दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज की है। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को 1111 मतों से हराया। सुरेश प्रसाद राय मूल रूप से बेगूसराय के रहने वाले हैं। एक सामान्य शिक्षक से बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष तक का सफर तय कर चुके सुरेश प्रसाद राय 14 वर्षों तक भाजपा से जुड़े रहे। 2014 और 2020 के चुनाव में उन्होंने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवारी दी थी, लेकिन सफल नहीं रहे हुए। इस बार यह सीट गठबंधन के तहत जदयू के पास चली गई। जिसके बाद सितंबर महीने में जन सुराज में शामिल हो गए। प्रशांत किशोर ने संभाला मोर्चा जन सुराज ने उन्हें दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया। पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चारों जिले मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और बेगूसराय में लगातार संवाद किया। निजी तौर पर भी लोगों से मिलते रहे। जिसका प्रतिफल है कि लगातार दो बार से एमएलसी रहे कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा को 1111 वोट से हराकर सुरेश प्रसाद राय ने अपनी जीत दर्ज की है। 5 जनवरी 1959 को सुरेश प्रसाद राय का जन्म समस्तीपुर जिले में हुआ। उन्होंने अपना शैक्षणिक-कार्य क्षेत्र बेगूसराय को चुना और यहीं के होकर रह गए। उन्होंने अपनी प्रारंभिक से लेकर मैट्रिक तक की शिक्षा बीपी स्कूल से पूरी की। इसके बाद बीएससी और एमएससी जीडी कॉलेज से किया, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की। 2011 में VRS लिया 7 जून 1979 को बेगूसराय के ही मोहनपुर की रहने वाली विभा कुमारी से शादी की। जिला मुख्यालय के सुहृद नगर में 1981 में उन्होंने सुहृद बाल शिक्षा मंदिर की स्थापना की और लगातार शिक्षा एवं शिक्षकों के शिक्षा के उत्थान में लग रहे। 31 जनवरी 1984 से हाई स्कूल में विज्ञान शिक्षक के रूप में उन्होंने सरकारी सेवा शुरू की। फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहे। इसी का परिणाम था कि राज्य स्तर पर विज्ञान विषय में उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शिक्षक रहते हुए उनके हित में काम नहीं किया जा सकता है, इसलि 30 अप्रैल 2011 को VRS ले ली और शिक्षक राजनीति में जुट गए। दो बेटी और एक बेटे के पिता सुरेश प्रसाद राय बेगूसराय के चर्चित MRJD कॉलेज के शासी निकाय अध्यक्ष पद का निर्वहन किया। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने फ्रंटलाइन की शिक्षा की राजनीति करनी शुरू की। इसके लिए दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन सफल नहीं हो सके थे। इसके बाद तीसरी टर्म में भी उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। जिसका परिणाम है कि दो बार से एमएलसी रहे डॉ. मदन मोहन झा को 1111 वोट से हराया है। काफी समय बाग बेगूसराय की झोली में आई सीट दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की यह सीट लंबे संघर्ष के बाद बेगूसराय के हिस्से में आई है। बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष और महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह इस सीट से दो बार विधान पार्षद रह चुके हैं। वहीं, राजनीतिक फकीर के नाम से चर्चित वासुदेव प्रसाद सिंह भी इस सीट से शिक्षकों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ‘शिक्षकों ने मुझ पर भरोसा जताया है’ दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा है कि यह शिक्षकों के समर्पण और समय की जीत है। मैं लगातार बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के माध्यम से शिक्षक एवं कर्मचारियों के हित की बात कर रख रहा हूं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षक एवं कर्मचारियों की सेवा में लीन रहता हूं। उसी से प्रतिफल के रूप में अपने स्नेह और समर्पण में मत रुपी आशीर्वाद शिक्षकों ने हमें