रिशु श्री टेंडर घोटाला, IAS धर्मेंद्र कुमार ED कार्यालय पहुंचे:आज अपना पक्ष रखेंगे, सुनील यादव से 7.5 घंटे हुई पूछताछ; हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद कार्रवाई

रिशु श्री टेंडर घोटाला, IAS धर्मेंद्र कुमार ED कार्यालय पहुंचे:आज अपना पक्ष रखेंगे, सुनील यादव से 7.5 घंटे हुई पूछताछ; हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद कार्रवाई

रिशु श्री से जुड़े टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। ED के नोटिस पर IAS धर्मेंद्र कुमार बुधवार को पटना स्थित ED कार्यालय पहुंचे हैं। उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था। धर्मेंद्र कुमार ED के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इससे पहले सोमवार को IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा और मंगलवार को IAS सुनील यादव से ED की टीम ने पूछताछ की थी। सुनील यादव से करीब साढ़े सात घंटे तक सवाल-जवाब किए गए थे। ED इस मामले में बिहार के 6 IAS अधिकारियों को समन भेज चुकी है। जांच का केंद्र सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितता और अधिकारियों के साथ रिशु श्री के संबंध हैं। 6 IAS अधिकारियों को भेजा गया समन ED ने इस मामले में आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव को समन भेजा था। इन अधिकारियों से रिशु श्री से जुड़े टेंडर और कथित लेन-देन के संबंध में पूछताछ की जानी है। योगेश कुमार सागर ने पूछताछ के लिए अगले सप्ताह का समय मांगा था। वहीं, आनंद किशोर समेत अन्य अधिकारियों को 30 अक्टूबर तक पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ED की जांच में अधिकारियों और रिशु श्री के बीच कथित सांठगांठ की पड़ताल की जा रही है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई कार्रवाई रिशु श्री की जमानत याचिका विजिलेंस कोर्ट से खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले में बड़े अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि रिशु श्री एक छोटा मोहरा है और बड़े अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। इस टिप्पणी के बाद मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हुई। ED की ओर से IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने को इसी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले जानिए कौन है रिशु श्री? रिशु श्री मूल रूप से बिहार के सारण जिले का रहने वाला है। वह वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव हंस और अन्य अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी है। उसके खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामला दर्ज किया था। ED की जांच के मुताबिक, रिशु श्री सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर फायदा पहुंचाता था। इसके बदले उसे सरकारी टेंडरों से जुड़ी अहम जानकारी पहले ही मिल जाती थी। आरोप है कि वह अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर टेंडर की शर्तों में बदलाव करवाता और अपनी पसंद के ठेकेदारों को काम दिलाता था। इसके बदले कमीशन लिए जाने और उसका हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने की आशंका भी जांच के दायरे में रही है। पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग कराने का आरोप जांच एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु श्री सरकारी ठेके हासिल करने के लिए अपनी पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग कराने की कोशिश करता था। जांच में मुमुक्षु चौधरी के बयान का भी जिक्र किया गया था। आरोप के मुताबिक, सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए रिशु श्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को 25 लाख रुपए दिए थे। IAS योगेश कुमार सागर और परिवार की विदेश यात्रा ED की जांच में बुडको के तत्कालीन प्रबंध निदेशक IAS योगेश कुमार सागर और उनके परिवार की विदेश यात्राओं का भी जिक्र आया था। आरोप था कि रिशु श्री ने योगेश कुमार सागर के परिवार के छह सदस्यों की विदेश यात्रा का खर्च उठाया था। जून 2024 में ऑस्ट्रिया यात्रा कराए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी जांच एजेंसी ने इन यात्राओं और सरकारी ठेकों के बीच कथित संबंधों की पड़ताल की थी। छापेमारी के दौरान रिशु श्री के घर से नकदी और जेवरात मिलने की बात भी सामने आई थी। BMSICL के ठेकों और विदेश यात्राओं की भी जांच ED की जांच में IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा और उनके परिवार की विदेश यात्रा पर करीब 19 लाख रुपए खर्च किए जाने का आरोप भी सामने आया था। जांच में दोनों के बीच व्हाट्सऐप चैट का जिक्र किया गया था। इसके अलावा, BMSICL के तत्कालीन MD धर्मेंद्र कुमार की विदेश यात्राओं की बात भी जांच के दायरे में आई थी। जांच एजेंसी इन यात्राओं और रिशु श्री की संस्थाओं को मिले ठेकों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही थी। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। टेंडर की शर्तें पहले से हासिल करने का आरोप ED की जांच के अनुसार, रिशु श्री पर केवल टेंडर हासिल करने में ही नहीं, बल्कि अधिकारियों को कथित लाभ पहुंचाकर टेंडर की शर्तों को प्रभावित करने का भी आरोप था। जांच एजेंसी को आशंका थी कि टेंडर जारी होने से पहले ही उसे शर्तों की जानकारी मिल जाती थी और वह अपनी पसंद के ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश करता था। मामले में 265.73 करोड़ रुपए की संपत्ति का भी जिक्र सामने आया था। ED कथित भ्रष्टाचार, संपत्ति और अधिकारियों के साथ संबंधों की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। ED अधिकारियों को फेसटाइम पर धमकी देने का आरोप 10 सितंबर 2025 को ED ने पटना के SSP को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि रिशु श्री फेसटाइम और टेलीग्राम के जरिए अधिकारियों को आत्महत्या की धमकी दे रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, वह समन से बचने के लिए कथित तौर पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का भी सहारा ले चुका था। अब IAS अधिकारियों