राजस्थान के 42 निजी कृषि कॉलेजों में एडमिशन पर रोक, JET-2026 काउंसलिंग से बाहर; छात्रों की बढ़ी टेंशन

राजस्थान के 42 निजी कृषि कॉलेजों में एडमिशन पर रोक, JET-2026 काउंसलिंग से बाहर; छात्रों की बढ़ी टेंशन

उदयपुर: राजस्थान में पिछले तीन वर्षों से नियमों और तय मानकों के बिना संचालित हो रहे निजी कृषि महाविद्यालयों पर कृषि विभाग के बाद अब हाईकोर्ट ने भी शिकंजा कस दिया है। वर्ष 2022 की राज्य कृषि शिक्षा नीति की अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट ने कृषि विभाग की ओर से इनके अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। हाईकोर्ट की ओर से सात प्रमुख निजी कृषि कॉलेजों की याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश के लगभग 42 निजी कृषि कॉलेजों में इस शैक्षणिक सत्र में नए दाखिले नहीं होंगे।

इनमें 31 निजी कृषि कॉलेज और 11 निजी विश्वविद्यालयों से संबद्ध कृषि कॉलेज शामिल हैं। यदि प्रति कॉलेज न्यूनतम 60 स्वीकृत सीटें भी मानी जाएं, तो इस बार संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेट) के जरिए करीब 2,520 बीएससी (कृषि) सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह बंद रहेगी।

दो टूक: 6 साल की मियाद कोई सुरक्षा कवच नहीं

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि आईसीएआर से मान्यता प्राप्त करने के लिए छह वर्ष का समय मिलता है। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि छह वर्ष का समय केवल अंतिम मान्यता के लिए है, न कि वार्षिक एनओसी विस्तार की 11 बुनियादी शर्तों से बचने का सुरक्षा कवच। अदालत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जा सकता।

इन 7 कॉलेजों की याचिकाएं खारिज

  • एसकेडी कृषि कॉलेज (हनुमानगढ़)
  • श्री विनायक कृषि कॉलेज (जयपुर)
  • एसएलबीएस कृषि कॉलेज (जोधपुर)
  • श्रीनाथजी कृषि कॉलेज (नाथद्वारा)
  • एपेक्स कृषि संस्थान (कोटा)
  • ब्राइट करियर कृषि कॉलेज (नोखा)
  • सौरभ कृषि कॉलेज (हिंडौन)

काउंसलिंग के बीच विभाग ने रोकी थी एनओसी

बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जेट काउंसलिंग-2026 के बीच ही कृषि आयुक्त ने 10 अक्टूबर को नियमों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों की शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एनओसी विस्तार की याचिका खारिज कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ निजी कृषि कॉलेजों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। विकल्प फॉर्म भरने की अंतिम तिथि से ठीक पहले रविवार देर रात न्यायाधीश नूपुर भाटी ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके बाद विभाग ने 42 कॉलेजों की एनओसी रद्द कर दी। प्रशासनिक आदेश और अदालती रुख के अनुसार, इन कॉलेजों में पहले से अध्ययनरत छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे अपनी डिग्री पूरी कर सकेंगे।

इन नियमों का किया उल्लंघन

  • विभागीय जांच में सामने आया कि ये कॉलेज 20 सितंबर 2022 की नीति के खंड 8.2 के तहत तय अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन कर रहे थे।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की मान्यता के लिए निर्धारित समय-सीमा में आवेदन तक नहीं किया गया।
  • तय मानकों के अनुरूप शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्तियां नहीं की गईं।
  • स्टॉफ को नियमित वेतन भुगतान, भविष्य निधि (पीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और बायोमेट्रिक उपस्थिति की अनिवार्य व्यवस्था का पालन नहीं किया गया।
  • कई कॉलेजों की आधिकारिक वेबसाइट तक नहीं बनी थी। जिनकी वेबसाइट बनी थी, उन्होंने भी आवंटित छात्रों से जुड़ी अनिवार्य जानकारियां अपलोड नहीं की थीं।

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