दिया है। हर प्रकार से मेहनत कर सफलता दिलाई है। सबसे प्रमुख मामला माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को सातवां वेतन आयोग की प्राप्ति है। वित्त रहित संस्थाओं के शिक्षक एवं कर्मचारियों का मुख्य एजेंडा अनुदान के बदले वेतनमान की प्राप्ति है। संघर्ष सत्ता के साथ संभव नहीं हो सकता है। मैं शिक्षक प्रतिनिधि हूं, हमेशा भरपूर प्रयास किया कि शिक्षकों के मान सम्मान की रक्षा करुं। उनके संवैधानिक अधिकारों को दिलाने का प्रयास किया। नियोजित शिक्षकों को सरकार ने राज्यकर्मी बनाया। दूसरी ओर 40 वर्षों से वित्तरहित संस्थानों को सिर्फ लॉलीपॉप दिखाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं वेतनमान दूंगा तो लोगों ने पटना पहुंचकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। लेकिन उसके बाद बिहार कैबिनेट की दो बैठक हुई। उसी में बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। मैं चाहता हूं कि राष्ट्रकवि दिनकर के जनपद में परंपरागत विश्वविद्यालय की स्थापना हो। सरकार सोच रही थी कि महाविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त कर दिया जाए। वित्तरहित कर्मियों को दिलासा देकर उन्हें न्याय नहीं मिला। इन सभी मुद्दों में विधान परिषद में मजबूती के साथ उठाऊंगा। ‘सदन में मजबूती से शिक्षकों के मुद्दे को उठाऊंगा’ सुरेश राय ने आगे कहा कि शिक्षा के कल्याण में मेरे स्तर से जो भी संभव होगा, मैं वह सब करूंगा। अध्यापकों की नियुक्ति अध्यापन के लिए होती है, अध्यापक की नियुक्ति विभिन्न कार्यालय काम करने के लिए नहीं होती है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित सभी प्रशासनिक महकमा को सबसे सॉफ्ट कॉर्नर शिक्षक ही दिखाई देते हैं। उन्हें विद्यालय से अलग हटाकर लगा दिया जाता है। इसलिए शिक्षकों को चुनाव, आपदा और जनगणना छोड़कर अन्य कार्यों से मुक्त करने के लिए मैं सरकार पर दबाव बनाऊंगा। गैर शैक्षणिक कार्य में लगाए जाने के मुद्दे के साथ ही वित्तरहित संस्थानों के मुद्दे को मजबूती के साथ सदन में उठाऊंगा। ‘महाविद्यालय कई पद रिक्त पड़े हैं’ नवनिर्वाचित एमएलसी सुरेश राय ने कहा कि शिक्षकों को निरंतरता का लाभ दिलाना है। एक तो पदोन्नति और दूसरा विततीय उन्नयन, लेकिन इन दोनों में से कोई लाभ शिक्षकों को नहीं मिला है। शिक्षा मंत्री और विभाग का ध्यान इस दिशा में आकृष्ट करता रहूंगा। मैं सदन में जाने लायक नहीं था, इसलिए मैं सड़क पर संघर्ष करता था, मैं अधिकारियों और मंत्रियों से अनुरोध करता था। अब मजबूती के साथ सदन में इन सभी मुद्दों को उठाऊंगा। वेतन संरक्षण, वेतन वृद्धि और पत्र निर्गत होने के बाद भी निरंतरता का लाभ नहीं देने के मुद्दे को मैं बिहार के सभी शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ रणनीति बनाकर सदन में रखूंगा और उसका समाधान करूंगा। केवल मदरसा ही नहीं, संस्कृत शिक्षकों को सातवां वेतन दिया जा रहा है। लेकिन महंगाई भत्ता और भविष्य निधि का लाभ नहीं दिया जा रहा है। आखिर उन्हें महंगाई भत्ता और क्यों नहीं दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारी, मंत्री और सरकार के साथ इन वाली बातों के लिए संघर्ष करूंगा। बिहार सरकार के सामने शिक्षा प्राथमिकता की सूची में ऊपर नहीं है। जितने भी विकसित राष्ट्र और राज्य हैं, उनके प्राथमिकता में सबसे ऊपर शिक्षा रहता है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश और राज्य में शिक्षा प्राथमिकता में ऊपर नहीं है। महाविद्यालय शिक्षकों के पद भरे गए हैं, कुछ विज्ञापन जारी हुए, लेकिन अभी भी ढेर सारे पद रिक्त हैं। सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अमली जामा पहनाने की बात करती है। लेकिन ‘टीचर किसी दल से जुड़े नहीं होते’ भास्कर से बातचीत में सुरेश राय ने कहा कि महाविद्यालय में केवल नामांकन होता है, फॉर्म भरा जाता है, परीक्षाएं होती है। हमारी कोशिश की जितनी भी शैक्षणिक अवधि