से पूछताछ के जरिए ED टेंडर आवंटन, कथित लेन-देन और रिशु श्री से उनके संबंधों की जानकारी जुटा रही है। धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी। रिशु श्री से जुड़े टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। ED के नोटिस पर IAS धर्मेंद्र कुमार बुधवार को पटना स्थित ED कार्यालय पहुंचे हैं। उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था। धर्मेंद्र कुमार ED के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इससे पहले सोमवार को IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा और मंगलवार को IAS सुनील यादव से ED की टीम ने पूछताछ की थी। सुनील यादव से करीब साढ़े सात घंटे तक सवाल-जवाब किए गए थे। ED इस मामले में बिहार के 6 IAS अधिकारियों को समन भेज चुकी है। जांच का केंद्र सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितता और अधिकारियों के साथ रिशु श्री के संबंध हैं। 6 IAS अधिकारियों को भेजा गया समन ED ने इस मामले में आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव को समन भेजा था। इन अधिकारियों से रिशु श्री से जुड़े टेंडर और कथित लेन-देन के संबंध में पूछताछ की जानी है। योगेश कुमार सागर ने पूछताछ के लिए अगले सप्ताह का समय मांगा था। वहीं, आनंद किशोर समेत अन्य अधिकारियों को 30 अक्टूबर तक पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ED की जांच में अधिकारियों और रिशु श्री के बीच कथित सांठगांठ की पड़ताल की जा रही है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई कार्रवाई रिशु श्री की जमानत याचिका विजिलेंस कोर्ट से खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले में बड़े अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि रिशु श्री एक छोटा मोहरा है और बड़े अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। इस टिप्पणी के बाद मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हुई। ED की ओर से IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने को इसी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले जानिए कौन है रिशु श्री? रिशु श्री मूल रूप से बिहार के सारण जिले का रहने वाला है। वह वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव हंस और अन्य अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी है। उसके खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामला दर्ज किया था। ED की जांच के मुताबिक, रिशु श्री सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर फायदा पहुंचाता था। इसके बदले उसे सरकारी टेंडरों से जुड़ी अहम जानकारी पहले ही मिल जाती थी। आरोप है कि वह अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर टेंडर की शर्तों में बदलाव करवाता और अपनी पसंद के ठेकेदारों को काम दिलाता था। इसके बदले कमीशन लिए जाने और उसका हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने की आशंका भी जांच के दायरे में रही है। पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग कराने का आरोप जांच एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु श्री सरकारी ठेके हासिल करने के लिए अपनी पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग कराने की कोशिश करता था। जांच में मुमुक्षु चौधरी के बयान का भी जिक्र किया गया था। आरोप के मुताबिक, सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए रिशु श्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को 25 लाख रुपए दिए थे। IAS योगेश कुमार सागर और परिवार की विदेश यात्रा ED की जांच में बुडको के तत्कालीन प्रबंध निदेशक IAS योगेश कुमार सागर और उनके परिवार की विदेश यात्राओं का भी जिक्र आया था। आरोप था कि रिशु श्री ने योगेश कुमार सागर के परिवार के छह सदस्यों की विदेश यात्रा का खर्च उठाया था। जून 2024 में ऑस्ट्रिया यात्रा कराए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी जांच एजेंसी ने इन यात्राओं और सरकारी ठेकों के बीच कथित संबंधों की पड़ताल की थी। छापेमारी के दौरान रिशु श्री के घर से नकदी और जेवरात मिलने की बात भी सामने आई थी। BMSICL के ठेकों और विदेश यात्राओं की भी जांच ED की जांच में IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा और उनके परिवार की विदेश यात्रा पर करीब 19 लाख रुपए खर्च किए जाने का आरोप भी सामने आया था। जांच में दोनों के बीच व्हाट्सऐप चैट का जिक्र किया गया था। इसके अलावा, BMSICL के तत्कालीन MD धर्मेंद्र कुमार की विदेश यात्राओं की बात भी जांच के दायरे में आई थी। जांच एजेंसी इन यात्राओं और रिशु श्री की संस्थाओं को मिले ठेकों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही थी। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। टेंडर की शर्तें पहले से हासिल करने का आरोप ED की जांच के अनुसार, रिशु श्री पर केवल टेंडर हासिल करने में ही नहीं, बल्कि अधिकारियों को कथित लाभ पहुंचाकर टेंडर की शर्तों को प्रभावित करने का भी आरोप था। जांच एजेंसी को आशंका थी कि टेंडर जारी होने से पहले ही उसे शर्तों की जानकारी मिल जाती थी और वह अपनी पसंद के ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश करता था। मामले में 265.73 करोड़ रुपए की संपत्ति का भी जिक्र सामने आया था। ED कथित भ्रष्टाचार, संपत्ति और अधिकारियों के साथ संबंधों की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। ED अधिकारियों को फेसटाइम पर धमकी देने का आरोप 10 सितंबर 2025 को ED ने पटना के SSP को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि रिशु श्री फेसटाइम और टेलीग्राम के जरिए अधिकारियों को आत्महत्या की धमकी दे रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, वह समन से बचने के लिए कथित तौर पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का भी सहारा ले चुका था। अब IAS अधिकारियों से पूछताछ के जरिए ED टेंडर आवंटन, कथित लेन-देन और रिशु श्री से उनके संबंधों की जानकारी जुटा रही है। धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।  

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