दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान 22 वर्षीय एक युवक की मौत के मामले में पांच लोगों की दोषसिद्धि और उन्हें सुनाई गई सात साल की कैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने अमन कश्यप, देविंदर कुमार, प्रदीप राय, आशीष और अरुण कुमार की अपील खारिज कर दी। इन लोगों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
अदालत ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शी के बयान के अनुसार, अपीलकर्ता हथियारों से लैस भीड़ में सबसे आगे थे और उन्होंने अन्य लोगों को मोहसिन पर हमला करने के लिए उकसाया था। निचली अदालत ने 20 नवंबर, 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के भाग एक (गैर इरादतन हत्या) और धारा 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करना) के तहत अपीलकर्ताओं को दोषी ठहराया था। अदालत ने 13 जनवरी, 2025 को उन्हें सात साल के कठोर कारावास और 30,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अपीलकर्ताओं ने दलील दी कि स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया और उनके खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए। अदालत ने अपीलकर्ताओं की दलीलें खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर वे बरी होने का दावा नहीं कर सकते कि अभियोजन पक्ष यह निर्धारित नहीं कर पाया कि भीड़ के किस सदस्य ने पीड़ित के सिर पर जानलेवा चोट पहुंचाई थी। अदालत ने 27 अक्टूबर को पारित अपने फैसले में कहा, ‘‘इस मामले में साक्ष्य केवल भीड़ में अपीलकर्ताओं की मौजूदगी तक सीमित नहीं हैं।
गवाह संख्या 10 (बीट कांस्टेबल) ने पांचों अपीलकर्ताओं की पहचान हथियारों से लैस भीड़ में सबसे आगे मौजूद उन लोगों के रूप में की, जो अन्य लोगों को पीड़ित पर हमला करने के लिए उकसा रहे थे।’’
अदालत ने कहा, ‘‘पीड़ित (मोहसिन) व्यक्ति का पीछा किया गया, उसे घेर लिया गया और पुलिस के अवरोधकों के पास गिर जाने के बाद भी उस पर हमला किया गया। अपीलकर्ताओं पर लगाए गए आरोपों, भीड़ के सदस्यों के पास मौजूद हथियारों और पीड़ित (मोहसिन) पर लगातार किए गए हमले से यह निष्कर्ष निकालने का तथ्यात्मक आधार मिलता है कि उस भीड़ का साझा गैरकानूनी उद्देश्य पीड़ित पर हमला करना और उसे शारीरिक चोट पहुंचाना था।’’
आरोप है कि 25 फरवरी, 2020 को सांप्रदायिक हिंसा के दौरान चांद बाग इलाके में अपीलकर्ताओं ने पीड़ित पर हमला किया था और चोटों के कारण मोहसिन की मौत हो गई थी। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि साक्ष्यों से साबित होता है कि 25 फरवरी, 2020 को चांद बाग इलाके में पीर बाबा की मजार के पास घातक हथियारों से लैस दंगाई भीड़ ने मोहसिन की हत्या कर दी थी।
निचली अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों से इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता कि पांचों आरोपी उस दंगाई भीड़ का हिस्सा थे, जिसने पीड़ित पर हमला किया था।