है, इतने दिनों तक हमारे बच्चों को सही तरीके से शिक्षा मिले। सस्ती लोकप्रियता लूटने के नाम पर सरकार राजकीय डिग्री कॉलेज खोल रही है, जहां केवल 6 विषयों की पढ़ाई की व्यवस्था है। हमारी कोशिश होगी कि सभी प्रखंड में जहां भी वित्तरहित कॉलेज में भूमि और भवन है, वहां आधारभूत संरचना को मजबूत कर शिक्षक-कर्मचारियों को सेवा को नियमित कराएं। सेवा में रहने वाले शिक्षक किसी दल से जुड़े हुए नहीं होते हैं। सेवा से बाहर वाले की निष्ठा होती है। आज संपूर्ण शिक्षक समाज अपने आप को अपमानित और उपेक्षित महसूस कर रहा है। जन सुराज ने अपने एजेंडे में शिक्षा को उच्च प्राथमिकता में रखा है। इसलिए शिक्षकों का आकर्षण उस ओर बढ़ रहा है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार में बदलाव की जो परिकल्पना की है, एक नई व्यवस्था बनाने की जो अभिलाषा है, उसमें शिक्षकों का बहुत बड़ा समर्थन में उनके साथ खड़ा मिलेगा। ‘आभार जताने शिक्षकों के बीच जाऊंगा’ सुरेश राय ने कहा कि हमारी सबसे पहली प्राथमिकता होगी कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चारों जिलों में हमारा कार्यालय संचालित होगा। जहां की प्रतिनिधि रहेंगे, शिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पटना जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनकी स्थानीय समस्या का समाधान किया जाएगा। जिस समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर संभव नहीं होगा, उसका मैं राज्य स्तर समाधान कराऊंगा। जैसे मैं वोट मांगने के लिए सभी शिक्षकों के पास गया, उस तरह अब आभार प्रकट करने के लिए सभी शिक्षक भाई-बहनों के बीच जाऊंगा, कृतज्ञता ज्ञापित करूंगा। जैसे हमारे नेता प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से चुनाव जीतने के बाद अपने सरकारी आवास को जन सेवा केंद्र बनाया है। उसी तरह से हम भी अपने सरकारी आवास को सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करुंगा। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज की है। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को 1111 मतों से हराया। सुरेश प्रसाद राय मूल रूप से बेगूसराय के रहने वाले हैं। एक सामान्य शिक्षक से बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष तक का सफर तय कर चुके सुरेश प्रसाद राय 14 वर्षों तक भाजपा से जुड़े रहे। 2014 और 2020 के चुनाव में उन्होंने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवारी दी थी, लेकिन सफल नहीं रहे हुए। इस बार यह सीट गठबंधन के तहत जदयू के पास चली गई। जिसके बाद सितंबर महीने में जन सुराज में शामिल हो गए। प्रशांत किशोर ने संभाला मोर्चा जन सुराज ने उन्हें दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया। पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चारों जिले मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और बेगूसराय में लगातार संवाद किया। निजी तौर पर भी लोगों से मिलते रहे। जिसका प्रतिफल है कि लगातार दो बार से एमएलसी रहे कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा को 1111 वोट से हराकर सुरेश प्रसाद राय ने अपनी जीत दर्ज की है। 5 जनवरी 1959 को सुरेश प्रसाद राय का जन्म समस्तीपुर जिले में हुआ। उन्होंने अपना शैक्षणिक-कार्य क्षेत्र बेगूसराय को चुना और यहीं के होकर रह गए। उन्होंने अपनी प्रारंभिक से लेकर मैट्रिक तक की शिक्षा बीपी स्कूल से पूरी की। इसके बाद बीएससी और एमएससी जीडी कॉलेज से किया, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की। 2011 में VRS लिया 7 जून 1979 को बेगूसराय के ही मोहनपुर की रहने वाली विभा कुमारी से शादी की। जिला मुख्यालय के सुहृद नगर में 1981 में उन्होंने सुहृद बाल शिक्षा मंदिर की स्थापना की और लगातार शिक्षा एवं शिक्षकों के शिक्षा के उत्थान में लग रहे। 