डिंडौरी के उत्कृष्ट विद्यालय मैदान में मंगलवार को जननायक कार्यक्रम के तीसरे दिन गोंड राजा हीरा खान सिंह के पराक्रम पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने राजा की वीरता, स्वाभिमान और युद्ध में जीत की कहानी दिखाई। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, जिला पंचायत अध्यक्ष रुदेश परस्ते, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी सहित कई अधिकारी और दर्शक मौजूद रहे। पूर्वजों के सम्मान के लिए युद्ध का फैसला लोकगाथा के अनुसार, हीरागढ़ के राजा हीरा खान सिंह के पूर्वजों को रैया सिंघोला के राजा तपस्या ने धोखे से मार दिया था। अपने वंश का सम्मान वापस पाने के लिए हीरा खान सिंह ने युद्ध का फैसला किया। यह फैसला तब हुआ, जब उनके सामने राजा तपस्या की बेटी कमाल हीरो से विवाह का प्रस्ताव आया। घोड़े पर सवार होकर पहुंचे रैया सिंघोला लोकगाथा के मुताबिक, माता के मना करने के बावजूद हीरा खान सिंह अपने घोड़े साह करन पर सवार होकर रैया सिंघोला पहुंचे। उन्होंने दुश्मन सेना को हराकर जीत हासिल की। राजा तपस्या उनकी वीरता से प्रभावित हुए और अपनी बेटी कमाल हीरो का विवाह उनसे कर दिया। नई पीढ़ी को जनजातीय इतिहास से परिचित कराने का उद्देश्य जननायक कार्यक्रम का मकसद नई पीढ़ी को जनजातीय इतिहास और लोकनायकों की शौर्य गाथाओं से परिचित कराना है। इसी कड़ी में राजा हीरा खान सिंह के पराक्रम की कहानी नाटक के जरिए प्रस्तुत की गई।

