आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नहीं तो भी दें मुआवजा:कोविड-19 से मौत मामले में हाईकोर्ट ने ने 50 लाख रुपये देने का दिया आदेश

आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नहीं तो भी दें मुआवजा:कोविड-19 से मौत मामले में हाईकोर्ट ने ने 50 लाख रुपये देने का दिया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोविड-19 से मौत के मामले में आरटी-पीसीआर रिपोर्ट की अलग प्रति उपलब्ध नहीं होने के आधार पर मुआवजे से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में एंटीजन जांच पॉजिटिव होने और कोविड से मौत की पुष्टि है तो इन दस्तावेजों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने सोनभद्र के जिलाधिकारी के मुआवजा देने से इनकार करने के आदेश को रद्द करते हुए मृतक की पत्नी को 50 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का निर्देश दिया है। इसके लिए आठ सप्ताह की समयसीमा तय की गई है। यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया एवं जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अर्चना सिंह की याचिका पर दिया है। क्या है मामला जानिये मामले के अनुसार, याची के पति रवींद्र कुमार सिंह उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओबरा तापीय विद्युत परियोजना में जूनियर इंजीनियर थे। कोरोना महामारी के दौरान वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे। 28 अप्रैल 2021 को उन्हें सोनभद्र के लोढ़ी स्थित 200 बेड के सुपर स्पेशियलिटी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के बेड हेड टिकट में उनकी एंटीजन जांच पॉजिटिव दर्ज थी। उपचार के दौरान पांच मई 2021 को उनकी मौत हो गई। अस्पताल के मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड में कोविड-19 वायरल निमोनिया को मौत का कारण बताया गया था। परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ने मृतक की पत्नी को 50 लाख रुपये की सहायता देने की संस्तुति की थी। जिला प्रशासन ने भी जून 2021 में भुगतान की मंजूरी दे दी थी। इसके बावजूद 16 नवंबर 2021 को जिलाधिकारी ने आरटी-पीसीआर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के आधार पर दावा खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने पूछे सवाल हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी योजना में आरटी-पीसीआर के अलावा एंटीजन या सीटी स्कैन रिपोर्ट को भी मान्यता दी गई है। ऐसे में अस्पताल के रिकॉर्ड में एंटीजन जांच पॉजिटिव होने और कोविड से मौत की पुष्टि के बावजूद केवल अलग रिपोर्ट नहीं होने के आधार पर सहायता रोकना उचित नहीं है। कोर्ट ने जिलाधिकारी का आदेश रद्द करते हुए राज्य सरकार और जिलाधिकारी सोनभद्र को प्रमाणित आदेश प्रस्तुत किए जाने के आठ सप्ताह के भीतर 50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

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