31 जनवरी 1984 से हाई स्कूल में विज्ञान शिक्षक के रूप में उन्होंने सरकारी सेवा शुरू की। फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहे। इसी का परिणाम था कि राज्य स्तर पर विज्ञान विषय में उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शिक्षक रहते हुए उनके हित में काम नहीं किया जा सकता है, इसलि 30 अप्रैल 2011 को VRS ले ली और शिक्षक राजनीति में जुट गए। दो बेटी और एक बेटे के पिता सुरेश प्रसाद राय बेगूसराय के चर्चित MRJD कॉलेज के शासी निकाय अध्यक्ष पद का निर्वहन किया। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने फ्रंटलाइन की शिक्षा की राजनीति करनी शुरू की। इसके लिए दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन सफल नहीं हो सके थे। इसके बाद तीसरी टर्म में भी उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। जिसका परिणाम है कि दो बार से एमएलसी रहे डॉ. मदन मोहन झा को 1111 वोट से हराया है। काफी समय बाग बेगूसराय की झोली में आई सीट दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की यह सीट लंबे संघर्ष के बाद बेगूसराय के हिस्से में आई है। बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष और महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह इस सीट से दो बार विधान पार्षद रह चुके हैं। वहीं, राजनीतिक फकीर के नाम से चर्चित वासुदेव प्रसाद सिंह भी इस सीट से शिक्षकों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ‘शिक्षकों ने मुझ पर भरोसा जताया है’ दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा है कि यह शिक्षकों के समर्पण और समय की जीत है। मैं लगातार बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के माध्यम से शिक्षक एवं कर्मचारियों के हित की बात कर रख रहा हूं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षक एवं कर्मचारियों की सेवा में लीन रहता हूं। उसी से प्रतिफल के रूप में अपने स्नेह और समर्पण में मत रुपी आशीर्वाद शिक्षकों ने हमें दिया है। हर प्रकार से मेहनत कर सफलता दिलाई है। सबसे प्रमुख मामला माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को सातवां वेतन आयोग की प्राप्ति है। वित्त रहित संस्थाओं के शिक्षक एवं कर्मचारियों का मुख्य एजेंडा अनुदान के बदले वेतनमान की प्राप्ति है। संघर्ष सत्ता के साथ संभव नहीं हो सकता है। मैं शिक्षक प्रतिनिधि हूं, हमेशा भरपूर प्रयास किया कि शिक्षकों के मान सम्मान की रक्षा करुं। उनके संवैधानिक अधिकारों को दिलाने का प्रयास किया। नियोजित शिक्षकों को सरकार ने राज्यकर्मी बनाया। दूसरी ओर 40 वर्षों से वित्तरहित संस्थानों को सिर्फ लॉलीपॉप दिखाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं वेतनमान दूंगा तो लोगों ने पटना पहुंचकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। लेकिन उसके बाद बिहार कैबिनेट की दो बैठक हुई। उसी में बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। मैं चाहता हूं कि राष्ट्रकवि दिनकर के जनपद में परंपरागत विश्वविद्यालय की स्थापना हो। सरकार सोच रही थी कि महाविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त कर दिया जाए। वित्तरहित कर्मियों को दिलासा देकर उन्हें न्याय नहीं मिला। इन सभी मुद्दों में विधान परिषद में मजबूती के साथ उठाऊंगा। ‘सदन में मजबूती से शिक्षकों के मुद्दे को उठाऊंगा’ सुरेश राय ने आगे कहा कि शिक्षा के कल्याण में मेरे स्तर से जो भी संभव होगा, मैं वह सब करूंगा। अध्यापकों की नियुक्ति अध्यापन के लिए होती है, अध्यापक की नियुक्ति विभिन्न कार्यालय काम करने के लिए नहीं होती है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित सभी प्रशासनिक महकमा को सबसे सॉफ्ट कॉर्नर शिक्षक ही दिखाई देते हैं। उन्हें विद्यालय से अलग हटाकर लगा दिया जाता है। इसलिए शिक्षकों को चुनाव, आपदा और जनगणना छोड़कर अन्य कार्यों से मुक्त करने के लिए मैं सरकार पर दबाव बनाऊंगा। गैर शैक्षणिक कार्य में लगाए