भारत की स्टार पैरा तीरंदाज शीतल देवी सोशल मीडिया की चर्चाओं से दूर रहकर अपना पूरा ध्यान खेल पर केंद्रित करना चाहती हैं क्योंकि लगातार पदक जीतने से उनसे उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। शीतल जापान में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद रविवार को अपने साथी भारतीय तीरंदाजों के साथ स्वदेश लौटीं, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने कंपाउंड व्यक्तिगत, मिश्रित टीम और महिला टीम स्पर्धाओं में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता।शीतल ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं अपने खेल पर ध्यान देती हूं। सोशल मीडिया ज्यादा नहीं देखती। लेकिन जब मैं पदक जीतती हूं और लोग मुझसे मिलने आते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होती है।यहां तक कि बहुत छोटे बच्चे भी मुझे देखते हैं, इसलिए यह बहुत अच्छा लगता है। ’’
जम्मू की 19 वर्षीय शीतल ने अपने तीन पदकों में व्यक्तिगत स्पर्धा के स्वर्ण को सबसे खास बताया। उन्होंने कहा, ‘‘व्यक्तिगत स्पर्धा मेरे लिए सबसे खास थी।बाकी पदक भी विशेष हैं, लेकिन चैंपियन बनकर लौटने के लिए मेरा ध्यान व्यक्तिगत स्पर्धा पर अधिक था जिसमें मैंने जीत हासिल की। ’’
पेरिस पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हरविंदर सिंह ने कहा कि भारत की रिकर्व टीम ने बढ़ी हुई उम्मीदों के दबाव को अच्छी तरह संभाला और महाद्वीपीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। हरविंदर ने कहा, ‘‘अधिक उम्मीदों के कारण दबाव निश्चित रूप से बढ़ता है, लेकिन मुझे खुशी है कि हमने उस दबाव को अच्छी तरह संभाला।हमारा अभ्यास शानदार था, महासंघ का समर्थन बेहतरीन रहा और वहां हमें एक सप्ताह तक प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। इन सभी चीजों से तीरंदाजी में हमें फायदा हुआ। ’’
एशियाई पैरा खेलों में भारत का तीरंदाजी अभियान अब तक का सर्वश्रेष्ठ रहा।भारतीय खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण और इतने ही रजत पदक जीते। हरविंदर ने कहा, ‘‘जब पूरी टीम पदक जीतती है, तो बहुत अच्छा लगता है। 2018 में केवल मैंने व्यक्तिगत पदक जीता था, लेकिन इस बार मुझे खुशी है कि कई और पदक आए हैं।जो कुछ खिलाड़ी पदक नहीं जीत सके, हमें उम्मीद है कि अगली बार हमारी पूरी टीम पदक लेकर लौटेगी। ’’
वहीं पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में अपने अभियान को सपने के सच होने जैसा बताया। उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीतने के साथ पांच रिकॉर्ड बनाए, जिनमें एक विश्व रिकॉर्ड भी शामिल है।नागोया में आयोजित समापन समारोह के लिए भारत की ध्वजवाहक चुनी गईं मोना भारत के 114 पदकों के अभियान की सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरीं। स्वदेश लौटने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगी कि बहुत कम समय में मैं जापान से ढेर सारी खुशियां लेकर लौटी हूं। मुझे पदक जीतने की उम्मीद थी, लेकिन जब एक साथ पांच रिकॉर्ड बने और मुझे ध्वजवाहक बनने का अवसर मिला, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पदक जीतना, रिकॉर्ड बनाना और ध्वजवाहक बनना, ये सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। यह किसी सपने जैसा लगता है।जब मैं जापान के लिए रवाना हुई थी, तब मैंने सोचा था कि दो पदक लेकर लौटूंगी। लेकिन मैंने यह नहीं सोचा था कि दो स्वर्ण पदक, पांच रिकॉर्ड और ध्वजवाहक बनने की उपलब्धि के साथ वापस आऊंगी। ’’
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।उन्होंने फाइनल में हमवतन और अनुभवी खिलाड़ी प्रमोद भगत को हराया। पेरिस पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नितेश ने कहा, ‘‘प्रमोद को दो गेम में हराना निश्चित रूप से बहुत खास है। उनके खिलाफ फाइनल जीतना बहुत बड़ी बात है।फाइनल मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। ’’
नितेश ने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों में अपने खिताब का बचाव करना है। उन्होंने कहा, ‘‘हम उसी लक्ष्य (पैरालंपिक स्वर्ण) को हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन दो साल का सफर लंबा होता है।सबसे पहले हमें क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। लॉस एंजिलिस में अपने खिताब का बचाव करना ही हमारा लक्ष्य रहेगा।
