रोका जाता रहा। खुद प्रशासनिक अफसरों ने मीडिया को रोकने का निर्देश दिया। अफसरों की घबराहट का यही नजारा उल्देपुर में देखने मिला। जैसे ही आयोग की टीम उल्देपुर पहुंची तो वहां अफसरों ने पुलिस का घेरा बना दिया। उल्देपुर में जो आमआदमी बिल्डर से मकान लेकर फंस गया है जब वो अपनी परेशानी कहने आगे बढ़ रहे थे उससे पहले ही पुलिसकर्मियों से उनको दूर रुकवा दिया गया। डीएम, मेडा वीसी का पूरा ख्याल इस पर था कि कहीं कोई कालोनीवासी आकर न्यायिक आयोग के सामने अपनी पीड़ा बयां न कर दे। इससे कहीं कुछ और सच सामने आ जाए। मेरठ जिले में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग गुरुवार को मेरठ पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित सात सदस्यीय आयोग ने उल्देपुर में करीब 25 मिनट तक निरीक्षण किया। इससे पहले आयोग ने सर्किट हाउस में लगभग 45 मिनट तक अधिकारियों के साथ वार्ता की। इस तरह आयोग ने करीब 70 मिनट का समय मेरठ में बिताया। इस दौरान स्थानीय लोगों और प्रकरण से जुड़े पीड़ितों के एकत्र होने के बावजूद आयोग के सदस्यों ने उनसे मुलाकात नहीं की। इसके साथ ही वार्ता के बाद जब टीम सर्किट हाउस से बाहर निकली तो मीडियो को भी जिला प्रशासन द्वारा वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया गया। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार यह बात कही जाती है कि अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह सभी कॉलोनी विकसीत हुई हैं। ऐसे में आज न्यायिक आयोग के आने पर अधिकारियों में इस बात का डर साफ तौर पर देखा गया कि कोई व्यक्ति वहां इस बात को न बोल दे। इसके कारण लोगों को सुधांशू धूलिया के आसपास भी नहीं आने दिया। अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल उनके आसपास रहा जो लगातार लोगों को पीछे रखने के काम में लगा रहा। पीड़ितों को नहीं मिला पक्ष रखने का मौका आयोग के सुधांशु धूलिया की उल्देपुर पहुंचने की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोग और इस प्रकरण से जुड़े पीड़ित भी मौके पर एकत्र हो गए। लोगों को उम्मीद थी कि वे आयोग के सामने अपनी समस्याएं और पक्ष रख सकेंगे। हालांकि, निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ऐसी व्यवस्था बनाए रखी कि स्थानीय लोग आयोग के सदस्यों के करीब नहीं पहुंच सके। न ही आयोग के सदस्यों की उनसे कोई बातचीत हो सकी। सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माणों और अवैध कॉलोनियों के मामले का संज्ञान लेते हुए 21 सितंबर 2026 को न्यायिक आयोग के गठन का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय आयोग को जिले में अवैध निर्माणों और कॉलोनियों की स्थिति की जांच करनी है। उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों की जांच आयोग के निरीक्षण के केंद्र में उल्देपुर क्षेत्र रहा। यहां पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर बड़ी अवैध कॉलोनियां विकसित होने की बात कही जा रही है। आयोग ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान टीम के सदस्यों ने निरीक्षण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को नोट किया। अब आयोग की जांच में जिले में अवैध निर्माणों की स्थिति, अवैध कॉलोनियों के विकास और संबंधित मामलों के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित इस आयोग की जांच को मेरठ में अवैध निर्माणों के मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