जाने के मुद्दे के साथ ही वित्तरहित संस्थानों के मुद्दे को मजबूती के साथ सदन में उठाऊंगा। ‘महाविद्यालय कई पद रिक्त पड़े हैं’ नवनिर्वाचित एमएलसी सुरेश राय ने कहा कि शिक्षकों को निरंतरता का लाभ दिलाना है। एक तो पदोन्नति और दूसरा विततीय उन्नयन, लेकिन इन दोनों में से कोई लाभ शिक्षकों को नहीं मिला है। शिक्षा मंत्री और विभाग का ध्यान इस दिशा में आकृष्ट करता रहूंगा। मैं सदन में जाने लायक नहीं था, इसलिए मैं सड़क पर संघर्ष करता था, मैं अधिकारियों और मंत्रियों से अनुरोध करता था। अब मजबूती के साथ सदन में इन सभी मुद्दों को उठाऊंगा। वेतन संरक्षण, वेतन वृद्धि और पत्र निर्गत होने के बाद भी निरंतरता का लाभ नहीं देने के मुद्दे को मैं बिहार के सभी शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ रणनीति बनाकर सदन में रखूंगा और उसका समाधान करूंगा। केवल मदरसा ही नहीं, संस्कृत शिक्षकों को सातवां वेतन दिया जा रहा है। लेकिन महंगाई भत्ता और भविष्य निधि का लाभ नहीं दिया जा रहा है। आखिर उन्हें महंगाई भत्ता और क्यों नहीं दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारी, मंत्री और सरकार के साथ इन वाली बातों के लिए संघर्ष करूंगा। बिहार सरकार के सामने शिक्षा प्राथमिकता की सूची में ऊपर नहीं है। जितने भी विकसित राष्ट्र और राज्य हैं, उनके प्राथमिकता में सबसे ऊपर शिक्षा रहता है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश और राज्य में शिक्षा प्राथमिकता में ऊपर नहीं है। महाविद्यालय शिक्षकों के पद भरे गए हैं, कुछ विज्ञापन जारी हुए, लेकिन अभी भी ढेर सारे पद रिक्त हैं। सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अमली जामा पहनाने की बात करती है। लेकिन ‘टीचर किसी दल से जुड़े नहीं होते’ भास्कर से बातचीत में सुरेश राय ने कहा कि महाविद्यालय में केवल नामांकन होता है, फॉर्म भरा जाता है, परीक्षाएं होती है। हमारी कोशिश की जितनी भी शैक्षणिक अवधि है, इतने दिनों तक हमारे बच्चों को सही तरीके से शिक्षा मिले। सस्ती लोकप्रियता लूटने के नाम पर सरकार राजकीय डिग्री कॉलेज खोल रही है, जहां केवल 6 विषयों की पढ़ाई की व्यवस्था है। हमारी कोशिश होगी कि सभी प्रखंड में जहां भी वित्तरहित कॉलेज में भूमि और भवन है, वहां आधारभूत संरचना को मजबूत कर शिक्षक-कर्मचारियों को सेवा को नियमित कराएं। सेवा में रहने वाले शिक्षक किसी दल से जुड़े हुए नहीं होते हैं। सेवा से बाहर वाले की निष्ठा होती है। आज संपूर्ण शिक्षक समाज अपने आप को अपमानित और उपेक्षित महसूस कर रहा है। जन सुराज ने अपने एजेंडे में शिक्षा को उच्च प्राथमिकता में रखा है। इसलिए शिक्षकों का आकर्षण उस ओर बढ़ रहा है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार में बदलाव की जो परिकल्पना की है, एक नई व्यवस्था बनाने की जो अभिलाषा है, उसमें शिक्षकों का बहुत बड़ा समर्थन में उनके साथ खड़ा मिलेगा। ‘आभार जताने शिक्षकों के बीच जाऊंगा’ सुरेश राय ने कहा कि हमारी सबसे पहली प्राथमिकता होगी कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चारों जिलों में हमारा कार्यालय संचालित होगा। जहां की प्रतिनिधि रहेंगे, शिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पटना जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनकी स्थानीय समस्या का समाधान किया जाएगा। जिस समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर संभव नहीं होगा, उसका मैं राज्य स्तर समाधान कराऊंगा। जैसे मैं वोट मांगने के लिए सभी शिक्षकों के पास गया, उस तरह अब आभार प्रकट करने के लिए सभी शिक्षक भाई-बहनों के बीच जाऊंगा, कृतज्ञता ज्ञापित करूंगा। जैसे हमारे नेता प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से चुनाव जीतने के बाद अपने सरकारी आवास को जन सेवा केंद्र बनाया है। उसी तरह से हम भी अपने सरकारी आवास को सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करुंगा।

