जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का ऐलान:यूनिवर्सिटी प्रशासन बोला- संविधान मंजूर होने के 15 दिन बाद वोटिंग; 14 दिन से भूख हड़ताल पर थे छात्र

जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का ऐलान:यूनिवर्सिटी प्रशासन बोला- संविधान मंजूर होने के 15 दिन बाद वोटिंग; 14 दिन से भूख हड़ताल पर थे छात्र

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में करीब 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सोमवार को आदेश जारी कर बताया छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिन बाद चुनाव होंगे। प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए सस्पेंशन और कारण बताओ नोटिस रद्द करने का भी फैसला लिया है। साथ ही, आंदोलन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी। यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ बहाल करने और चुनाव कराने की मांग को लेकर कई दिनों से प्रदर्शन चल रहा था। कई छात्र पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। प्रदर्शन के बीच यूनिवर्सिटी ने कैंपस बंद कर दिया और क्लासेस ऑनलाइन कर दी थीं। छात्रों से सुबह 4:30 बजे मिले रजिस्ट्रार जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के मुताबिक, जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे कैंपस पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की और प्रशासन का आदेश साझा किया। रजिस्ट्रार ने छात्रों से आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि उनकी मांगें मान ली गई हैं।हालांकि, छात्र संगठन ने आदेश को अस्पष्ट बताया। संगठन के मुताबिक, संविधान को मंजूरी देने की तारीख तय नहीं है। छात्रों ने प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग पर भी स्पष्ट जवाब मांगा है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से मांगें पूरी नहीं मानी जा सकतीं और प्रशासन को सभी मुद्दों पर लिखित प्रतिबद्धता देनी चाहिए। छात्रों से सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और माफी की शर्त यूनिवर्सिटी ने अपने आदेश में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी छात्र प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयानों, गतिविधियों या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सार्वजनिक माफी जारी करेंगे। ऐसे सभी पोस्ट तत्काल सोशल मीडिया से हटाने होंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि इन निर्देशों के पालन पर नजर रखी जाएगी। छात्र बोले- मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने कहा कि स्पष्ट फैसले और समयसीमा के बिना प्रशासन के आश्वासन को मांगों की पूर्ति नहीं माना जा सकता। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन कैंपस में लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रों के निर्वाचित प्रतिनिधित्व को बहाल करने के लिए है। वे चाहते हैं कि छात्रसंघ के जरिए कैंपस से जुड़ी समस्याएं प्रशासन के सामने रखी जा सकें। छात्रों ने प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग पर भी जवाब मांगा है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन सभी मांगों पर स्पष्ट लिखित प्रतिबद्धता नहीं देता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। 2006 में भंग हुआ था छात्रसंघ जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ को 2006 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भंग कर दिया था। इसके बाद से निर्वाचित छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए। मौजूदा प्रदर्शन में छात्र निर्वाचित प्रतिनिधि संस्था की बहाली और कैंपस से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

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