भारत की स्टार पैरा तीरंदाज शीतल देवी सोशल मीडिया की चर्चाओं से दूर रहकर अपना पूरा ध्यान खेल पर केंद्रित करना चाहती हैं क्योंकि लगातार पदक जीतने से उनसे उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। शीतल जापान में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद रविवार को अपने साथी भारतीय तीरंदाजों के साथ स्वदेश लौटीं, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने कंपाउंड व्यक्तिगत, मिश्रित टीम और महिला टीम स्पर्धाओं में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता।
शीतल ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं अपने खेल पर ध्यान देती हूं। सोशल मीडिया ज्यादा नहीं देखती। लेकिन जब मैं पदक जीतती हूं और लोग मुझसे मिलने आते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होती है।
यहां तक कि बहुत छोटे बच्चे भी मुझे देखते हैं, इसलिए यह बहुत अच्छा लगता है। ’’
जम्मू की 19 वर्षीय शीतल ने अपने तीन पदकों में व्यक्तिगत स्पर्धा के स्वर्ण को सबसे खास बताया। उन्होंने कहा, ‘‘व्यक्तिगत स्पर्धा मेरे लिए सबसे खास थी।
बाकी पदक भी विशेष हैं, लेकिन चैंपियन बनकर लौटने के लिए मेरा ध्यान व्यक्तिगत स्पर्धा पर अधिक था जिसमें मैंने जीत हासिल की। ’’
पेरिस पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हरविंदर सिंह ने कहा कि भारत की रिकर्व टीम ने बढ़ी हुई उम्मीदों के दबाव को अच्छी तरह संभाला और महाद्वीपीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। हरविंदर ने कहा, ‘‘अधिक उम्मीदों के कारण दबाव निश्चित रूप से बढ़ता है, लेकिन मुझे खुशी है कि हमने उस दबाव को अच्छी तरह संभाला।
हमारा अभ्यास शानदार था, महासंघ का समर्थन बेहतरीन रहा और वहां हमें एक सप्ताह तक प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। इन सभी चीजों से तीरंदाजी में हमें फायदा हुआ। ’’
एशियाई पैरा खेलों में भारत का तीरंदाजी अभियान अब तक का सर्वश्रेष्ठ रहा।
भारतीय खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण और इतने ही रजत पदक जीते। हरविंदर ने कहा, ‘‘जब पूरी टीम पदक जीतती है, तो बहुत अच्छा लगता है। 2018 में केवल मैंने व्यक्तिगत पदक जीता था, लेकिन इस बार मुझे खुशी है कि कई और पदक आए हैं।
जो कुछ खिलाड़ी पदक नहीं जीत सके, हमें उम्मीद है कि अगली बार हमारी पूरी टीम पदक लेकर लौटेगी। ’’
वहीं पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में अपने अभियान को सपने के सच होने जैसा बताया। उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीतने के साथ पांच रिकॉर्ड बनाए, जिनमें एक विश्व रिकॉर्ड भी शामिल है।
नागोया में आयोजित समापन समारोह के लिए भारत की ध्वजवाहक चुनी गईं मोना भारत के 114 पदकों के अभियान की सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरीं। स्वदेश लौटने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगी कि बहुत कम समय में मैं जापान से ढेर सारी खुशियां लेकर लौटी हूं। मुझे पदक जीतने की उम्मीद थी, लेकिन जब एक साथ पांच रिकॉर्ड बने और मुझे ध्वजवाहक बनने का अवसर मिला, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।
’’
उन्होंने कहा, ‘‘पदक जीतना, रिकॉर्ड बनाना और ध्वजवाहक बनना, ये सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। यह किसी सपने जैसा लगता है।
जब मैं जापान के लिए रवाना हुई थी, तब मैंने सोचा था कि दो पदक लेकर लौटूंगी। लेकिन मैंने यह नहीं सोचा था कि दो स्वर्ण पदक, पांच रिकॉर्ड और ध्वजवाहक बनने की उपलब्धि के साथ वापस आऊंगी। ’’
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
उन्होंने फाइनल में हमवतन और अनुभवी खिलाड़ी प्रमोद भगत को हराया। पेरिस पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नितेश ने कहा, ‘‘प्रमोद को दो गेम में हराना निश्चित रूप से बहुत खास है। उनके खिलाफ फाइनल जीतना बहुत बड़ी बात है।
फाइनल मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। ’’
नितेश ने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों में अपने खिताब का बचाव करना है। उन्होंने कहा, ‘‘हम उसी लक्ष्य (पैरालंपिक स्वर्ण) को हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन दो साल का सफर लंबा होता है।
सबसे पहले हमें क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। लॉस एंजिलिस में अपने खिताब का बचाव करना ही हमारा लक्ष्य रहेगा।
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