ढाई लाख से शुरू किया मशरूम का कारोबार:आज करोड़ों का टर्नओवर; पश्चिम चंपारण के उपेंद्र बने ‘मशरूम किंग’

ढाई लाख से शुरू किया मशरूम का कारोबार:आज करोड़ों का टर्नओवर; पश्चिम चंपारण के उपेंद्र बने ‘मशरूम किंग’

पश्चिम चंपारण में कोरोना महामारी ने कई लोगों के सपनों पर ब्रेक लगा दिया, लेकिन नौतन प्रखंड के बेलवा पकड़िया गांव के 32 वर्षीय उपेंद्र कुशवाहा ने मुश्किलों को ही अपनी ताकत बना लिया। कृषि में स्नातक की पढ़ाई के बाद बाहर नौकरी करने की योजना बना रहे उपेंद्र ने परिस्थितियां बदलने पर गांव में ही कारोबार शुरू करने का फैसला किया। महज 700 बैग और करीब 2.50 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू हुआ उनका मशरूम उत्पादन का कारोबार आज सालाना करोड़ों रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। अपनी मेहनत और उत्पाद की गुणवत्ता के दम पर वह इलाके में ‘मशरूम किंग’ के नाम से पहचान बना चुके हैं। छोटी-सी मड़ई में 700 बैग से शुरुआत उपेंद्र ने मशरूम उत्पादन शुरू करने से पहले इसका प्रशिक्षण लिया। इसके बाद एक छोटी-सी मड़ई में 700 बैग लगाकर बटन मशरूम की खेती शुरू की। शुरुआती दौर में उन्होंने करीब ढाई लाख रुपये की पूंजी लगाई। उनके मुताबिक, लगभग 45 दिनों में मशरूम निकलने लगते थे, जबकि करीब 70 दिनों में फसल चक्र पूरा हो जाता था। शुरुआती दो-तीन महीनों में ही उन्हें इस व्यवसाय की संभावनाओं का अंदाजा होने लगा। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बनाई। मुनाफा बढ़ा तो खड़ी कीं आधुनिक उत्पादन इकाइयां शुरुआती सफलता के बाद उपेंद्र ने कारोबार का विस्तार किया। छोटी मड़ई से आगे बढ़ते हुए उन्होंने पक्की उत्पादन इकाइयां तैयार कराईं। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय स्पॉन यानी मशरूम के बीज और मशरूम उत्पादन किट तैयार करने का काम भी शुरू किया। बेहतर गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति के कारण दूसरे मशरूम कारोबारी भी उनसे जुड़ने लगे। इससे उनके व्यवसाय का दायरा लगातार बढ़ता गया। आठ इकाइयां, चार राज्यों तक पहुंच रहा मशरूम वर्तमान में उपेंद्र के पास करीब 2,000 बैग की क्षमता वाली आठ आधुनिक उत्पादन इकाइयां हैं। उनके अनुसार, इन इकाइयों से प्रत्येक फसल चक्र में करीब 12 टन तक मशरूम का उत्पादन होता है। उनके उत्पाद की आपूर्ति बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में की जाती है। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ उनका कारोबार अब दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंच चुका है। गांव में रहकर खड़ा किया करोड़ों का कारोबार उपेंद्र का कारोबार अब सालाना करोड़ों रुपये के टर्नओवर तक पहुंचने का दावा है। उनकी कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण, मेहनत, गुणवत्ता और बाजार की समझ के सहारे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं। नौकरी की योजना बाधित होने के बाद उन्होंने गांव में ही रोजगार का रास्ता चुना और मशरूम उत्पादन को अपनी पहचान बना लिया। उनकी सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए खेती को उद्यम के रूप में अपनाने की प्रेरणा बन सकती है। पश्चिम चंपारण में कोरोना महामारी ने कई लोगों के सपनों पर ब्रेक लगा दिया, लेकिन नौतन प्रखंड के बेलवा पकड़िया गांव के 32 वर्षीय उपेंद्र कुशवाहा ने मुश्किलों को ही अपनी ताकत बना लिया। कृषि में स्नातक की पढ़ाई के बाद बाहर नौकरी करने की योजना बना रहे उपेंद्र ने परिस्थितियां बदलने पर गांव में ही कारोबार शुरू करने का फैसला किया। महज 700 बैग और करीब 2.50 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू हुआ उनका मशरूम उत्पादन का कारोबार आज सालाना करोड़ों रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। अपनी मेहनत और उत्पाद की गुणवत्ता के दम पर वह इलाके में ‘मशरूम किंग’ के नाम से पहचान बना चुके हैं। छोटी-सी मड़ई में 700 बैग से शुरुआत उपेंद्र ने मशरूम उत्पादन शुरू करने से पहले इसका प्रशिक्षण लिया। इसके बाद एक छोटी-सी मड़ई में 700 बैग लगाकर बटन मशरूम की खेती शुरू की। शुरुआती दौर में उन्होंने करीब ढाई लाख रुपये की पूंजी लगाई। उनके मुताबिक, लगभग 45 दिनों में मशरूम निकलने लगते थे, जबकि करीब 70 दिनों में फसल चक्र पूरा हो जाता था। शुरुआती दो-तीन महीनों में ही उन्हें इस व्यवसाय की संभावनाओं का अंदाजा होने लगा। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बनाई। मुनाफा बढ़ा तो खड़ी कीं आधुनिक उत्पादन इकाइयां शुरुआती सफलता के बाद उपेंद्र ने कारोबार का विस्तार किया। छोटी मड़ई से आगे बढ़ते हुए उन्होंने पक्की उत्पादन इकाइयां तैयार कराईं। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय स्पॉन यानी मशरूम के बीज और मशरूम उत्पादन किट तैयार करने का काम भी शुरू किया। बेहतर गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति के कारण दूसरे मशरूम कारोबारी भी उनसे जुड़ने लगे। इससे उनके व्यवसाय का दायरा लगातार बढ़ता गया। आठ इकाइयां, चार राज्यों तक पहुंच रहा मशरूम वर्तमान में उपेंद्र के पास करीब 2,000 बैग की क्षमता वाली आठ आधुनिक उत्पादन इकाइयां हैं। उनके अनुसार, इन इकाइयों से प्रत्येक फसल चक्र में करीब 12 टन तक मशरूम का उत्पादन होता है। उनके उत्पाद की आपूर्ति बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में की जाती है। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ उनका कारोबार अब दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंच चुका है। गांव में रहकर खड़ा किया करोड़ों का कारोबार उपेंद्र का कारोबार अब सालाना करोड़ों रुपये के टर्नओवर तक पहुंचने का दावा है। उनकी कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण, मेहनत, गुणवत्ता और बाजार की समझ के सहारे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं। नौकरी की योजना बाधित होने के बाद उन्होंने गांव में ही रोजगार का रास्ता चुना और मशरूम उत्पादन को अपनी पहचान बना लिया। उनकी सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए खेती को उद्यम के रूप में अपनाने की प्रेरणा बन सकती है।  

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