बठिंडा में मिलावटखोरों पर शिकंजा, 20 सैंपल भरे:दीवाली पर अलर्ट सेहत विभाग; रामपुरा और मौड़ में छापे, अनफिट मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

बठिंडा में मिलावटखोरों पर शिकंजा, 20 सैंपल भरे:दीवाली पर अलर्ट सेहत विभाग; रामपुरा और मौड़ में छापे, अनफिट मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

बठिंडा में दीवाली के त्योहारी सीजन के नजदीक आते ही मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल रोकने के लिए सेहत विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। बठिंडा जिले में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर नकेल कसने के लिए फूड सेफ्टी विंग ने व्यापक स्तर पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान बठिंडा शहर, मौड़ मंडी और रामपुरा-मेहराज इलाके में दबिश देकर मिठाइयों और डेयरी उत्पादों के कुल 20 संदिग्ध सैंपल सील किए गए। विभागीय टीम ने रामपुरा-मेहराज क्षेत्र की दुकानों व निर्माण इकाइयों से बर्फी, खोया, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, लड्डू और पेड़ा समेत कुल 6 सैंपल भरे। वहीं मौड़ मंडी से मिल्क केक, पनीर, खोया, देसी घी, बर्फी व अन्य दुग्ध उत्पादों के 7 सैंपल एकत्र किए गए। इसके अलावा बठिंडा शहर 7 सैंपलों को सीलबंद कर स्टेट फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी, खरड़ भेज दिया गया है। अधिकारियों की दोहरी टीमों ने एक साथ दी दबिश
जिले भर में की गई इस बड़ी कार्रवाई की निगरानी सहायक फूड कमिश्नर अमृतपाल सिंह सोढ़ी ने की। बठिंडा शहर व मौड़ मंडी में फूड सेफ्टी ऑफिसर नवदीप सिंह, दिव्या गोस्वामी, विकास और सिकंदर सिंह की टीम ने दुकानों का औचक निरीक्षण किया। वहीं रामपुरा-मेहराज इलाके में फूड सेफ्टी ऑफिसर श्रीमती सरबजीत कौर और सिकंदर सिंह ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर मिठाइयों की भट्टियों और रिटेल काउंटरों की बारीकी से जांच की। बिना मेडिकल सर्टिफिकेट मिले कारीगर, गंदगी पर थमाए नोटिस
जांच दल ने सिर्फ मिठाइयों के नमूने ही नहीं लिए, बल्कि निर्माण स्थलों (वर्कशॉप) की जमीनी हकीकत भी परखी। चेकिंग के दौरान दुकानदारों के फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के तहत जरूरी लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों का मिलान किया गया। जांच में सबसे गंभीर लापरवाही कारीगरों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर सामने आई। खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक खाद्य सामग्री तैयार करने वाले कारीगरों का मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है, लेकिन कई दुकानों पर कारीगरों के पास कोई सर्टिफिकेट नहीं मिला। इसके अलावा मिठाइयां बनाने वाले कमरों में भारी गंदगी, बासी तेल का उपयोग और खुले में रखी सामग्री पाई गई। विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों को मौके पर ही सुधार नोटिस जारी किए और चेतावनी दी कि दोबारा ऐसी लापरवाही मिलने पर लाइसेंस रद्द किया जाएगा। 1 जनवरी से 27 अक्टूबर तक का रिपोर्ट कार्ड: 38% नमूनों में मिली खामी
बठिंडा जिले में इस साल मिलावट के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से लेकर 27 अक्टूबर 2026 तक फूड सेफ्टी विंग ने जिले के विभिन्न हिस्सों से कुल 342 खाद्य पदार्थों के सैंपल जुटाए थे।
इनमें से अब तक प्राप्त 290 लैब रिपोर्टों में से 112 सैंपल फेल (सब-स्टैंडर्ड, अनसेफ या मिसब्रांडेड) पाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दूध, पनीर, खोया और मसालों की रही। विभाग ने इन मामलों में एडीएम कोर्ट और स्पेशल कोर्ट में चालान दायर किए हैं, जहां कई मामलों में लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है। पिछली दीवाली पर 48 में से 18 सैंपल हुए थे फेल
बीते साल यानी दीवाली 2025 के त्योहारी सीजन के दौरान जिले भर से 48 मिठाइयों और दूध उत्पादों के सैंपल भरे गए थे। जांच के बाद खरड़ लैब से आई रिपोर्ट में 18 सैंपल फेल पाए गए थे। अधिकांश मामलों में खोया और पनीर में स्टार्च, डिटर्जेंट और गैर-खाद्य रंगों (सिंथेटिक डाई) की मिलावट पाई गई थी।
लैब रिपोर्ट आते ही दर्ज होंगे मुकदमे
सहायक फूड कमिश्नर अमृतपाल सिंह सोढ़ी ने बताया कि त्योहारी सीजन में बाहरी राज्यों और जिलों से आने वाले सिंथेटिक खोया और मिलावटी पनीर पर विभाग की विशेष नजर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरड़ लैब से रिपोर्ट आते ही अगर किसी भी सैंपल में असुरक्षित या घटिया सामग्री की पुष्टि होती है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत अदालत में केस दर्ज कराया जाएगा। किसी भी सूरत में आमजन की सेहत से समझौता नहीं होगा।

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